नागपुर विश्वविद्यालय में हाल ही में संपन्न हुए 113वें दीक्षांत समारोह ने एक बार फिर यह साबित किया कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। यह जीवन में आत्मविश्वास, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में बढ़ने का माध्यम है। इस समारोह में एम्स नागपुर के अध्यक्ष डॉ अनंत पंढरे और कुलगुरू डॉ मनाली क्षीरसागर ने विद्यार्थियों को जो संदेश दिया, वह आज के समय में हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी
डॉ अनंत पंढरे ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से कहा कि हर व्यक्ति के अंदर असीम क्षमताएं छिपी होती हैं। जरूरत है केवल उन्हें पहचानने और आत्मविश्वास के साथ उन पर काम करने की। आज के प्रतिस्पर्धी युग में जहां हर क्षेत्र में चुनौतियां हैं, वहां आत्मविश्वास ही वह हथियार है जो किसी भी विद्यार्थी को सफलता की ओर ले जा सकता है। डॉ पंढरे ने यह भी कहा कि विद्यार्थी ही किसी भी संस्था की पहचान होते हैं। नागपुर विश्वविद्यालय से निकले विद्यार्थियों ने देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायाधीश और समाजसेवी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
शिक्षा का सामाजिक उपयोग
कुलगुरू डॉ मनाली क्षीरसागर ने विद्यार्थियों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी पाना या व्यक्तिगत तरक्की करना नहीं है। शिक्षा का असली उद्देश्य समाज की सेवा करना, पर्यावरण की रक्षा करना और समता तथा बंधुता को बढ़ावा देना है। जब कोई विद्यार्थी अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के विकास के लिए करता है, तभी शिक्षा का वास्तविक महत्व सामने आता है। आज जब देश विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब शिक्षित युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।


विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर आज तक इसने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यह विश्वविद्यालय न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हर साल हजारों विद्यार्थी यहां से पदवी और शोध उपाधि प्राप्त करते हैं। 113वां दीक्षांत समारोह भी इसी परंपरा की एक कड़ी है। इस समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, रजत पदक और अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

युवाओं के लिए प्रेरणा का अवसर
दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है। यह विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। जब वे अपनी डिग्री प्राप्त करते हैं, तो वे एक नए जीवन की ओर कदम बढ़ाते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षाविदों और विद्वानों का मार्गदर्शन उन्हें सही दिशा दिखाता है। डॉ पंढरे और डॉ क्षीरसागर के संदेश ने विद्यार्थियों को यह समझाया कि केवल डिग्री पाना काफी नहीं है, बल्कि उस ज्ञान का सही उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है।
संस्था और विद्यार्थी का रिश्ता
किसी भी शैक्षणिक संस्था की पहचान उसके विद्यार्थियों से बनती है। जब विद्यार्थी अपने जीवन में सफल होते हैं और समाज में योगदान देते हैं, तो उनकी संस्था का नाम भी ऊंचा होता है। नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों से इस संस्था का नाम रोशन किया है। आज भी हजारों विद्यार्थी यहां से शिक्षा प्राप्त करके देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

पुरस्कार और मान्यता का महत्व
दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देने की परंपरा बहुत पुरानी है। यह पुरस्कार विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का सम्मान देते हैं और अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनते हैं। जब कोई विद्यार्थी स्वर्ण पदक या रजत पदक प्राप्त करता है, तो वह केवल एक पदक नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और समर्पण का प्रमाण प्राप्त करता है। इससे अन्य विद्यार्थियों को भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है।
शिक्षा और चरित्र निर्माण
आज की शिक्षा व्यवस्था में केवल अंक और डिग्री पर जोर दिया जाता है, लेकिन असली शिक्षा वह है जो चरित्र का निर्माण करे। डॉ क्षीरसागर ने भी इसी बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों को भी अपने जीवन में उतारना चाहिए। समता, बंधुता, सहयोग और सेवा भाव जैसे गुण किसी भी व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाते हैं। शिक्षा का उद्देश्य अच्छे पेशेवर के साथ-साथ अच्छे इंसान बनाना भी होना चाहिए।

पर्यावरण और शिक्षा
आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब शिक्षित युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। कुलगुरू ने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने का आह्वान किया। शिक्षा के माध्यम से ही लोगों को पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सकता है। युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
भविष्य की राह
113वां दीक्षांत समारोह एक यादगार कार्यक्रम रहा। नेशनल फायर सर्विस कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, प्रबंधन परिषद के सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कुलसचिव डॉ राजू हिवसे सहित सभी अधिकारियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। विद्यार्थियों ने अपनी पदवी और शोध उपाधियां प्राप्त करके एक नए जीवन की शुरुआत की।
शिक्षा केवल डिग्री पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम है। नागपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिए गए संदेश हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना, समाज की सेवा करना, पर्यावरण की रक्षा करना और नैतिक मूल्यों को अपनाना ही सच्ची शिक्षा है। आज के विद्यार्थी कल के नेता, वैज्ञानिक, शिक्षक और समाजसेवी हैं। उनकी सफलता में ही देश का भविष्य निहित है।