Jharkhand News: जमशेदपुर के उलीडीह थाना क्षेत्र से सामने आई यह घटना सिर्फ एक ठगी का मामला नहीं है, बल्कि समाज में गहराई तक फैले अंधविश्वास की एक गंभीर तस्वीर भी पेश करती है। संजय पथ के बगल स्थित सर्वोदय पथ निवासी कंचन देवी के साथ तीन कथित साधुओं ने जिस तरह से विश्वास और आस्था का फायदा उठाया, वह न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि चिंता पैदा करने वाला भी है।
दिनदहाड़े साधु के वेश में आए ठगों ने पत्थर को सोना बनाने का दावा किया और महिला से करीब तीन से चार लाख रुपये मूल्य के सोने के गहने लेकर फरार हो गए। यह घटना बताती है कि पढ़े-लिखे और शहरी इलाके में रहने वाले लोग भी किस तरह भावनात्मक और धार्मिक बातों में उलझकर ठगी का शिकार हो जाते हैं।
दोपहर में घर पहुंचे कथित साधु
कंचन देवी के अनुसार, दोपहर के समय तीन साधु उनके घर पहुंचे। साधारण वेशभूषा, माथे पर तिलक और धार्मिक बातें करते हुए उन्होंने खुद को सिद्ध पुरुष बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने चमत्कार दिखाने की बात कही और दावा किया कि वे पत्थर को सोने में बदल सकते हैं।
महिला के लिए यह सब अचानक और असामान्य था, लेकिन साधुओं की आत्मविश्वास भरी बातें और धार्मिक भाषा ने उन्हें प्रभावित कर दिया। यही वह क्षण था, जब ठगों ने महिला की आस्था को अपने जाल में फंसा लिया।
सोना बढ़ाने का लालच बना ठगी का हथियार
कथित साधुओं ने महिला को बताया कि उनके पास ऐसी विद्या है, जिससे घर में मौजूद सोना शुद्ध होकर कई गुना बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया बहुत गोपनीय है और इसमें पूरी श्रद्धा जरूरी है।
महिला के मन में यह बात बैठ गई कि अगर थोड़ी आस्था से घर का सोना बढ़ सकता है तो इसमें नुकसान क्या है। इसी विश्वास के सहारे साधुओं ने महिला से घर में रखे सभी सोने के गहने लाने को कहा।
पोटली, मंत्र और इंतजार का नाटक
महिला ने घर से सोने की चेन, जिउतिया और अन्य गहने निकालकर साधुओं को सौंप दिए। साधुओं ने जेवरात को एक कपड़े की पोटली में बांधा और मंत्र पढ़ने लगे। उन्होंने महिला को सख्त हिदायत दी कि कुछ समय तक पोटली न खोली जाए, वरना चमत्कार अधूरा रह जाएगा।
इस पूरे नाटक को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया कि महिला को जरा भी शक नहीं हुआ। कुछ ही देर बाद साधु यह कहकर वहां से निकल गए कि थोड़ी देर बाद सब ठीक हो जाएगा।
पोटली खुलते ही टूटा भरोसा
साधुओं के जाने के बाद जब महिला ने पोटली खोली, तो उसके होश उड़ गए। पोटली के अंदर असली गहनों की जगह नकली वस्तुएं और पत्थर रखे थे। वर्षों की मेहनत और संचित संपत्ति एक झटके में गायब हो चुकी थी।
उस वक्त महिला घर में अकेली थी। घबराहट और सदमे में उसने शोर मचाया। आसपास के लोग भी इकट्ठा हुए, लेकिन तब तक ठग बहुत दूर निकल चुके थे।
पुलिस में दर्ज हुआ मामला
सूचना मिलने पर महिला के पति चंदन कुमार घर पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी उलीडीह थाना को दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि कथित साधुओं की पहचान की जा सके।
पुलिस का कहना है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित ठगी का मामला है और ऐसे गिरोह अक्सर अलग-अलग इलाकों में इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।
अंधविश्वास बना सबसे बड़ी कमजोरी
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोग आज भी चमत्कार और तंत्र-मंत्र जैसी बातों पर इतनी आसानी से भरोसा क्यों कर लेते हैं। सोना बढ़ाने या पत्थर से सोना बनाने जैसे दावे न सिर्फ अवैज्ञानिक हैं, बल्कि अपराधियों के लिए आसान हथियार भी बन जाते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब आस्था लालच से जुड़ जाती है, तब इंसान विवेक खो बैठता है। इसी कमजोरी का फायदा ऐसे ठग उठाते हैं।