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कोलकाता साइबर पुलिस ने अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, पांच आरोपी गिरफ्तार

Kolkata Cyber Police Raid: कोलकाता में फर्जी PayPal कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार
Kolkata Cyber Police Raid: कोलकाता में फर्जी पेपैल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार

Kolkata Cyber Crime Bust: कोलकाता साइबर पुलिस ने 29 जनवरी 2026 को दो छापेमारी में पांच लोगों को गिरफ्तार किया जो पेपैल के नाम पर अमेरिकी नागरिकों को ठग रहे थे। पुलिस ने 12 लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन और अन्य उपकरण जब्त किए। आरोपी रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर से पीड़ितों के खाते हैक कर पैसे विदेशी खातों में भेजते थे।

Updated:

कोलकाता की साइबर अपराध शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है। 29 जनवरी 2026 को हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये अपराधी पेपैल कंपनी के नाम पर फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे और अमेरिका में रहने वाले लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे।

साइबर पुलिस स्टेशन, कोलकाता में 28 जनवरी 2026 को जीडीई नंबर 576 के तहत एक मामला दर्ज किया गया था। यह मामला सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66, 66सी, 66डी, 84बी और 43 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकृत किया गया था।

पहली गिरफ्तारी और मुख्य आरोपी

वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश और विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर साइबर क्राइम शाखा की टीम ने नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन के इलाके में छापेमारी की। इस कार्रवाई में 29 जनवरी 2026 को सुबह 4:35 बजे मुख्य आरोपी सरीम रजा (28 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। सरीम रजा नारकेलडांगा, कोलकाता-700009 स्थित आइडियल हाइट्स के फ्लैट नंबर 21डी, ब्लॉक सी में रहता है। पुलिस ने उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए। जांच में पता चला कि सरीम ही इस पूरे धोखाधड़ी के गिरोह का मुख्य संचालक और आयोजक था।

दूसरी छापेमारी और चार और गिरफ्तारियां

सरीम रजा से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर साइबर टीम ने बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में दूसरी छापेमारी की। 29 जनवरी 2026 को सुबह 7:50 बजे से 8:00 बजे के बीच दक्षिण 24 परगना के 12ए सोनार गांव, बिष्णुपुर, पिन-743377 के भूतल के कमरे से चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में संदीप चौधरी (40 वर्ष), अंकित प्रदीप (27 वर्ष), नाजिश अहमद (32 वर्ष) और मोहम्मद आसिफ अख्तर (26 वर्ष) शामिल हैं।

छापेमारी के दौरान बरामद सामान

पुलिस ने इस अवैध कॉल सेंटर से बड़ी मात्रा में अपराध से जुड़े सामान और दस्तावेज बरामद किए हैं। जब्त की गई वस्तुओं में 12 लैपटॉप, 3 वाई-फाई राउटर, 6 मोबाइल फोन, 5 मल्टीमीडिया कॉलिंग और सुनने वाले हेडफोन शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत और अपराध से जुड़ा इलेक्ट्रॉनिक डेटा भी जब्त किया गया है। सभी वस्तुओं को उचित जब्ती सूची के तहत गवाहों और स्थानीय पुलिस कर्मियों की उपस्थिति में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जब्त किया गया।

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अपराधियों का तरीका

यह गिरोह पेपैल कंपनी का नाम लेकर फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। अपराधी अमेरिका में विभिन्न वेब प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों पर चुनिंदा संपर्क नंबर डालते थे। इन नंबरों को पेपैल के आधिकारिक ग्राहक सेवा और तकनीकी सहायता नंबर बताया जाता था। जब पीड़ित लोग Microsoft Teams के माध्यम से इन नंबरों पर संपर्क करते थे, तो आरोपी खुद को पेपैल के ग्राहक सेवा या तकनीकी सहायता कार्यकर्ता बताते थे।

तकनीकी सहायता देने के झूठे आश्वासन पर ये धोखेबाज पीड़ितों को TeamViewer, UltraViewer और AnyDesk जैसे रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित करते थे। इसके जरिए वे पीड़ितों के कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर लेते थे।

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धोखाधड़ी की प्रक्रिया

अनधिकृत पहुंच का फायदा उठाकर ये अपराधी पीड़ितों के पेपैल खातों में गैरकानूनी तरीके से घुस जाते थे। इसके बाद पीड़ितों के पेपैल खातों से धन निकालकर विदेशी बैंक खातों और गिरोह द्वारा नियंत्रित डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित कर दिया जाता था।

अपनी असली पहचान और स्थान को छिपाने के लिए ये धोखेबाज ExpressVPN जैसे आधुनिक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल करते थे। पीड़ितों को और भी ज्यादा धोखा देने के लिए पेपैल और अमेरिका की सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के नाम पर जाली और बनावटी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज भी दिखाए जाते थे।

पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच

कोलकाता साइबर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली थी कि कुछ लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी कर रहे हैं। इसके बाद साइबर विशेषज्ञों की टीम ने गहन तकनीकी जांच की और आरोपियों के ठिकानों का पता लगाया।

कानूनी प्रक्रिया का पालन

पुलिस ने पूरी कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया। गवाहों की उपस्थिति में सभी सामान जब्त किए गए और उचित दस्तावेज तैयार किए गए। स्थानीय पुलिस कर्मियों को भी पूरी प्रक्रिया में शामिल किया गया ताकि कोई कानूनी खामी न रहे।

साइबर अपराध का बढ़ता खतरा

यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह से अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इस तरह की ठगी भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है। इसलिए पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करनी जरूरी है।

जनता के लिए सावधानी का संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल से सावधान रहना चाहिए। किसी भी कंपनी के नाम पर तकनीकी सहायता मांगने वाले लोगों पर भरोसा करने से पहले उनकी पहचान की पुष्टि जरूर करनी चाहिए। रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने से पहले हमेशा सतर्क रहें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।