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13 दिनों बाद रामगढ़ से मिले अंश-अंशिका, दो लोग हिरासत में

Ansh Anshika
13 दिनों बाद रामगढ़ से मिले अंश-अंशिका
रांची से लापता मासूम अंश और अंशिका 13 दिन बाद चितरपुर क्षेत्र से सकुशल बरामद किए गए। पुलिस, प्रशासन, सामाजिक संगठनों और स्थानीय युवाओं के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो सका। बच्चों की सुरक्षित वापसी से परिजनों और पूरे क्षेत्र ने राहत की सांस ली।
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Ansh-Anshika Ranchi News: कुछ खबरें ऐसी होती हैं जो सिर्फ सूचना नहीं होतीं, बल्कि समाज की सामूहिक संवेदनाओं को झकझोर देती हैं। राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए पांच वर्षीय अंश और चार वर्षीय अंशिका की कहानी भी ऐसी ही थी। तेरह दिनों तक अनिश्चितता, डर और उम्मीद के बीच झूलते परिजनों के लिए बुधवार की सुबह किसी वरदान से कम नहीं थी, जब दोनों मासूम सुरक्षित मिल गए। पुलिस ने बच्चों के साथ मौजूद एक महिला और एक पुरुष को भी हिरासत में लिया है।

कब और कहां से शुरू हुई थी चिंता

अंश और अंशिका, जो सगे भाई-बहन हैं, धुर्वा थाना क्षेत्र के मल्लार टोली मौसीबाड़ी इलाके में अपने घर के पास स्थित एक दुकान के आसपास से अचानक लापता हो गए थे। शुरुआत में किसी अनहोनी की आशंका कम थी, लेकिन जब घंटों बीत गए और कोई सुराग नहीं मिला, तो मामला गंभीर होता चला गया।

चितरपुर से मिली उम्मीद की किरण

मंगलवार की रात चितरपुर क्षेत्र में बच्चों के देखे जाने की सूचना मिली। यह खबर जैसे ही स्थानीय युवाओं तक पहुंची, उन्होंने समय गंवाए बिना खुद मोर्चा संभाल लिया। डब्लू साहू, सचिन कुमार, सुनील कुमार, सन्नी नायक और अंशु कुमार जैसे युवाओं ने पूरी रात इलाके में गश्ती और खोजबीन की।

सुबह की वह घड़ी जिसने सब कुछ बदल दिया

बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे चितरपुर लाइन पार स्थित पहाड़ी क्षेत्र के एक घर के बाहर दोनों मासूम बैठे दिखाई दिए। बच्चों को देखते ही युवाओं ने बिना देर किए रजरप्पा पुलिस को सूचना दी। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और अंश-अंशिका को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।

हिरासत और जांच की प्रक्रिया

पुलिस ने बच्चों के साथ मौजूद एक महिला और एक पुरुष को भी हिरासत में लिया है। सभी को आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए रामगढ़ एसपी कार्यालय ले जाया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चों को वहां किस उद्देश्य से और कैसे रखा गया था।

परिजनों के चेहरे पर लौटी रौनक

बच्चों के सकुशल मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, उनके आंसू थम गए। 13 दिनों की बेचैनी, रातों की नींद और हर पल की चिंता के बाद यह राहत किसी उत्सव से कम नहीं थी। आसपास के लोगों ने भी इस खबर को पूरे क्षेत्र की जीत के रूप में देखा।

प्रशासन की व्यापक कोशिशें

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया था। बिहार, बंगाल समेत देश के 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में तलाश अभियान चलाया गया। बचपन बचाओ आंदोलन, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और अन्य सामाजिक संगठनों के सदस्य देशभर के 439 जिलों में बच्चों की तलाश में जुटे थे।

रांची पुलिस ने बच्चों की सूचना देने वालों के लिए चार लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि समाज को सक्रिय करने की एक रणनीति भी थी, जिसका असर साफ दिखा।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।