देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद खास है क्योंकि इसी दिन भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी। इस साल भी नागपुर में इस महत्वपूर्ण दिवस को लेकर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने मतदान के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए शपथ ली।
नागपुर के जिलाधिकारी कार्यालय में 23 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी प्रवीण महीरे ने मुख्य भूमिका निभाई और उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शपथ दिलाई। यह शपथ समारोह लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
शपथ समारोह का महत्व
शपथ समारोह के दौरान सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा को दोहराया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह शपथ केवल एक औपचारिकता नहीं थी बल्कि यह लोकतंत्र के प्रति हर नागरिक की जिम्मेदारी को याद दिलाने का एक माध्यम था। जब सरकारी अधिकारी खुद इस तरह की शपथ लेते हैं तो यह आम नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता है।
इस अवसर पर मौजूद रहे निवासी उपजिलाधिकारी अनुप खांडे ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। उनके साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में मतदान के महत्व को स्वीकार किया और नागरिकों को जागरूक करने का संकल्प लिया।
मतदान केवल अधिकार नहीं बल्कि कर्तव्य भी है
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि मतदान केवल एक अधिकार नहीं है बल्कि यह हर नागरिक का महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है। जब हर नागरिक अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल करता है तभी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है और मतदान इसी भागीदारी का सबसे बड़ा माध्यम है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि मतदान के जरिए ही नागरिक अपनी पसंद की सरकार चुन सकते हैं। अगर कोई नागरिक मतदान नहीं करता है तो वह अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह जाता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने मत का इस्तेमाल करना चाहिए और देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस का इतिहास
25 जनवरी 1950 को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी। यह आयोग भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का काम करता है। इस ऐतिहासिक दिन को याद रखने के लिए वर्ष 2011 से भारत निर्वाचन आयोग ने हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने का निर्णय लिया।
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, खासकर युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करना है। युवा वर्ग देश का भविष्य है और अगर वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेंगे तो देश की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है। इसलिए युवाओं को मतदान के महत्व को समझाना और उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल करना बेहद जरूरी है।
मतदाता जागरूकता का उद्देश्य
नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाना था। कई बार लोग मतदान को गंभीरता से नहीं लेते हैं या फिर छोटी-छोटी बातों के कारण मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उन्हें मतदान के महत्व के बारे में बताया जाए और उन्हें इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
इस कार्यक्रम के माध्यम से अधिकारियों ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में हर एक वोट की अहमियत होती है। एक-एक वोट से ही सरकार बनती है और देश की दिशा तय होती है। इसलिए किसी को भी अपने मत को व्यर्थ नहीं समझना चाहिए।
युवाओं की भूमिका
राष्ट्रीय मतदाता दिवस का एक बड़ा फोकस युवा मतदाताओं पर होता है। देश में बड़ी संख्या में युवा मतदाता हैं जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। इन नए मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना और उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल करना बेहद जरूरी है।
युवा वर्ग समाज में बदलाव लाने की ताकत रखता है। अगर युवा सही निर्णय लेकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें तो देश में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। इसलिए हर युवा को यह समझना चाहिए कि उनका एक वोट देश के भविष्य को बदल सकता है।
लोकतंत्र की मजबूती में मतदान का योगदान
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहां पर करोड़ों लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। यह लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझे और मतदान में भाग ले। मतदान प्रतिशत जितना अधिक होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा।
नागपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम था। जब सरकारी अधिकारी खुद शपथ लेकर मतदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हैं तो इससे आम जनता को भी प्रेरणा मिलती है।
आगे की तैयारियां
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर सिर्फ एक दिन कार्यक्रम करना ही काफी नहीं है। इसके लिए साल भर मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। खासकर चुनाव के समय मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए।
नागपुर प्रशासन ने भी यह संकेत दिया है कि वे आगामी चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करेंगे। इसके लिए गांवों और शहरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में भी युवा मतदाताओं को शिक्षित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
नागपुर में जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित राष्ट्रीय मतदाता दिवस का कार्यक्रम एक सफल आयोजन रहा। इसमें अधिकारियों ने जो शपथ ली वह केवल एक औपचारिकता नहीं थी बल्कि लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक थी। मतदान हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य दोनों है। जब हर व्यक्ति अपने इस कर्तव्य को समझेगा और मतदान में भाग लेगा तभी देश का लोकतंत्र सही मायनों में मजबूत होगा। आइए हम सभी संकल्प लें कि आने वाले हर चुनाव में हम अपने मताधिकार का जरूर इस्तेमाल करेंगे और देश के विकास में अपना योगदान देंगे।