Jharkhand High Court ED Case: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस के बीच चल रहा टकराव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। रांची पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और शुरू की गई जांच पर झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने न सिर्फ राज्य सरकार को सख्त संदेश दिया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि जांच के नाम पर किसी केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला केवल एक शिकायत या एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार और जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ है। कोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत मिला कि कानून के दायरे में रहकर जांच करना जरूरी है, लेकिन शक्ति प्रदर्शन या राजनीतिक दबाव की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
ईडी जांच बनाम राज्य पुलिस
हाईकोर्ट ने इस पूरे विवाद को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता संतोष कुमार को भी दस दिनों का समय दिया गया है ताकि वह अपने आरोपों पर विस्तृत जवाब दाखिल कर सके। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि केंद्रीय गृह सचिव और शिकायतकर्ता को इस मामले में पक्षकार बनाया जाए, ताकि सभी संबंधित पक्षों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
अदालत ने साफ कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसी किसी मामले की जांच कर रही है, तो राज्य पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी कार्रवाई से जांच प्रभावित न हो। यह टिप्पणी केवल इस मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक स्पष्ट दिशा-निर्देश मानी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची स्थित ईडी कार्यालय की सुरक्षा अब केंद्रीय बलों के हवाले कर दी गई है। CISF या BSF जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ईडी कार्यालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने का फैसला अपने आप में बड़ा संकेत है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते अविश्वास के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि संस्थागत सम्मान और स्वायत्तता से भी जुड़ा है।
विवाद की पृष्ठभूमि क्या है
पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े एक मामले में ईडी ने संतोष कुमार को पूछताछ के लिए बुलाया। संतोष कुमार पर करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप है। पूछताछ के बाद संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर प्रताड़ना और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए रांची पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
इस शिकायत के आधार पर रांची पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस की टीम ईडी कार्यालय तक पहुंची, जहां दस्तावेजों की जांच और सीसीटीवी फुटेज जब्त करने की कार्रवाई हुई। इसी कदम को ईडी ने जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताया और हाईकोर्ट का रुख किया।
राजनीति और प्रशासन पर असर
इस फैसले के बाद झारखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे राज्य सरकार के लिए झटका बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है। लेकिन एक बात साफ है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में जल्दबाजी या दबाव की राजनीति को खारिज किया है।
अब सबकी नजरें अगले चरण की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के जवाब के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी। यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला केवल कानूनी बहस तक सीमित रहता है या केंद्र–राज्य संबंधों पर इसका असर और गहराता है।