Hindu Leader Death in Bangladesh: बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के बीच हिंसक घटनाओं में तेज बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खासकर हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए यह दौर भय और असुरक्षा से भरा हुआ प्रतीत हो रहा है। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनावी माहौल में हिंसा कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार घटनाओं की प्रकृति और पीड़ितों की पहचान चिंता को और गहरा कर रही है। आम नागरिकों से लेकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक, कई लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
अल्पसंख्यकों के लिए डर और असहजता का माहौल
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पहले से ही खुद को हाशिये पर महसूस करता रहा है। चुनाव से पहले हालात और ज्यादा बिगड़ते नजर आ रहे हैं। बीते कुछ दिनों में हिंदू समुदाय से जुड़े लोगों पर हमले और हत्याओं की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे देश में भय का वातावरण बन गया है।
प्रलय चाकी की हिरासत में मौत
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच बांग्लादेश के जाने-माने हिंदू संगीतकार और आवामी लीग के वरिष्ठ नेता प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। 60 वर्षीय प्रलय चाकी की मौत के बाद परिवार और समर्थकों में गुस्सा और शोक दोनों देखने को मिल रहे हैं।
सरकारी पक्ष ने इसे स्वाभाविक मौत बताया है, लेकिन सवाल यह है कि हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत को केवल एक सामान्य घटना मानकर कैसे छोड़ा जा सकता है। खासकर तब, जब वह व्यक्ति पहले से बीमार था और उसकी हालत को लेकर परिवार को समय पर जानकारी नहीं दी गई।
गिरफ्तारी की परिस्थितियां और विवाद
प्रलय चाकी को जुलाई 2024 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। 16 दिसंबर को उन्हें पाबना स्थित उनके आवास से अचानक हिरासत में लिया गया। परिवार का कहना है कि उस वक्त उनके खिलाफ कोई ठोस मामला दर्ज नहीं था।
इस गिरफ्तारी ने शुरुआत से ही कई सवाल खड़े कर दिए थे। क्या यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला था या इसके पीछे राजनीतिक दबाव भी शामिल था—यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक बयान
जेल प्रशासन का कहना है कि प्रलय चाकी पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जिनमें डायबिटीज और हृदय रोग शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद पहले पाबना जनरल अस्पताल और फिर राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
हालांकि यह बयान कई लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाया है, क्योंकि सवाल इलाज की गुणवत्ता और समय पर सूचना देने को लेकर उठ रहे हैं।
परिवार के आरोप और मानवीय पहलू
प्रलय चाकी के बेटे ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके पिता की तबीयत बिगड़ने के बावजूद परिवार को समय पर सूचित नहीं किया गया। जब उन्हें अस्पताल पहुंचने का मौका मिला, तब तक हालात बेहद खराब हो चुके थे।
अंतरिम सरकार पर उठते सवाल
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह इन घटनाओं को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें प्रचार या अफवाह बताकर टालने की कोशिश कर रही है। यह रवैया हालात को और बिगाड़ सकता है।
लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे, खासकर तब जब मामला अल्पसंख्यकों से जुड़ा हो।