Petrol Diesel Price: हर दिन की सुबह सिर्फ अलार्म या सूरज की रोशनी से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतों से भी होती है। आम आदमी के लिए यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उसकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा सीधा सवाल है। ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, ऑटो चालक हो या सब्जी बेचने वाला व्यापारी—हर किसी की जेब पर ईंधन की कीमतों का असर पड़ता है।
देश में हर दिन सुबह 6 बजे तेल विपणन कंपनियां नई दरें जारी करती हैं। ये दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल और डॉलर-रुपए की विनिमय दर पर आधारित होती हैं। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल देश के भीतर की नीतियों से नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों से भी प्रभावित होती हैं।
हर दिन कीमतें जारी करने की व्यवस्था
सरकार और तेल कंपनियों की यह व्यवस्था पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए शुरू की गई थी। पहले कीमतों में बदलाव लंबे अंतराल के बाद होता था, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम और असमंजस बना रहता था। अब रोजाना दरें तय होने से यह साफ हो जाता है कि कीमतें किन कारणों से ऊपर-नीचे हो रही हैं।
इस प्रणाली का उद्देश्य यह भी है कि उपभोक्ता किसी अफवाह या गलत जानकारी के आधार पर फैसला न लें। रोज की दरें यह भरोसा देती हैं कि कीमतों में जो भी बदलाव हो रहा है, वह बाजार की स्थिति के अनुसार है।
24 जनवरी 2026: प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल का भाव
देश के अलग-अलग शहरों में टैक्स और परिवहन लागत के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग रहती हैं। 24 जनवरी 2026 को जारी ताजा दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है।
मुंबई में पेट्रोल 104.21 रुपये और डीजल 92.15 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर है। कोलकाता में पेट्रोल 103.94 रुपये और डीजल 90.76 रुपये, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 100.75 रुपये और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
अन्य बड़े शहरों में ईंधन की स्थिति
देश के अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो बेंगलुरु में पेट्रोल 102.92 रुपये और डीजल 89.02 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में पेट्रोल 107.46 रुपये और डीजल 95.70 रुपये पर बना हुआ है, जो कई लोगों के लिए चिंता का कारण है।
जयपुर में पेट्रोल 104.72 रुपये और डीजल 90.21 रुपये, लखनऊ में पेट्रोल 94.69 रुपये और डीजल 87.80 रुपये प्रति लीटर है। पुणे, चंडीगढ़, इंदौर, पटना, सूरत और नासिक जैसे शहरों में भी कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं, हालांकि हर शहर में थोड़ा-बहुत अंतर जरूर देखने को मिलता है।
आम आदमी पर पड़ता असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहतीं। इनका असर परिवहन लागत के जरिए सब्जी, दूध, फल और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों तक पहुंचता है। जब ईंधन महंगा होता है, तो महंगाई का दबाव आम परिवारों पर बढ़ जाता है।
हालांकि पिछले कुछ समय से कीमतों में बड़ी उछाल नहीं देखने को मिली है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। स्थिर दरों के कारण बजट बनाना और खर्चों की योजना करना अपेक्षाकृत आसान हुआ है।
पिछले दो साल से स्थिर कीमतें
मई 2022 के बाद केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में कटौती की थी। इसके बाद से देशभर में ईंधन की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी हुई है।
भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहा हो, लेकिन घरेलू स्तर पर इसका पूरा असर उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा। सरकार की नीति यही रही है कि आम आदमी को अचानक बढ़ते बोझ से बचाया जाए।
आगे क्या रह सकती है स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा भू-राजनीतिक संकट या कच्चे तेल की सप्लाई में बड़ी बाधा नहीं आती, तब तक भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं। हालांकि डॉलर-रुपए की विनिमय दर और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखना जरूरी है।