Asaduddin Owaisi Nagpur Rally: महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एआईएमआईएम की चुनावी सभा में सियासी माहौल उस वक्त पूरी तरह गर्म हो गया, जब पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर एक के बाद एक तीखे सवाल दागे। मंच से दिए गए उनके भाषण में चीन से लेकर पाकिस्तान, वक्फ कानून से लेकर बुलडोजर राजनीति तक, कई ऐसे मुद्दे थे जो सीधे तौर पर मौजूदा सत्ता की नीतियों पर सवाल खड़े करते हैं। ओवैसी का यह भाषण सिर्फ एक चुनावी भाषण नहीं था, बल्कि उसमें असंतोष, डर और अधिकारों के छिन जाने की आशंका साफ झलक रही थी।
चीन, पाकिस्तान और सरकार की विदेश नीति पर सवाल
ओवैसी ने अपने भाषण की शुरुआत देश की विदेश नीति से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे से की। उन्होंने कहा कि जिस चीन ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की मदद की थी, आज उसी चीन को भारत सरकार रेड कारपेट बिछाकर निवेश के लिए बुला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह देश की सुरक्षा और सम्मान के साथ समझौता नहीं है।
उनका कहना था कि सरकार राष्ट्रवाद की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में वही देश भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किए जा रहे हैं, जिनकी नीयत पर पहले ही सवाल खड़े हो चुके हैं। यह विरोधाभास आम जनता को भ्रमित करता है और सच्चे राष्ट्रवाद की परिभाषा को कमजोर करता है।
नागपुर की सड़कों से जुड़ा स्थानीय सवाल
ओवैसी ने अपने भाषण में नागपुर की जमीनी हकीकत का भी जिक्र किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नाम लेते हुए कहा कि नागपुर से आने के बावजूद शहर की मुस्लिम बहुल बस्तियों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई इलाकों में अब तक सीमेंट की सड़कें नहीं बनी हैं।
वक्फ कानून को लेकर गहरी चिंता
सभा का सबसे भावनात्मक हिस्सा तब आया, जब ओवैसी ने वक्फ कानून पर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अजित पवार, एकनाथ शिंदे और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं के साथ मिलकर ऐसा कानून बनाया है, जिससे मुसलमानों की जमीन छिनने का खतरा पैदा हो गया है।
उनका कहना था कि वक्फ की जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं होती, बल्कि वह मस्जिदों, कब्रिस्तानों, मदरसों और गरीबों के हक से जुड़ी होती है। अगर इस पर चोट की जाएगी, तो इसका असर सीधे समुदाय की पहचान और अस्तित्व पर पड़ेगा।
वोटर बनकर रह गए तो क्या होगा
ओवैसी ने जनता को चेताते हुए कहा कि अगर लोग सिर्फ वोट डालने तक सीमित रह गए और अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाई, तो नतीजे खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जब नागरिक सिर्फ वोटर बनकर रह जाते हैं, तब सत्ता उन्हें आसानी से निशाना बना सकती है।
ओवैसी की यह सभा सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रही। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई, जागरूकता और संविधान को समझने की अपील की। उनका कहना था कि संविधान ही वह ढाल है, जो कमजोर तबकों को ताकत देता है।