जरूर पढ़ें

CM हेमंत सोरेन से अचानक मिलने पहुंचे महेंद्र सिंह धोनी, झारखंड की राजनीति में हलचल तेज

सीएम हेमंत सोरेन से अचानक मिलने पहुंचे महेंद्र सिंह धोनी
सीएम हेमंत सोरेन से अचानक मिलने पहुंचे महेंद्र सिंह धोनी (Pic Credit- X @HemantSorenJMM)

महेंद्र सिंह धोनी की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अचानक हुई मुलाकात ने झारखंड की राजनीति और खेल जगत में चर्चा तेज कर दी है। दावोस में धोनी के जिक्र और पर्यटन ब्रांड एंबेसडर की योजना के बीच यह मुलाकात कई नई संभावनाओं के संकेत दे रही है।

Updated:

MS Dhoni Hemant Soren Meeting: भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत और भरोसेमंद चेहरों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी जब कहीं अचानक पहुंच जाएं, तो हलचल होना तय है। कुछ ऐसा ही नजारा उस वक्त देखने को मिला, जब धोनी अचानक झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने उनके आवास पहुंच गए। यह मुलाकात भले ही औपचारिक रूप से निजी बताई जा रही हो, लेकिन इसके मायने इससे कहीं ज्यादा गहरे नजर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद अपने एक्स अकाउंट पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा की और लिखा कि “माही से अचानक मिलन हुआ।” तस्वीर में मुख्यमंत्री, विधायक कल्पना सोरेन और महेंद्र सिंह धोनी एक साथ दिखाई दे रहे हैं। चेहरे पर मुस्कान और माहौल की सहजता इस ओर इशारा करती है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी।

अचानक हुई मुलाकात ने क्यों बढ़ाई राजनीतिक हलचल

इस मुलाकात की सबसे खास बात यही रही कि इसके पीछे की वजह को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। न ही सरकार की ओर से और न ही धोनी की तरफ से यह बताया गया कि चर्चा किस मुद्दे पर हुई। लेकिन झारखंड की राजनीति और खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए यह तस्वीर ही काफी कुछ कह गई।

धोनी झारखंड के सबसे बड़े खेल आइकन हैं। उन्होंने न सिर्फ राज्य का नाम देश-दुनिया में रोशन किया, बल्कि युवाओं के लिए सपनों की नई राह भी दिखाई। ऐसे में उनका मुख्यमंत्री आवास पर अचानक पहुंचना महज संयोग नहीं माना जा रहा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात झारखंड में खेल, पर्यटन और युवा विकास से जुड़े बड़े फैसलों की भूमिका हो सकती है। खासकर तब, जब सरकार पहले से ही धोनी को लेकर कई योजनाओं पर विचार कर रही है।

दावोस में भी गूंजा था धोनी का नाम

इस मुलाकात से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भी महेंद्र सिंह धोनी का जिक्र किया था। उन्होंने धोनी को झारखंड की ‘स्पोर्टिंग लीगेसी’ यानी खेल विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक बताया था।

सीएम ने वहां यह भी कहा था कि धोनी जैसे वैश्विक पहचान वाले खिलाड़ी के अनुभव से झारखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अकादमियां विकसित की जा सकती हैं। उस बयान के बाद से ही यह माना जा रहा था कि सरकार और धोनी के बीच किसी बड़े सहयोग की जमीन तैयार हो रही है।

झारखंड पर्यटन का चेहरा बन सकते हैं धोनी

झारखंड सरकार पिछले कुछ समय से महेंद्र सिंह धोनी को राज्य पर्यटन का ब्रांड एंबेसडर बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जंगल, झरने और धार्मिक स्थल अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर उतनी पहचान नहीं बना पाए हैं, जितनी संभावना है।

धोनी जैसा चेहरा अगर झारखंड पर्यटन से जुड़ता है, तो इसका असर सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा। यह राज्य की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में भी मदद कर सकता है।

खेल बुनियादी ढांचे को नई दिशा

झारखंड को खेल प्रतिभाओं की नर्सरी माना जाता है। यहां से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं, लेकिन संसाधनों की कमी हमेशा आड़े आई है। सरकार चाहती है कि धोनी के अनुभव और मार्गदर्शन से राज्य में खेल ढांचे को नई दिशा दी जाए।

क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में भी अकादमियां, ट्रेनिंग सेंटर और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना पर चर्चा चल रही है। धोनी की मौजूदगी इन योजनाओं को जमीन पर उतारने में भरोसा पैदा करती है।

धोनी की चुप्पी भी दे रही है संकेत

महेंद्र सिंह धोनी हमेशा कम बोलने और ज्यादा काम करने के लिए जाने जाते हैं। इस मुलाकात पर उनकी ओर से कोई बयान नहीं आना भी कई संकेत देता है। अक्सर बड़े फैसलों से पहले धोनी इसी तरह शांत रहते हैं।

झारखंड के युवाओं के लिए यह मुलाकात उम्मीद की नई किरण बन सकती है। अगर सरकार और धोनी साथ आते हैं, तो खेल और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में राज्य को नई पहचान मिल सकती है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।