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नई दिल्ली की विशेष अदालत ने कोल ब्लॉक मामले में ईडी की कार्यवाही समाप्त की, आरोपियों को राहत

नई दिल्ली की विशेष अदालत ने कोल ब्लॉक मामले में ईडी की कार्यवाही समाप्त की, आरोपियों को राहत
Coal block allocation ED case closed: नई दिल्ली की विशेष अदालत ने कोल ब्लॉक मामले में ईडी की कार्यवाही समाप्त की, आरोपियों को राहत (Image: AI)

Coal block allocation ED case closed: नई दिल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत ने कोल ब्लॉक आवंटन मामले में विजय दर्डा, देवेंद्र दर्डा, मनोज कुमार जायसवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ ईडी की धनशोधन कार्यवाही समाप्त कर दी। अदालत ने माना कि जब सीबीआई के मूल मामले में सभी आरोपी बरी हो चुके हैं, तो ईडी की कार्यवाही का आधार भी समाप्त हो जाता है।

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Asfi Shadab
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कोल ब्लॉक मामले में अदालत के फैसले से आरोपियों को राहत

Coal block allocation ED case closed: नई दिल्ली: कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में एक बड़े घटनाक्रम में राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने पूर्व सांसद विजय दर्डा, उनके पुत्र देवेंद्र दर्डा, उद्योगपति मनोज कुमार जायसवाल, उनके पुत्र अभिषेक जायसवाल तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की धनशोधन (पीएमएलए) कार्यवाही समाप्त कर दी है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने पारित किया।

ईडी का आरोप था कि मनोज कुमार जायसवाल से जुड़ी कंपनियों से लगभग 24.6 करोड़ रुपये विजय दर्डा और देवेंद्र दर्डा से संबंधित कंपनी को भेजे गए, जिसे बंदर कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े लेन-देन से अर्जित “अपराध की आय” बताया गया था।

गौरतलब है कि 27 मार्च 2026 को इसी अदालत ने सीबीआई के मूल मामले में विजय दर्डा, देवेंद्र दर्डा, मनोज कुमार जायसवाल, एम/एस एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड और पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। यह कोल ब्लॉक मामलों में सीबीआई का पहला आरोपपत्र था।

सीबीआई मामले में बरी होने के बाद ईडी की कार्यवाही भी समाप्त

बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुदित जैन, युगांत शर्मा और खोनिशा गनवीर ने दलील दी कि पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग तभी बनती है जब “निर्धारित अपराध” सिद्ध हो। चूंकि सीबीआई मामले में सभी आरोपी बरी हो चुके हैं, ईडी के मामले का आधार खत्म हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ फैसले का हवाला देकर बचाव पक्ष ने ईडी की दलीलें खारिज करवाईं। अदालत ने यह तर्क स्वीकार करते हुए कार्यवाही समाप्त कर दी।

मनोज कुमार जायसवाल को कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े कई मामलों में पहले भी राहत मिल चुकी है, जिनमें ईडी बनाम अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर (2023), ईडी बनाम जायसवाल नेको इंडस्ट्रीज़ (2024) और ईडी बनाम जेएलडी यवतमाल एनर्जी (2024) शामिल हैं।

इस आदेश के साथ बंदर कोल ब्लॉक मामले की लंबी कानूनी लड़ाई में आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। ईडी आगे इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है, यह देखना बाकी है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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