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महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: बदलाव या भरोसा, आज जनता देगी जवाब

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव 2026
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव 2026
महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में मतदान जारी है, जहां 3.48 करोड़ मतदाता शहरी सत्ता का भविष्य तय कर रहे हैं। बीएमसी समेत बड़े नगर निगमों पर सबकी नजर है। यह चुनाव राज्य की आगे की राजनीति की दिशा निर्धारित करेगा।
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Maharashtra Municipal Election 2026: महाराष्ट्र की शहरी राजनीति आज एक अहम मोड़ पर खड़ी है। राज्य की 29 नगर निगमों में हो रहा मतदान सिर्फ स्थानीय प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा और दलों की ताकत का पैमाना भी बनेगा। खास तौर पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका जैसे देश के सबसे समृद्ध नगर निकाय पर सभी दलों की नजर टिकी हुई है, जहां करीब आठ साल बाद जनता को अपना फैसला सुनाने का अवसर मिला है।

करीब 3.48 करोड़ मतदाता आज लोकतंत्र के इस उत्सव में हिस्सा लेकर 2,869 सीटों के लिए मैदान में उतरे 15,908 उम्मीदवारों की किस्मत तय कर रहे हैं। मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, ठाणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े शहरों में मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय बन चुका है।

शहरी राजनीति के लिए निर्णायक दिन

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव हमेशा से राज्य की राजनीति का ट्रेंड सेटर रहे हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले यह चुनाव जनता की नब्ज को समझने का मौका देते हैं। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि शिवसेना, एनसीपी और अन्य दलों में हुए विभाजन के बाद यह पहला बड़ा शहरी जनादेश है।

सुबह 7:30 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम 5:30 बजे तक चलेगा। राज्य भर में 39,092 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां मतदाताओं की सुविधा और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

बीएमसी पर सबकी नजर

मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका केवल एक नगर निगम नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक ताकत का प्रतीक है। करीब 74,000 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट वाली यह सिविक बॉडी देश में सबसे अमीर मानी जाती है। यहां 227 वार्डों के लिए चुनाव हो रहा है और लगभग 1.03 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

बीएमसी चुनाव इस सवाल का भी जवाब देंगे कि मुंबई की जनता किस नेतृत्व और किस राजनीतिक विचारधारा पर भरोसा जताती है। यही कारण है कि सभी प्रमुख दलों ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है।

बड़े चेहरे, छोटी चूक

चुनाव के दिन कई दिलचस्प घटनाएं भी सामने आईं। नवी मुंबई में भाजपा नेता और राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक वोटर लिस्ट में नाम न होने के कारण मतदान नहीं कर सके। यह घटना चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची की सटीकता पर भी सवाल खड़े करती है।

सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क

चुनाव के मद्देनजर मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बीएमसी चुनाव के लिए 25,000 से अधिक कांस्टेबल और हजारों वरिष्ठ अधिकारी तैनात हैं। संवेदनशील इलाकों पर खास निगरानी रखी जा रही है ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बदले समीकरण

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एनसीपी के दोनों गुटों का एकजुट होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभाजन के बाद यह पहला मौका है जब दोनों गुट एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, महायुति और ठाकरे गुट के बीच यहां भी सीधी टक्कर देखी जा रही है।

नए गठबंधन, नई राजनीति

इस चुनाव में कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदले नजर आ रहे हैं। भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ज्यादातर नगर निगमों में साथ हैं, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे ने मराठी अस्मिता के मुद्दे पर हाथ मिलाया है। लगभग दो दशक बाद ठाकरे परिवार के दोनों धड़ों का एक मंच पर आना मतदाताओं के लिए एक नया संदेश लेकर आया है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।