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रसोई गैस की कमी के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, लागू हुआ ECA

रसोई गैस की कमी के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, लागू हुआ ECA
गैस बुकिंग के नियम बदले, अब 25 दिन नहीं 35 दिनों में बुक होगा सिलेंडर

देश के कई शहरों में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता के बीच केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) लागू कर दिया है। सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की सप्लाई सुचारू रूप से मिलती रहे।

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Dipali Kumari
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ECA Act: मिडिल ईस्ट देशों में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अब ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। इसी बीच भारत में भी रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। देश के कई शहरों से गैस की उपलब्धता कम होने की खबरें लगातार सामने आ रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है.

भारत में ECA लागू

सरकार ने घरेलू एलपीजी की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में रसोई गैस की कमी न हो और आम लोगों को समय पर गैस सिलेंडर मिल सके।

सरकार के आदेश के मुताबिक अब रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कुछ खास हाइड्रोकार्बन गैसों का इस्तेमाल अब अन्य औद्योगिक कार्यों के बजाय एलपीजी बनाने के लिए किया जाएगा। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA)?

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करना है। इस कानून का मकसद यह भी है कि बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगे और आम लोगों को जरूरी सामान उचित कीमत पर मिलता रहे।

इस अधिनियम के तहत सरकार को यह अधिकार होता है कि वह जरूरत पड़ने पर किसी भी आवश्यक वस्तु के उत्पादन, भंडारण, वितरण और व्यापार को नियंत्रित कर सके। सरकार चाहें तो स्टॉक की सीमा भी तय कर सकती है, ताकि किसी भी वस्तु की कृत्रिम कमी न पैदा हो।

कानून की धारा 3 सरकार को आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन और सप्लाई को नियंत्रित करने का अधिकार देती है, जबकि धारा 7 में इस कानून के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी किया गया है।

सरकार ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश ?

सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल प्लांट को साफ निर्देश दिया है कि कुछ गैसों का इस्तेमाल अब पेट्रोकेमिकल उत्पाद या अन्य औद्योगिक उपयोग के लिए नहीं किया जाएगा। इन गैसों को सीधे एलपीजी उत्पादन में लगाया जाएगा, ताकि घरेलू गैस की सप्लाई प्रभावित न हो। इसके साथ ही तेल मार्केटिंग कंपनियों को भी निर्देश दिया गया है कि इस व्यवस्था के तहत तैयार की जाने वाली एलपीजी को प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।

सरकार का कहना है कि एलपीजी भारत में घरों में खाना बनाने के लिए सबसे जरूरी ईंधनों में से एक है, इसलिए इसकी लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह नया आदेश 5 मार्च को जारी पुराने आदेश की जगह लागू किया गया है और अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।