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देश में अब भी नहीं रुका बाल विवाह, पश्चिम बंगाल और झारखंड सबसे आगे, देखिए पूरी रिपोर्ट

देश में अब भी नहीं रुका बाल विवाह, पश्चिम बंगाल और झारखंड सबसे आगे, देखिए पूरी रिपोर्ट
देश में अब भी नहीं रुका बाल विवाह, पश्चिम बंगाल और झारखंड सबसे आगे, देखिए पूरी रिपोर्ट

देश में बाल विवाह रोकने के दावों के बीच SRS 2024 रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा कम उम्र में लड़कियों की शादी हो रही है। विशेषज्ञों ने इसे लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है।

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Dipali Kumari
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Child Marriage: देश में लड़कियों की पढ़ाई और कम उम्र में शादी रोकने को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में आज भी बाल विवाह की समस्या बनी हुई है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ (SRS) 2024 की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा बाल विवाह हो रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी 18 साल की कानूनी उम्र से पहले कर दी जा रही है।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में महिलाओं की शादी की औसत उम्र अब बढ़कर 23 साल हो गई है। साथ ही 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 साल की उम्र के बाद शादी कर रही हैं। हालांकि इसके बावजूद कई राज्यों में कम उम्र में शादी  की परंपरा अब भी जारी है।

 हर चार में से एक लड़की का हो रहा बाल विबाह

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में देशभर में शादी करने वाली 2.1 प्रतिशत लड़कियां 18 साल से कम उम्र की थीं। वहीं 24.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से 20 साल के बीच हुई। यानी देश में हर चार में से एक लड़की की शादी 21 साल की उम्र से पहले हो रही है।

पश्चिम बंगाल में बाल विवाह के मामले सबसे अधिक

बाल विवाह के मामलों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे है। यहां 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों का आंकड़ा 6.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद झारखंड दूसरे नंबर पर है, जहां यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत रहा। छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में शामिल है जहां कम उम्र में लड़कियों की शादी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है।

ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति और ज्यादा गंभीर दिखाई दी। रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में 2.4 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो गई। पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 5.9 प्रतिशत और झारखंड में 5.8 प्रतिशत रहा। वहीं शहरी क्षेत्रों में भी पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां बाल विवाह का आंकड़ा 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गया।

दिल्ली में बाल विवाह का कोई मामला नहीं

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दिल्ली में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, जबकि केरल में यह दर सबसे कम 0.04 प्रतिशत रही। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी आंकड़े काफी कम पाए गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में शादी का सबसे ज्यादा असर लड़कियों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है। जल्दी शादी होने से कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं और कम उम्र में मां बनने के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।