दावोस के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को एक बार फिर चौंका दिया है। स्विट्जरलैंड में हुई वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में ट्रंप ने यूरोप की दिशा पर सवाल खड़े किए और ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मंशा साफ कर दी। उनके इस बयान से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है।
ट्रंप का यूरोप पर बड़ा बयान
बुधवार को दावोस में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें यूरोप से प्यार है और वह चाहते हैं कि यूरोप अच्छा करे। लेकिन उनका मानना है कि यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोप के बीच कई मुद्दों पर मतभेद चल रहे हैं। ट्रंप की इस टिप्पणी ने यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के संबंधों में मौजूद तनाव को और उजागर कर दिया।
दावोस में ट्रंप ने जिस तरह से अपनी बात रखी, उससे साफ है कि वह यूरोप की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों से खुश नहीं हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि यूरोपीय देशों को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है।
अमेरिका फर्स्ट की नीति पर जोर
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप इस भाषण का इस्तेमाल अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति को आगे बढ़ाने के लिए करेंगे। ट्रंप ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी हितों को सबसे पहले रखना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका तरक्की करता है तो पूरी दुनिया तरक्की करती है।
ट्रंप का यह बयान उनकी सोच को साफ करता है कि वह अमेरिका को दुनिया की अर्थव्यवस्था का केंद्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे देश अमेरिका के साथ नीचे जाते हैं और उसके साथ ऊपर आते हैं। यह बयान कुछ विवादास्पद माना जा रहा है क्योंकि यह दूसरे देशों की स्वतंत्र आर्थिक क्षमता पर सवाल खड़ा करता है।
ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा खुलासा
ट्रंप की स्पीच में सबसे ज्यादा चर्चा ग्रीनलैंड को लेकर रही। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इसके लिए बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क का हिस्सा है और यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है।
ट्रंप ने यूरोप के उन देशों का मजाक उड़ाया जो इस विचार का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बहुत जरूरी है। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण से अमेरिका की सामरिक स्थिति मजबूत होगी।
सुरक्षा कारणों से चाहिए ग्रीनलैंड
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा था कि वह दावोस में ग्रीनलैंड के बारे में बैठक करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि आखिरकार कोई समझौता हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वह कुछ ऐसा करेंगे जिससे नाटो बहुत खुश होगा और अमेरिका भी खुश होगा।
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें ग्रीनलैंड सुरक्षा कारणों से चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए बेहद अहम है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती चीन और रूस की दिलचस्पी को देखते हुए ट्रंप इस इलाके में अमेरिकी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
यूरोप के साथ बढ़ता तनाव
ट्रंप के इस बयान से अमेरिका और यूरोप के बीच संबंधों में तनाव बढ़ना तय है। यूरोपीय देश पहले से ही ट्रंप की नीतियों से नाखुश हैं। व्यापार, रक्षा खर्च और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर पहले से ही मतभेद हैं। अब ग्रीनलैंड का मुद्दा इस तनाव को और बढ़ा सकता है।
डेनमार्क ने पहले ही साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। डेनिश सरकार ने ट्रंप के इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया है। यूरोपीय यूनियन के दूसरे देश भी इस मामले में डेनमार्क के साथ खड़े हैं। ट्रंप का यूरोप पर तंज इस स्थिति को और जटिल बना सकता है।
आर्थिक नीतियों पर फोकस
अपने भाषण में ट्रंप ने अमेरिका में महंगाई को कंट्रोल करने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। हालांकि दावोस में मौजूद वैश्विक नेताओं के सामने उनका ध्यान ज्यादातर दूसरे देशों से अपनी शिकायतों पर रहा।
ट्रंप ने बताया कि वह गुरुवार को विदेश नीति के बारे में और विस्तार से बात करेंगे। उम्मीद है कि वह वेनेजुएला और दूसरे मुद्दों पर भी अपना पक्ष रखेंगे।
नाटो को खुश करने का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि ग्रीनलैंड को लेकर जो भी कदम उठाया जाएगा, उससे नाटो खुश होगा। नाटो यानी उत्तर अटलांटिक संधि संगठन में अमेरिका और यूरोप के कई देश शामिल हैं। ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण से पूरे नाटो की सुरक्षा मजबूत होगी।
हालांकि नाटो के यूरोपीय सदस्य देश इस बात से सहमत नहीं दिखते। उनका मानना है कि ट्रंप का यह कदम यूरोप की संप्रभुता पर सवाल खड़ा करता है। डेनमार्क खुद नाटो का सदस्य है और उसने ट्रंप के इस विचार को खारिज कर दिया है।
दुनिया की प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस बयान पर दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अपनी घरेलू राजनीति के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। अमेरिका में आगामी चुनावों को देखते हुए वह खुद को एक मजबूत नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति खतरनाक है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ा सकती है और वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकती है। यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में आई खटास आने वाले समय में और गहरा सकती है।
आगे क्या होगा
अब देखना यह होगा कि ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं। क्या वह वाकई डेनमार्क के साथ कोई समझौता करने में कामयाब होंगे या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी है। यूरोप के साथ अमेरिका के संबंध आने वाले महीनों में कैसे रहते हैं, यह भी देखने वाली बात होगी।
ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करती है, यह भी एक अहम सवाल है। दावोस में उनका यह भाषण साफ करता है कि वह अमेरिकी हितों को सबसे ऊपर रखते हुए कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।