Suvendu Adhikari Protest: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन एक बार फिर तनाव और टकराव का गवाह बना, जब राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की गाड़ी को पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना रोड इलाके में प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। पुरुलिया से लौटते समय हुए इस घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी नए सवाल खड़े कर दिए।
इस घटना के बाद सुवेंदु अधिकारी सीधे चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी पहुंचे, जो गड़बेता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है, और वहीं धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है।
चंद्रकोना रोड पर अचानक बढ़ा तनाव
चंद्रकोना रोड इलाके में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब सुवेंदु अधिकारी के काफिले को रास्ते में रोक लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग नारेबाजी करते हुए उनकी गाड़ी के चारों ओर जमा हो गए, जिससे कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। हालांकि किसी बड़े शारीरिक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन माहौल बेहद उग्र हो गया था।
राजनीति में लंबे समय से सक्रिय सुवेंदु अधिकारी के लिए यह कोई पहला विरोध नहीं है, लेकिन जिस तरह से एक संवैधानिक पद पर बैठे नेता को सड़क पर रोका गया, उसने इस घटना को खास बना दिया।
न्याय की मांग पर पुलिस चौकी में धरना
घटना के तुरंत बाद सुवेंदु अधिकारी ने चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से सवाल किया कि अगर विपक्ष के नेता की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं।
धरने के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह घटना राज्य में बढ़ती राजनीतिक असहिष्णुता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के संरक्षण में विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने की राजनीति चल रही है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का समर्थन और प्रदर्शन
सुवेंदु अधिकारी के धरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक पुलिस चौकी के बाहर जमा हो गए। हाथों में पार्टी के झंडे और न्याय की मांग वाले पोस्टर लिए कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। उनका कहना था कि यह घटना साबित करती है कि राज्य में विपक्ष को बोलने और चलने की आज़ादी नहीं दी जा रही।
भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो पार्टी इसे बड़े आंदोलन का रूप देगी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारों में गुस्सा और असंतोष साफ झलक रहा था।
राजनीति से आगे कानून-व्यवस्था का सवाल
इस पूरी घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब एक प्रमुख राजनीतिक नेता को बीच सड़क घेरा जा सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में चुनावी माहौल के करीब आते ही इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन की निष्पक्षता और तत्परता बेहद अहम हो जाती है।
सुवेंदु अधिकारी का सख्त संदेश
धरने के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि वे डरने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सड़क पर रोके जाने से उनका संघर्ष कमजोर नहीं होगा, बल्कि और मजबूत होगा। उनका कहना था कि वे जनता के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई जारी रखेंगे।
उनके इस बयान ने समर्थकों में जोश भर दिया और यह साफ कर दिया कि यह मामला सिर्फ एक दिन की घटना तक सीमित नहीं रहेगा।