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कोलकाता साइबर पुलिस ने पकड़े 5 ठग, मोबाइल ऐप से लोगों के खाते कर रहे थे खाली

Kolkata Cyber Crime: कोलकाता पुलिस ने पकड़े 5 साइबर ठग, मोबाइल ऐप से खाली कर रहे थे खाते
Kolkata Cyber Crime: कोलकाता पुलिस ने पकड़े 5 साइबर ठग, मोबाइल ऐप से खाली कर रहे थे खाते
कोलकाता साइबर पुलिस ने महेशताला में 5 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। बिहार और महाराष्ट्र के ये आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी APK फाइल भेजकर मोबाइल हैक करते थे और बैंक खातों से पैसे उड़ा लेते थे। पुलिस ने 10 लैपटॉप, 24 मोबाइल और 2 राउटर बरामद किए। यह संगठित गिरोह का हिस्सा हैं।
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कोलकाता की साइबर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये ठग सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाकर उनके मोबाइल फोन पर नियंत्रण हासिल कर लेते थे और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे। 24 जनवरी 2026 को महेशताला थाना क्षेत्र में की गई छापेमारी में इन पांचों आरोपियों को पकड़ा गया है। पुलिस ने इनके पास से 10 लैपटॉप, 24 मोबाइल फोन और 2 राउटर बरामद किए हैं।

यह गिरफ्तारी साइबर थाना कोलकाता में दर्ज मामला संख्या 69/25 दिनांक 19 दिसंबर 2025 के सिलसिले में की गई है। इस मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के बयानों और विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से चार बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले हैं और एक महाराष्ट्र के औरंगाबाद का है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

पहला आरोपी अभिमन्यु कुमार उर्फ राजा कुमार है, जो 22 वर्षीय है। यह बिहार के औरंगाबाद के नवादीह रोड का रहने वाला है और इसके पिता का नाम बाबलू कुमार है।

दूसरा आरोपी सेजेन फिलिप्स है, जो 22 साल का है। यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद के नर्दनवन कॉलोनी का रहने वाला है और इसके पिता का नाम एंथनी सेबेस्टियन है।

तीसरा आरोपी मोहम्मद समर है, जिसकी उम्र 20 साल है। यह भी बिहार के औरंगाबाद के नवादीह रोड का रहने वाला है और इसके पिता का नाम मोहम्मद जहीरुद्दीन है।

चौथा आरोपी नीरज कुमार है, जो 28 वर्ष का है। यह बिहार के औरंगाबाद के शाहपुर वार्ड का रहने वाला है और इसके पिता का नाम नारायण मेहता है।

पांचवां आरोपी मोहम्मद इमरान है, जिसकी उम्र 19 साल है। यह बिहार के औरंगाबाद के पठानटोली का रहने वाला है और इसके पिता का नाम अमानउल्लाह है।

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ठगी का तरीका कैसे था

पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी बेहद चालाकी से काम कर रहे थे। इन्होंने एक खास तरीका अपनाया था जिससे लोगों को आसानी से ठग लिया जाता था।

सबसे पहले ये लोग एक खतरनाक APK फाइल तैयार करते थे। APK फाइल वह फाइल होती है जिससे मोबाइल में कोई एप्लीकेशन इंस्टॉल होती है। लेकिन इनकी बनाई गई APK फाइल में वायरस और हैकिंग टूल छुपे होते थे।

इसके बाद ये लोग विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन और लिंक के जरिए इन APK फाइलों को फैलाते थे। लोगों को आकर्षक ऑफर या किसी सेवा का लालच देकर इन लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित किया जाता था।

जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करके APK फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लेता था, आरोपियों को उसके मोबाइल फोन पर दूर से ही पूरा नियंत्रण मिल जाता था।

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बैंक खातों को कैसे खाली करते थे

एक बार मोबाइल पर नियंत्रण मिल जाने के बाद आरोपी पीड़ित के फोन में इंस्टॉल बैंकिंग और वित्तीय एप्लीकेशन तक पहुंच जाते थे। वे पीड़ित की जानकारी के बिना ही उसके बैंक खाते में घुस जाते थे।

इसके बाद ये ठग पीड़ितों के बैंक खातों से पैसे निकालकर अपने चुने हुए बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। पीड़ित को तब तक पता ही नहीं चलता था जब तक उसका खाता खाली नहीं हो जाता था।

संगठित गिरोह का हिस्सा

पुलिस की जांच से पता चला है कि ये पांचों गिरफ्तार आरोपी उन आरोपियों के साथी हैं जिन्हें पहले ही इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। यह पूरा एक संगठित अपराधिक गिरोह है जो एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत काम कर रहा था।

सभी आरोपी मिलकर इस साइबर ठगी के धंधे को चला रहे थे। किसी की जिम्मेदारी APK फाइल बनाना थी, तो कोई सोशल मीडिया पर इसे फैलाता था। कुछ लोग मोबाइल हैक करने का काम करते थे और कुछ पैसे ट्रांसफर करने का।

Kolkata Cyber Crime: कोलकाता पुलिस ने पकड़े 5 साइबर ठग, मोबाइल ऐप से खाली कर रहे थे खाते
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कानूनी कार्रवाई

इस मामले में साइबर थाना कोलकाता में केस नंबर 69/25 दिनांक 19 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया था। यह मामला आईटी एक्ट 2000 की धारा 66, 66सी, 66डी, 84बी और 43 के तहत दर्ज है।

साथ ही भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2), 319(2), 318(4), 336(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत भी कार्रवाई की गई है।

बरामद सामान

पुलिस ने आरोपियों के पास से काफी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इनमें 10 लैपटॉप, 24 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2 राउटर और कई आपराधिक स्क्रीनशॉट शामिल हैं। इन उपकरणों से ही आरोपी अपनी ठगी को अंजाम देते थे।

आगे की जांच

कोलकाता साइबर पुलिस अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और कितने लोगों को इस तरह से ठगा गया है। पुलिस यह भी देख रही है कि चोरी किए गए पैसे कहां भेजे गए और उन्हें वापस कैसे किया जा सकता है।

लोगों को सावधानी की सलाह

साइबर विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी APK फाइल को सीधे इंटरनेट से डाउनलोड करके इंस्टॉल न करें। हमेशा गूगल प्ले स्टोर जैसे भरोसेमंद स्रोतों से ही एप्लीकेशन डाउनलोड करनी चाहिए।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।