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जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की घोषणा, 5 फरवरी को मतदान और 7 को मतगणना

Zilla Parishad Panchayat Samiti Election: महाराष्ट्र में 12 जिला परिषद और 125 पंचायत समितियों के चुनाव की घोषणा
Zilla Parishad Panchayat Samiti Election: महाराष्ट्र में 12 जिला परिषद और 125 पंचायत समितियों के चुनाव की घोषणा (File Photo)
महाराष्ट्र में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव की घोषणा हो गई है। 5 फरवरी को मतदान और 7 को मतगणना होगी। नामांकन 16 तारीख से शुरू होंगे। कोंकण, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर विभाग के कुल 12 जिले शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में 21 जनवरी को ओबीसी आरक्षण पर अहम सुनवाई होगी जो चुनावों को प्रभावित कर सकती है।
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महाराष्ट्र में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव की घोषणा हो चुकी है। राज्य की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग ने इन चुनावों की पूरी तारीखें जारी कर दी हैं। 5 फरवरी को मतदान होगा और दो दिन बाद यानी 7 फरवरी को मतगणना की जाएगी। इस चुनाव में उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 16 तारीख से शुरू हो रही है।

यह चुनाव महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में होने जा रहे हैं। राज्य के तीन प्रमुख विभागों की कुल 12 जिला परिषदों में चुनावी गतिविधियां तेज होने वाली हैं। स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

कोंकण विभाग में चुनावी तैयारियां

कोंकण विभाग की तीन जिला परिषदों में चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिला परिषदें शामिल हैं। तटीय इलाकों में स्थित ये जिले स्थानीय मुद्दों को लेकर हमेशा सक्रिय रहते हैं। यहां की जनता अपने स्थानीय नेताओं से कई उम्मीदें रखती है। कोंकण क्षेत्र में मछुआरों, किसानों और पर्यटन से जुड़े लोगों की समस्याओं को लेकर चुनावी मुद्दे बनने की संभवना है।

इन जिलों में पंचायत समितियों के चुनाव भी साथ में होंगे। स्थानीय विकास कार्यों, सड़क निर्माण, पानी की व्यवस्था और शिक्षा जैसे मुद्दे चुनाव में केंद्र में रहेंगे।

पुणे विभाग के पांच जिलों में मतदान

पुणे विभाग से पांच बड़े जिलों की परिषदों में चुनाव होंगे। इनमें पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर जिला परिषदें शामिल हैं। पुणे विभाग महाराष्ट्र का एक प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र है। यहां शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की आबादी है।

पुणे जिले में विकास के मुद्दे प्रमुख होंगे। सातारा और सोलापुर में किसानों की समस्याएं चुनावी बहस का हिस्सा बनेंगी। सांगली और कोल्हापुर में गन्ना किसानों के मुद्दे हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। इन जिलों में सहकारी चीनी कारखानों का बड़ा प्रभाव है, इसलिए चुनावी समीकरण दिलचस्प होंगे।

छत्रपति संभाजीनगर विभाग के चार जिले

छत्रपति संभाजीनगर विभाग से चार जिला परिषदों में चुनाव होंगे। इनमें छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर की जिला परिषदें हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र के ये जिले विकास की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं।

यहां पानी की कमी, सूखा, किसानों की आर्थिक स्थिति और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। मराठवाड़ा में किसान आंदोलन समय-समय पर होते रहे हैं। इसलिए इन चुनावों में स्थानीय मुद्दों का बड़ा असर दिखेगा।

नामांकन प्रक्रिया और चुनावी कार्यक्रम

चुनाव आयोग ने पूरे चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 16 तारीख से उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवारों को अपने कागजात और योग्यता के प्रमाण पत्र जमा करने होंगे।

नामांकन के बाद कागजातों की जांच होगी। फिर उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने का मौका भी मिलेगा। अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद चुनाव प्रचार शुरू होगा। सभी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के लिए मैदान में उतरेंगे।

5 फरवरी को राज्य भर में एक साथ मतदान होगा। चुनाव आयोग ने मतदान की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे ताकि शांतिपूर्ण मतदान हो सके।

सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई

इन चुनावों के बीच एक बड़ा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 21 जनवरी को ओबीसी आरक्षण और बंथिया आयोग की वैधता पर सुनवाई होने वाली है। यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पर भी बहस होगी। साथ ही सभापति पदों के आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी अंतिम निर्णय आने की संभावना है। यह फैसला न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में स्थानीय निकाय चुनावों को प्रभावित कर सकता है।

चुनाव पर न्यायिक फैसले का असर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके अंतिम निर्णय तक होने वाले सभी चुनाव और नियुक्तियां न्यायालय के आदेश के अधीन रहेंगी। इसका मतलब है कि अगर कोर्ट कोई बड़ा फैसला सुनाता है तो चुनाव परिणामों पर भी असर पड़ सकता है।

इसलिए आगामी चुनावी प्रक्रिया पर न्यायिक निर्णय की विशेष नजर बनी हुई है। सभी राजनीतिक दल और उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

स्थानीय लोकतंत्र को मजबूती

जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव स्थानीय लोकतंत्र की नींव हैं। ये संस्थाएं गांव और तालुका स्तर पर विकास कार्यों का संचालन करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, पानी की व्यवस्था जैसे काम इन्हीं संस्थाओं के जिम्मे होते हैं।

इन चुनावों में जनता अपने स्थानीय प्रतिनिधि चुनती है। ये प्रतिनिधि लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते हैं। इसलिए ये चुनाव जनता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

राजनीतिक दलों की तैयारियां

सभी प्रमुख राजनीतिक दल इन चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

स्थानीय नेताओं की इन चुनावों में अहम भूमिका होगी। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता अपने उम्मीदवारों के लिए मेहनत करेंगे। चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा भी तय करेंगे।

महाराष्ट्र में होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव स्थानीय लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों में चुनाव होंगे। 5 फरवरी को मतदान और 7 फरवरी को मतगणना होगी। सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई का फैसला भी इन चुनावों को प्रभावित कर सकता है। जनता अपने स्थानीय मुद्दों को लेकर सजग है और सही प्रतिनिधि चुनने के लिए तैयार है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।