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रांची पुलिस की बड़ी सफलता: 61 दिनों बाद कोडरमा में मिला कन्हैया कुमार, मां के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रांची पुलिस की बड़ी सफलता: 61 दिनों बाद कोडरमा में मिला कन्हैया कुमार, मां के चेहरे पर लौटी मुस्कान
61 दिनों बाद कोडरमा में मिला कन्हैया कुमार

ओरमांझी से लापता 12 वर्षीय कन्हैया कुमार को रांची पुलिस ने 61 दिन बाद कोडरमा से सकुशल बरामद किया। इस दौरान पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिससे कई मासूमों को बचाया जा सका।

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Dipali Kumari
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Kanhaiya Kumar Missing Case: रांची जिले के ओरमांझी थाना क्षेत्र से लापता हुए 12 वर्षीय कन्हैया कुमार की सकुशल बरामदगी ने न सिर्फ उसके परिवार को राहत दी है, बल्कि पूरे इलाके में उम्मीद और भरोसे की एक नई किरण भी जगाई है। बीते 61 दिनों से अपने बेटे की राह देख रहे माता-पिता के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था। कन्हैया की वापसी के साथ ही रांची पुलिस ने एक ऐसे संगठित और खतरनाक अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भी पर्दाफाश किया है, जो मासूम बच्चों को अपराध की दलदल में धकेल रहा था।

मां की दुकान से निकला, फिर लौटकर नहीं आया

22 नवंबर 2025 की शाम कन्हैया कुमार अपनी मां की फुचका दुकान से यह कहकर निकला था कि वह थोड़ी देर में लौट आएगा। लेकिन वह ‘थोड़ी देर’ 61 दिनों के लंबे इंतजार में बदल गई। जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार की बेचैनी और चिंता बढ़ती चली गई। हर गुजरता दिन एक नई आशंका लेकर आता था।

परिवार की हालत ने पुलिस को भी झकझोरा

कन्हैया सिर्फ तीसरी कक्षा का छात्र ही नहीं था, बल्कि अपनी मां की दुकान में हाथ बंटाकर परिवार की मदद भी करता था। उसके पिता शारीरिक रूप से अक्षम हैं और बड़े भाई की एक किडनी खराब है। ऐसे में कन्हैया परिवार के लिए सिर्फ एक बच्चा नहीं, बल्कि सहारा भी था। उसकी गुमशुदगी ने पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से तोड़कर रख दिया था।

सात राज्यों में चला सर्च ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने खुद इस केस की मॉनिटरिंग शुरू की। एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया, जिसने झारखंड समेत सात राज्यों में कन्हैया की तलाश की। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सीमावर्ती जिले और संदिग्ध इलाकों में लगातार छापेमारी की जाती रही।

कोडरमा में मिली गुप्त सूचना, ऑपरेशन हुआ सफल

लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कन्हैया को कोडरमा में छिपाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही रांची पुलिस की टीम ने कोडरमा पुलिस के सहयोग से त्वरित कार्रवाई की और छापेमारी कर कन्हैया को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। जब बच्चे को बरामद किया गया, तब वह डरा-सहमा जरूर था, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित था।

मासूम की सकुशल वापसी से गांव में खुशी

कन्हैया की सकुशल वापसी की खबर जैसे ही ओरमांझी पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के आंसू इस बार डर के नहीं, बल्कि राहत और खुशी के थे। मां ने बेटे को सीने से लगाकर रोते हुए कहा कि अब उन्हें पुलिस और इंसानियत पर फिर से भरोसा हो गया है।

बच्चा चोर गिरोह का हुआ बड़ा खुलासा

कन्हैया की बरामदगी के साथ ही पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भी भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि यह संगठित गिरोह मासूम बच्चों का अपहरण कर उनसे भीख मंगवाने, मजदूरी कराने और भविष्य में मानव तस्करी व देह व्यापार जैसे जघन्य अपराधों में धकेल देता था।

15 गिरफ्तार, कई महिलाएं भी शामिल

इस नेटवर्क के तहत अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई महिलाएं भी शामिल हैं। यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाता था, ताकि उनके लापता होने पर शुरुआती दिनों में ज्यादा शोर न मचे।

सरकार और पुलिस की सख्ती का असर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई को पुलिस महकमे की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह कार्रवाई न सिर्फ एक बच्चे को बचाने की कहानी है, बल्कि सैकड़ों संभावित पीड़ितों के भविष्य को अंधकार में जाने से रोकने का प्रयास भी है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।