तबादले के झांसे में फंसकर गंवाए ढाई लाख रुपए
नागपुर शहर में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी का तबादला कराने के चक्कर में ढाई लाख रुपए गंवा दिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री के नाम से फर्जी सिफारिश पत्र तैयार कर उस पर नकली हस्ताक्षर तक बना डाले। यह मामला सिताबर्डी थाने में दर्ज किया गया है और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे हुई मुलाकात और शुरू हुआ धोखे का खेल
शिकायतकर्ता वैभव अभिलाष सुरेश बाजीराव प्रभात नगर, गोधणी में रहते हैं और होटल के कारोबार से जुड़े हैं। उनकी पत्नी मोनाली रामचंद्र धकाते महाराष्ट्र राज्य विद्युत महामंडल में पुणे में तैनात हैं। परिवार एक साथ रहना चाहता था, इसलिए वैभव ने अपनी पत्नी का नागपुर स्थानांतरण कराने के लिए सरकारी तरीके से पत्राचार शुरू किया था।
इसी दौरान उनके एक मित्र प्रफुल चौधरी ने उन्हें भैय्याजी सेवतकर नामक व्यक्ति से मिलवाया। यह व्यक्ति कलमेश्वर के तेलगांव इलाके में रहता है। भैय्याजी ने खुद को एमएसईबी का कर्मचारी बताया और वैभव को विश्वास दिलाया कि वह उनकी पत्नी का तबादला करवा सकता है।
विश्वास बनाने के लिए रचा गया पूरा षड्यंत्र
आरोपी भैय्याजी ने वैभव को समझाया कि केवल सरकारी पत्राचार से काम नहीं होगा। उसने बताया कि उसके पास ऊपर तक पहुंच है और वह तबादला करवा सकता है। इस बात पर भरोसा करते हुए वैभव ने आरोपी को पैसे देने शुरू कर दिए।
कुल मिलाकर वैभव ने फोन-पे के माध्यम से और नकद देकर भैय्याजी को 2 लाख 50 हजार रुपए सौंपे। आरोपी ने शुरुआत में छोटे-छोटे आश्वासन देकर उनका भरोसा बनाए रखा। बीच में उसने 20 हजार रुपए वापस भी किए ताकि पीड़ित को लगे कि वह सही काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री के फर्जी हस्ताक्षर वाला सिफारिश पत्र
सबसे गंभीर बात यह है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम से एक फर्जी सिफारिश पत्र तैयार किया। इस पत्र पर नकली हस्ताक्षर के साथ-साथ एक नकली सरकारी मुहर भी लगाई गई। यह पत्र इतना असली लग रहा था कि वैभव को किसी तरह का शक नहीं हुआ।
इस फर्जी पत्र को दिखाकर आरोपी ने वैभव को यकीन दिलाया कि तबादले की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही उनकी पत्नी का नागपुर स्थानांतरण हो जाएगा। इससे पीड़ित का भरोसा और मजबूत हो गया।
लंबे इंतजार के बाद खुली आरोपी की पोल
महीनों तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई तबादला नहीं हुआ तो वैभव को शक होने लगा। उन्होंने आरोपी से बार-बार पूछताछ की और अपने पैसे वापस मांगे। लेकिन आरोपी ने केवल 20 हजार रुपए ही लौटाए और बाकी 2 लाख 30 हजार रुपए देने से मना कर दिया।
जब वैभव ने सिफारिश पत्र की जांच कराई तो पता चला कि यह पूरी तरह से नकली है। मुख्यमंत्री कार्यालय से ऐसा कोई पत्र जारी ही नहीं हुआ था। तब उन्हें समझ आया कि वे एक बड़े धोखाधड़ी के शिकार हो गए हैं।
पुलिस ने की कार्रवाई और आरोपी गिरफ्तार
जब सारे सबूत सामने आ गए तो वैभव ने सिताबर्डी थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी भैय्याजी सेवतकर को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरह से और लोगों को भी ठगा है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज बनाने में किसी और का हाथ तो नहीं है।
सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक ठगी का मामला नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह से आम लोग सरकारी दस्तावेजों की नकल बनाकर मासूम लोगों को ठग रहे हैं। मुख्यमंत्री जैसे उच्च पद के नाम पर फर्जी पत्र बनाना एक गंभीर अपराध है।
इस घटना से यह भी सामने आता है कि लोग तबादले जैसे सरकारी कामों के लिए गैर-कानूनी तरीके अपनाने को तैयार हो जाते हैं। आरोपी ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया।
सावधान रहें और सरकारी प्रक्रिया अपनाएं
इस मामले से सीख लेते हुए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी सरकारी काम के लिए बिचौलियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। तबादला या किसी भी प्रशासनिक काम के लिए सिर्फ सरकारी माध्यम और आधिकारिक प्रक्रिया का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारियों या मुख्यमंत्री के नाम पर कोई सिफारिश या पत्र दिखाता है तो उसकी सत्यता की जांच जरूर करानी चाहिए। ऐसे दस्तावेजों को संबंधित कार्यालय से वेरीफाई करवाना बेहद जरूरी है।
पुलिस की जांच जारी
सिताबर्डी पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच में और भी चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने फर्जी पत्र कहां से और कैसे बनवाए। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस धोखाधड़ी में कोई और व्यक्ति भी शामिल है।
आरोपी से मिले मोबाइल और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। पुलिस ने पीड़ित से फोन-पे के ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल ली है और रुपयों के लेन-देन की जांच भी चल रही है।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि जल्दबाजी में किसी पर भरोसा करना कितना महंगा पड़ सकता है। सरकारी कामों में पारदर्शिता और धैर्य बेहद जरूरी है।