नागपुर केंद्रीय कारागृह के लिए यह गौरव का क्षण है। यहां कार्यरत हवलदार राजू विट्ठलराव हाते को 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस पर माननीय राष्ट्रपति द्वारा “उल्लेखनीय सेवा पदक” से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उनकी लगभग तीन दशकों की निष्ठावान सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का परिणाम है। इस उपलब्धि पर संपूर्ण कारागृह विभाग गर्व महसूस कर रहा है।
सेवा यात्रा की शुरुआत
राजू विट्ठलराव हाते की कारागृह सेवा की यात्रा 23 जुलाई 1997 को शुरू हुई थी, जब उन्होंने कारागृह सिपाही के पद पर नियुक्ति प्राप्त की। उस समय वे एक युवा थे, जो अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित होकर देश की सेवा करना चाहते थे। पिछले 28 वर्ष 5 माह में उन्होंने अपनी मेहनत, ईमानदारी और निष्ठा से यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
24 जून 2021 को उन्हें उनकी योग्यता और सेवाओं के आधार पर हवलदार के पद पर पदोन्नति मिली। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जो उनकी कड़ी मेहनत का सीधा परिणाम था।
विभिन्न कारागृहों में सेवा
राजू हाते ने अपनी सेवा अवधि के दौरान नागपुर केंद्रीय कारागृह, भंडारा जिला कारागृह और वर्धा जिला कारागृह में कार्य किया है। हर जगह उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और अपने वरिष्ठ अधिकारियों का विश्वास जीता। कारागृह प्रशासन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करना आसान नहीं होता, लेकिन राजू हाते ने हर चुनौती को स्वीकार किया और अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया।
कारागृह में कैदियों की देखभाल, अनुशासन बनाए रखना, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना और साथ ही उनके सुधार में योगदान देना एक जिम्मेदार कार्य है। राजू हाते ने इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया और अपने काम को पूर्णता से निभाया।
पूर्व में मिले सम्मान
यह पहली बार नहीं है जब राजू हाते को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा रहा है। उनकी उल्लेखनीय सेवाओं को पहले भी मान्यता मिल चुकी है। 15 अगस्त 2017 को माननीय अपर पुलिस महानिदेशक व महानिरीक्षक, कारागृह व सुधार सेवा, महाराष्ट्र राज्य, पुणे द्वारा उन्हें सम्मान चिन्ह से पुरस्कृत किया गया था।
इसके एक वर्ष बाद, 15 अगस्त 2018 को उन्हें माननीय राष्ट्रपति द्वारा सुधार सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया था। यह पदक कारागृह और सुधार सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। अब 2026 में उन्हें फिर से राष्ट्रपति द्वारा उल्लेखनीय सेवा पदक से सम्मानित किया जाना उनके लगातार बेहतर प्रदर्शन का प्रमाण है।
17 नकद पुरस्कार और 38 प्रशंसा पत्र
राजू हाते की सेवा अवधि के दौरान उन्हें 17 नकद पुरस्कार और 38 प्रशंसा पत्र प्राप्त हुए हैं। यह संख्या उनकी निरंतर उत्कृष्टता और समर्पण को दर्शाती है। हर नकद पुरस्कार और हर प्रशंसा पत्र उनकी मेहनत, ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति निष्ठा का प्रमाण है।
कारागृह विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह आंकड़े प्रेरणादायक हैं। यह दिखाता है कि अगर कोई व्यक्ति पूरी ईमानदारी और समर्पण से अपना काम करे, तो उसकी मेहनत का फल जरूर मिलता है।
पारिवारिक और व्यक्तिगत जानकारी
राजू विट्ठलराव हाते मूल रूप से ग्राम हलदगांव, पोस्ट चांपा, तहसील उमरेड, जिला नागपुर के निवासी हैं। वर्तमान में वे श्रीकृष्ण नगर, उदयनगर गार्डन के पास, नागपुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्री और एक पुत्र हैं।
परिवार के सदस्य इस सम्मान पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। यह सम्मान न केवल राजू हाते के लिए बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए गौरव का विषय है। परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन भी उनकी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका रहा है।
सहकर्मियों और अधिकारियों की शुभकामनाएं
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर नागपुर केंद्रीय कारागृह के सभी वरिष्ठ अधिकारियों, सहयोगी अधिकारियों और कर्मचारियों ने राजू हाते को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। कारागृह परिसर में उत्सव का माहौल है और सभी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
कारागृह अधीक्षक ने कहा, “राजू हाते हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। उनकी निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और ईमानदारी अनुकरणीय है। यह सम्मान पूरे कारागृह विभाग के लिए गौरव का विषय है।”
युवा कर्मचारियों के लिए प्रेरणा
राजू हाते की यह उपलब्धि युवा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह साबित करता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने काम के प्रति समर्पित रहे, ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाए और निरंतर बेहतर प्रदर्शन करे, तो सफलता और सम्मान अवश्य मिलता है।
कारागृह सेवा जैसे कठिन और जिम्मेदारी भरे क्षेत्र में काम करते हुए राजू हाते ने यह दिखाया कि हर काम सम्मानजनक होता है, बशर्ते उसे सम्मान के साथ किया जाए।
नागपुर और महाराष्ट्र राज्य के लिए यह गर्व की बात है कि उनके एक सपूत को देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक मिल रहा है। 26 जनवरी 2026 को जब राष्ट्रपति उन्हें यह पदक प्रदान करेंगे, तो यह पूरे कारागृह विभाग और नागपुर के लिए गौरव का क्षण होगा।