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महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: बीएमसी की सत्ता पर किसका कब्जा, आज आएगा फैसला

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव
महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव नतीजे आज घोषित होंगे। बीएमसी में नौ साल बाद हुए चुनाव और रिकॉर्ड मतदान ने सियासी उत्सुकता बढ़ा दी है। ठाकरे बंधुओं की वापसी और बड़े गठबंधन इस चुनाव को बेहद अहम बना रहे हैं।
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Maharashtra Municipal Election Results: महाराष्ट्र की राजनीति आज एक अहम मोड़ पर खड़ी है। राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में हुए चुनावों के नतीजे आज शुक्रवार को घोषित किए जाने हैं। सुबह 10 बजे से मतगणना की प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। शाम 5 बजे तक अधिकतर अंतिम नतीजों के सामने आने की संभावना है। इन चुनावों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि बृह्नमुंबई महानगरपालिका में करीब नौ साल बाद जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिससे यह चुनाव सिर्फ स्थानीय निकाय का नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा तय करने वाला बन गया है।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार का मतदान उत्साह और भागीदारी दोनों के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। अधिकारियों का कहना है कि 2026 के महानगरपालिका चुनावों में मतदान प्रतिशत ने 2017 के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह संकेत देता है कि शहरी मतदाता अब स्थानीय शासन को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग और सक्रिय हो चुके हैं।

रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी बेचैनी

इन चुनावों में राज्यभर के 893 वार्डों की कुल 2,869 सीटों के लिए मतदान कराया गया। करीब 3.48 करोड़ मतदाताओं ने 15,931 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला अपने वोट के जरिए किया।

इस बार मतदान प्रतिशत में हुई बढ़ोतरी ने सभी दलों की धड़कनें तेज कर दी हैं। ज्यादा मतदान को आमतौर पर सत्ता विरोधी रुझान या फिर मजबूत मुद्दों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में हर पार्टी अपने-अपने गणित लगा रही है कि यह बढ़ी भागीदारी किसके पक्ष में जाएगी।

नौ साल बाद जनता का फैसला

बृह्नमुंबई महानगरपालिका का चुनाव इस पूरी प्रक्रिया का केंद्र बिंदु है। करीब नौ साल बाद हुए इस चुनाव ने बीएमसी को एक बार फिर देश की सबसे चर्चित नगरपालिकाओं में ला खड़ा किया है। 227 सीटों वाली बीएमसी में 1,700 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबले की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

74 हजार करोड़ का बजट और सियासी महत्व

बीएमसी का वार्षिक बजट करीब 74,000 करोड़ रुपये है, जो कई राज्यों के बजट के बराबर माना जाता है। यही वजह है कि बीएमसी पर नियंत्रण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प और आक्रामक रहा। यह चुनाव सिर्फ नगर प्रशासन नहीं, बल्कि मुंबई जैसे आर्थिक केंद्र की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

ठाकरे बंधुओं की सियासी वापसी

इस चुनाव का सबसे अहम राजनीतिक घटनाक्रम रहा दो दशक पहले अलग हुए चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का फिर साथ आना। मराठी मतदाताओं को एकजुट करने के उद्देश्य से बने इस गठबंधन ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया। लंबे समय बाद एक मंच पर आए ठाकरे बंधुओं को लेकर मतदाताओं में उत्सुकता और भावनात्मक जुड़ाव दोनों देखने को मिला।

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में नई रणनीति

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे अहम शहरी क्षेत्रों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुटों का गठबंधन भी चर्चा का विषय रहा। स्थानीय स्तर पर सत्ता संतुलन साधने के लिए बने इन समीकरणों ने चुनाव को और रोचक बना दिया।

भाजपा और महायुति की अग्निपरीक्षा

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के लिए यह चुनाव शहरी मतदाता पर अपनी पकड़ साबित करने का मौका है। बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिकाओं में पार्टी ने विकास और स्थिर प्रशासन को मुख्य मुद्दा बनाया। अब नतीजे तय करेंगे कि यह रणनीति कितनी कारगर रही।

विपक्ष के लिए भी निर्णायक घड़ी

विपक्षी दलों के लिए यह चुनाव आत्मविश्वास लौटाने का अवसर माना जा रहा है। यदि वे बीएमसी और अन्य प्रमुख नगरपालिकाओं में मजबूत प्रदर्शन करते हैं, तो इसका असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक दिख सकता है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।