Magh Mela: प्रयागराज माघ मेले का हर साल का सबसे बड़ा आकर्षण मौनी अमावस्या का स्नान होता है। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर संगम नगरी में इकठ्ठा होते हैं। इस साल भी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी हुई थी। लेकिन इस बार मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से इंकार कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी से अखाड़े से संगम नोज की ओर जा रहे थे, तभी उनके शिष्यों और यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया।
शिष्यों के साथ मारपीट का वीडियो आया सामने
संगम तट पर मौजूद लोगों और मीडिया ने इस दौरान एक वीडियो कैद किया, जिसमें शिष्यों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच धक्का-मुक्की दिखाई दे रही है। शिष्यों के अनुसार, अधिकारी मारने का इशारा कर रहे थे और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उन्हें टुकड़ों में जाने को कहा गया।
शिष्यों ने बताया कि वे सभी एक साथ संगम तट पर स्नान करने के लिए बढ़ रहे थे, ताकि शंकराचार्य के साथ पूरी श्रद्धा दिखाई जा सके। प्रशासन ने इसे व्यवस्थित करने की कोशिश की, लेकिन इसका विरोध हुआ और विवाद बढ़ गया।
रात 12 बजे से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मौनी अमावस्या पर संगम नगरी में श्रद्धालुओं का जन सैलाब लगातार बढ़ता रहा। रात 12 बजे के बाद श्रद्धालु स्नान करने के लिए संगम की ओर बढ़ रहे थे। प्रशासन ने जल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड कंपनी, पीएसी और गोताखोरों के साथ-साथ मेले में पुलिस, आरएएफ, बीडीएस, यूपी एटीएस के कमांडो और खुफिया एजेंसियों को भी तैनात किया।
सभी स्नान घाटों पर लगातार निगरानी की जा रही थी। पुलिसकर्मी और पीएसी जवान श्रद्धालुओं को संगम नोज पर एक जगह रुकने नहीं दे रहे थे और लगातार उन्हें आगे बढ़ा रहे थे।
प्रशासन की सतर्कता और निगरानी
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि माघ मेले की पूरी निगरानी चप्पे-चप्पे पर रखी गई है। सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन कैमरों से भी मेले पर नजर रखी जा रही है। संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि इस मौनी अमावस्या पर तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान
अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उनके शिष्यों के साथ मारपीट हो रही थी और अधिकारी उन्हें रोकने का इशारा कर रहे थे। इसलिए उन्होंने स्नान करने से इंकार किया। उनका कहना था कि ऐसा माहौल होने पर श्रद्धालु और शिष्यों की सुरक्षा को खतरा है, इसलिए बेहतर यही है कि स्नान स्थगित कर दिया जाए।