Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड की शांत पहाड़ियों के बीच हुआ अंकिता भंडारी हत्याकांड आज भी पूरे देश के ज़ेहन में एक सवाल की तरह मौजूद है। यह सिर्फ एक युवती की हत्या का मामला नहीं रहा, बल्कि सत्ता, प्रभाव और न्याय व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। बीते दो सप्ताह से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि इसमें कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठे सवालों ने सरकार और व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
क्यों फिर चर्चा में आया मामला
अंकिता भंडारी हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद यह माना जा रहा था कि न्याय की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लेकिन दिसंबर 2025 में इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई कथित ऑडियो क्लिप ने पूरे मामले को फिर से खोल दिया। इन क्लिप्स में जिस “वीआईपी” का जिक्र किया गया, उसने पुराने घावों को फिर हरा कर दिया।
जांच के दौरान यह तथ्य पहले ही सामने आ चुका था कि अंकिता पर किसी वीआईपी को विशेष सेवा देने का दबाव बनाया गया था। यही वह बिंदु है, जिसने इस हत्याकांड को एक सामान्य अपराध से कहीं आगे ले जाकर सत्ता और प्रभाव के दायरे में ला खड़ा किया।
माता-पिता की मुख्यमंत्री से मुलाकात
7 जनवरी 2026 को अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर सीबीआई जांच की मांग रखी। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक टूटे हुए परिवार की आखिरी उम्मीद थी।
इस पूरे घटनाक्रम में पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की भूमिका अहम रही। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक को एक लिखित शिकायत दी, जिसमें कहा गया कि वीआईपी से जुड़ा एक स्वतंत्र अपराध हो सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायत की जांच के बाद पुलिस महानिदेशक ने एसएसपी देहरादून को मामला सौंपा और अंततः सीबीआई जांच की संस्तुति गृह विभाग को भेजी गई।
मुख्यमंत्री धामी ने इस संस्तुति को स्वीकार करते हुए सीबीआई जांच का फैसला लिया, जिसने पूरे प्रदेश में एक नई बहस को जन्म दे दिया।
कौन हैं डॉ. अनिल प्रकाश जोशी
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी केवल एक पर्यावरणविद नहीं हैं, बल्कि वे पिछले चार दशकों से समाज और प्रकृति के बीच संतुलन की बात करते आए हैं। ‘माउंटेन मैन’ के नाम से पहचाने जाने वाले डॉ. जोशी का इस मामले में सामने आना इस बात का संकेत है कि यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि नैतिकता का भी प्रश्न है।
पूरे घटनाक्रम पर एक नजर
- 11 से 18 सितंबर 2022 के बीच अंकिता की हत्या
- 18 सितंबर 2022 को गुमशुदगी की रिपोर्ट
- 22 सितंबर को तीनों आरोपी गिरफ्तार
- 24 सितंबर को चीला झील से शव बरामद
- 30 मई 2025 को दोषियों को आजीवन कारावास
- दिसंबर 2025 में वीआईपी नाम की ऑडियो क्लिप वायरल
- 9 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच की संस्तुति
सीबीआई जांच से क्या बदलेगा?
सीबीआई जांच सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं है। यह उस भरोसे को दोबारा स्थापित करने की कोशिश है, जो इस मामले में कहीं न कहीं डगमगा गया था। यदि वीआईपी एंगल की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं।