कोलकाता में नेताजी की जयंती पर गिग कामगारों के अधिकारों की लड़ाई
महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण आंदोलन की शुरुआत हुई है। पश्चिम बंगाल INTUC सेवादल ने गिग कामगारों के अधिकारों को लेकर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया है। यह आयोजन कोलकाता के आरएन मुखर्जी रोड स्थित परिवहन भवन में किया गया।
इस आंदोलन की खास बात यह है कि यह नेताजी की जयंती के दिन आयोजित किया गया है, जो युवा भारत की चेतना और मजदूरों के अधिकारों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। पश्चिम बंगाल INTUC सेवादल के सभापति श्री प्रमोद पांडे के नेतृत्व में गिग कामगारों ने अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।
गिग कामगार कौन होते हैं
आज के डिजिटल युग में गिग कामगार वे लोग हैं जो विभिन्न ऐप-आधारित कंपनियों के लिए काम करते हैं। इनमें फूड डिलीवरी करने वाले, टैक्सी चालक, और अन्य सेवा प्रदाता शामिल हैं। ये कामगार किसी एक कंपनी के स्थायी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि अस्थायी आधार पर काम करते हैं। हालांकि इनकी संख्या लाखों में है, लेकिन इन्हें अभी तक पूरे कानूनी अधिकार नहीं मिले हैं।
पांच प्रमुख मांगें जो उठाई गई हैं
पहली मांग – संवैधानिक अधिकार की गारंटी
पश्चिम बंगाल INTUC सेवादल की पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि गिग कामगारों को कानूनी तौर पर संवैधानिक अधिकार दिए जाएं। वर्तमान में ये कामगार एक अजीब स्थिति में हैं। ये न तो पूरी तरह से स्वतंत्र व्यवसायी माने जाते हैं और न ही नियमित कर्मचारी। इस वजह से इन्हें श्रम कानूनों का लाभ नहीं मिल पाता। संगठन की मांग है कि सरकार इन कामगारों को कानूनी मान्यता दे और उन्हें अन्य श्रमिकों की तरह ही अधिकार प्रदान करे।
दूसरी मांग – न्यूनतम आय की गारंटी
गिग कामगारों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनकी आय निश्चित नहीं होती। कभी अच्छी कमाई होती है तो कभी बहुत कम। INTUC की मांग है कि इन कामगारों को एक न्यूनतम आय की गारंटी दी जाए। चाहे काम कम हो या ज्यादा, हर महीने एक निश्चित रकम इन्हें मिलनी चाहिए। यह उनके और उनके परिवार के जीवन यापन के लिए जरूरी है।
तीसरी मांग – बिना चर्चा के आईडी ब्लॉक न करना
गिग कामगारों की एक बड़ी शिकायत यह है कि कंपनियां अचानक उनकी आईडी ब्लॉक कर देती हैं। इससे उनका रोजगार खत्म हो जाता है। कई बार कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया जाता। INTUC की मांग है कि बिना किसी चर्चा या स्पष्टीकरण के कंपनियां किसी भी कामगार की आईडी ब्लॉक नहीं कर सकतीं। अगर कोई समस्या है तो पहले कामगार को सुनवाई का मौका मिलना चाहिए।
चौथी मांग – दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा
सड़कों पर काम करने वाले गिग कामगारों को हर समय दुर्घटना का खतरा रहता है। फिर भी उनके पास कोई बीमा या सामाजिक सुरक्षा नहीं होती। संगठन की मांग है कि सभी गिग कामगारों के लिए दुर्घटना बीमा अनिवार्य किया जाए। साथ ही उन्हें बुढ़ापे में पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
पांचवीं मांग – समय पर मजदूरी और प्रोत्साहन राशि
कई बार कामगारों की मजदूरी में देरी होती है या उनकी प्रोत्साहन राशि काट ली जाती है। INTUC की मांग है कि समय पर मजदूरी का भुगतान हो और किसी भी हालत में कामगारों की प्रोत्साहन राशि में कटौती न की जाए। यह उनके परिश्रम का फल है और उन्हें पूरा हक मिलना चाहिए।
प्रमोद पांडे का नेतृत्व और आंदोलन की रणनीति
पश्चिम बंगाल INTUC सेवादल के सभापति श्री प्रमोद पांडे इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हमेशा मजदूरों और गरीबों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उनकी जयंती पर यह आंदोलन शुरू करना बेहद सार्थक है। श्री पांडे ने कामगारों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखें।
आंदोलन में संकर हजरा सहित कई अन्य नेता भी शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल पश्चिम बंगाल का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश में गिग कामगारों की समस्याएं एक जैसी हैं।
नेताजी की प्रेरणा और युवा भारत का सपना
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने युवा भारत का सपना देखा था जहां हर नागरिक को सम्मान और अधिकार मिले। आज के गिग कामगार ज्यादातर युवा हैं जो मेहनत से अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। उनके साथ न्याय होना जरूरी है।
इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार और कंपनियों को यह एहसास दिलाना है कि गिग कामगार भी समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें भी वही अधिकार मिलने चाहिए जो अन्य श्रमिकों को मिलते हैं।
आगे की रणनीति और उम्मीदें
INTUC सेवादल ने यह स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे और बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे। वे राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से गिग कामगारों के लिए विशेष कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।
कामगारों में इस आंदोलन को लेकर काफी उत्साह है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती पर शुरू हुआ यह आंदोलन एक महत्वपूर्ण कदम है। गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है और इसमें लाखों लोग रोजगार पा रहे हैं। लेकिन बिना अधिकारों के यह रोजगार अधूरा है। पश्चिम बंगाल INTUC सेवादल का यह प्रयास न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश के गिग कामगारों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।