अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें शुक्रवार को एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। यह बढ़ोतरी तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर अपने युद्धपोत भेजने की घोषणा की। इस खबर के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर रुख किया। एशियाई कारोबार के दौरान सोना 5000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया।
शुक्रवार को केवल सोना ही नहीं बल्कि चांदी और प्लैटिनम की कीमतें भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। हालांकि जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक व्यापार समझौते की घोषणा की तो कीमती धातुओं के बाजार में कुछ गिरावट आई। लेकिन ईरान पर उनकी टिप्पणी और समझौते के बारे में पूरी जानकारी न मिलने से सुरक्षित निवेश की मांग बनी रही।
सोने की कीमत में रिकॉर्ड उछाल
स्पॉट गोल्ड यानी तत्काल सोने की कीमत में 0.7 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 4967.48 डॉलर प्रति औंस का नया रिकॉर्ड बना। वहीं फरवरी महीने के लिए गोल्ड फ्यूचर्स में 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई और यह 4969.69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
स्पॉट सिल्वर यानी चांदी की कीमत में करीब 3 फीसदी की जबरदस्त छलांग लगी और यह 99.0275 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसी तरह स्पॉट प्लैटिनम में भी लगभग 1 फीसदी की बढ़त के साथ 2692.31 डॉलर प्रति औंस का शिखर छुआ।
ट्रंप का ईरान को लेकर बड़ा बयान
गुरुवार शाम को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अपनी नौसेना का एक बेड़ा ईरान की तरफ भेजा है। उन्होंने तेहरान को प्रदर्शनकारियों को मारने या अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दी।
ट्रंप ने कहा कि हमारे पास एक आर्मडा यानी युद्धपोतों का बेड़ा उस दिशा में जा रहा है और शायद हमें इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि कुछ न हो। रिपोर्टों के अनुसार एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और कई विध्वंसक जहाज आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में पहुंचने वाले हैं।
ट्रंप ने जनवरी की शुरुआत में भी तेहरान को प्रदर्शनकारियों को मारने के खिलाफ चेतावनी दी थी। उस समय ईरान में निज़ाम के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। हालांकि उस समय उन्होंने ईरान के बारे में अपनी बातों को कुछ हद तक नरम किया था। लेकिन गुरुवार की टिप्पणी ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं।
2026 में धातुओं की शानदार शुरुआत
जनवरी के पूरे महीने धातु बाजार में जबरदस्त तेजी रही। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण व्यापारी भौतिक और सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करने के लिए दौड़े। साल की शुरुआत में वेनेजुएला में अमेरिकी घुसपैठ और ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की धमकियों ने कम जोखिम वाली संपत्तियों की मांग को और बढ़ावा दिया।
स्पॉट गोल्ड 2026 में अब तक करीब 15 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। चांदी में लगभग 39 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि हुई जबकि प्लैटिनम में 21 फीसदी का इजाफा हुआ।
डॉलर में कमजोरी का असर
कमजोर डॉलर ने भी धातुओं की कीमतों को बढ़ाने में मदद की। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर मिले मिले-जुले संकेतों ने इस साल फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना को बढ़ा दिया। केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते बैठक करने वाला है और व्यापक रूप से उम्मीद है कि वह उस समय दरों को अपरिवर्तित रखेगा।
फेड पर ट्रंप के हमलों ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाया। विकसित देशों खासकर जापान में बिगड़ते वित्तीय स्वास्थ्य को लेकर चिंताओं ने भी इसमें योगदान दिया। हाल के हफ्तों में जापानी और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड तेजी से बेचे गए। व्यापारी सोने की तरफ रुख करते दिखे।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है
वर्तमान परिस्थिति में निवेशकों के लिए सोना सबसे सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय तनाव बढ़ने पर हमेशा सोने की मांग बढ़ती है। यह एक ऐसी संपत्ति है जो मुश्किल समय में अपनी कीमत बनाए रखती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में स्थिति और बिगड़ती है तो सोना 5000 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को पार कर सकता है। यह एक ऐतिहासिक स्तर होगा जो पहले कभी नहीं देखा गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
सोने की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता को दर्शाती हैं। जब निवेशक शेयर बाजार और अन्य जोखिम भरे निवेशों से दूर होकर सोने में पैसा लगाते हैं तो यह चिंता का विषय बन जाता है। इससे पता चलता है कि दुनिया भर में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को लेकर डर बना हुआ है।
भारतीय बाजार पर प्रभाव
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां त्योहारों और शादियों में सोने की भारी मांग रहती है। कीमतों में यह वृद्धि भारतीय खरीदारों के लिए चुनौती बन सकती है।
आने वाले दिनों में क्या होगा
विशेषज्ञों की नजर अब फेडरल रिजर्व की अगली बैठक और मध्य पूर्व की स्थिति पर टिकी है। अगर ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ता है तो सोने की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं अगर स्थिति नियंत्रण में आती है तो कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन फिलहाल तो सोना निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
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