केदारेश्वर मंदिर की प्रतिमा और संरचना में बदलाव को लेकर विधानसभा उपाध्यक्ष से शिकायत
पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले ऐतिहासिक केदारेश्वर मंदिर की प्रतिमा और संरचना में हुए बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मंदिर की मूल संरचना और प्राचीन प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ की गई है।
मंदिर की ऐतिहासिक महत्व
केदारेश्वर मंदिर सदियों पुराना धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और प्राचीन मूर्तियों के लिए जाना जाता है। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इस मंदिर में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह मंदिर उनकी आस्था का केंद्र है और इसकी मूल बनावट को बरकरार रखना अत्यंत आवश्यक है।
शिकायत में क्या कहा गया
शिकायतकर्ताओं ने विधानसभा उपाध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में कहा है कि मंदिर की संरचना में अनधिकृत रूप से बदलाव किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मंदिर की प्राचीन प्रतिमाओं को हटाया गया या उनमें परिवर्तन किया गया है। इसके अलावा, मंदिर की मूल वास्तुकला के साथ भी छेड़छाड़ की गई है, जो पुरातात्विक नियमों का उल्लंघन है।
पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी
पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी है कि वह ऐतिहासिक स्मारकों और मंदिरों की देखभाल करे और उनकी मूल स्थिति को बनाए रखे। किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले विभाग को उचित प्रक्रिया का पालन करना होता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में विभाग ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है।
स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय निवासी और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि मंदिर की संरचना में बदलाव से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों ने यह भी मांग की है कि मंदिर को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए।
विधानसभा उपाध्यक्ष की भूमिका
विधानसभा उपाध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज कराने का उद्देश्य इस मामले को उच्च स्तर पर उठाना है। शिकायतकर्ताओं को उम्मीद है कि विधानसभा उपाध्यक्ष इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और संबंधित अधिकारियों को निर्देश देंगे। उन्होंने मांग की है कि तत्काल जांच समिति का गठन किया जाए।
आगे की कार्रवाई
अब यह देखना होगा कि विधानसभा उपाध्यक्ष इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं। पुरातत्व विभाग से भी स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों की नजरें अब अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यह मामला धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका समाधान जल्द होना जरूरी है।