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झारखंड में खून चढ़ाने से पूरे परिवार को एचआईवी संक्रमण का आरोप, स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा

झारखंड में खून चढ़ाने से पूरे परिवार को एचआईवी संक्रमण का आरोप, स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा
Jharkhand Family Blames Hospital: खून चढ़ाने से परिवार को एचआईवी संक्रमण, चाईबासा अस्पताल पर गंभीर आरोप (File Photo)

झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल में जनवरी 2023 में एक महिला को सी-सेक्शन के दौरान खून चढ़ाया गया। 2025 में नियमित जांच में महिला, उसके पति और बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। परिवार ने अस्पताल के ब्लड बैंक पर आरोप लगाया। 2025 में यहां पांच थैलेसीमिया बच्चों को भी एचआईवी संक्रमण हुआ था। स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा है।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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विषयसूची

Jharkhand Hospital Blood Transfusion HIV Case: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक बार फिर से खून चढ़ाने से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। चाईबासा सदर अस्पताल में जनवरी 2023 में एक महिला को सी-सेक्शन के दौरान खून चढ़ाया गया था। दो साल बाद 2025 में जब नियमित जांच हुई तो यह महिला एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद उसके पति और उसी साल जन्मे बड़े बच्चे की जांच में भी एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। परिवार के दूसरे बच्चे की जांच का नतीजा अभी आना बाकी है। परिवार का आरोप है कि यह संक्रमण अस्पताल में चढ़ाए गए खून की वजह से हुआ है।

अस्पताल में खून चढ़ाने का मामला

जनवरी 2023 में महिला को प्रसव के दौरान खून की जरूरत पड़ी थी। चाईबासा सदर अस्पताल में सी-सेक्शन ऑपरेशन के समय उसे जिले के एकमात्र ब्लड बैंक से खून चढ़ाया गया। उस वक्त सब कुछ सामान्य लग रहा था और महिला ठीक हो गई। लेकिन 2025 में जब परिवार के सदस्यों ने नियमित स्वास्थ्य जांच करवाई तो सबको झटका लगा। महिला की रिपोर्ट में एचआईवी पॉजिटिव आया। इसके बाद उसके पति और 2023 में जन्मे बच्चे की भी जांच हुई जो पॉजिटिव आई। परिवार का कहना है कि संक्रमण का एकमात्र कारण अस्पताल में चढ़ाया गया खून ही हो सकता है।

यह पहला मामला नहीं

चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पर यह पहली बार आरोप नहीं लगा है। 2025 में ही इस ब्लड बैंक से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया था। पांच थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को भी एचआईवी संक्रमण हो गया था। उन बच्चों को भी इसी ब्लड बैंक से नियमित रूप से खून चढ़ाया जाता था। उस मामले में जांच हुई, कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की गई। लेकिन अब एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिवार की पीड़ा

प्रभावित परिवार इस समय गहरे सदमे में है। एक महिला जो सिर्फ मां बनने की खुशी मना रही थी, आज अपने पूरे परिवार के साथ जीवन भर की बीमारी से जूझ रही है। परिवार का कहना है कि उन्होंने सरकारी अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इलाज कराने गए थे वहीं से इतनी बड़ी मुसीबत आ जाएगी। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और चाहता है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि वे सभी रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। 2023 में जो खून चढ़ाया गया था उसके सभी कागजात और जांच रिपोर्ट को दोबारा देखा जा रहा है। अधिकारियों ने परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। लेकिन परिवार और जनता के बीच सवाल है कि अगर 2025 में ही ऐसा मामला सामने आ चुका था तो फिर से ऐसा कैसे हुआ।

ब्लड बैंक की सुरक्षा पर सवाल

भारत में खून चढ़ाने से पहले कई तरह की जांच होती है। एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और अन्य संक्रमणों की जांच अनिवार्य है। लेकिन अगर इतनी जांच के बाद भी संक्रमित खून चढ़ाया जा रहा है तो यह बेहद चिंता की बात है। विशेषज्ञों का कहना है कि या तो जांच में लापरवाही हुई या फिर जांच ठीक से हुई ही नहीं। कुछ मामलों में जांच किट की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आती है।

विपक्ष की मांग

इस मामले पर विपक्षी दलों ने भी आवाज उठाई है। उन्होंने सरकार से गहरी जांच की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि यह महज एक परिवार का मामला नहीं है बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता है। उन्होंने कहा कि जिले में सिर्फ एक ब्लड बैंक होना भी समस्या है। अगर वहां कोई गड़बड़ी होती है तो पूरे जिले के मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। विपक्ष ने प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा और इलाज की मांग की है।

सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम

यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि ग्रामीण और छोटे शहरों के सरकारी अस्पतालों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। ब्लड बैंक की निगरानी और जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की जरूरत है। हर महीने या तिमाही में ब्लड बैंक का ऑडिट होना चाहिए। जांच किट की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए। साथ ही कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।

मुआवजा और इलाज की व्यवस्था

Jharkhand Hospital Blood Transfusion HIV Case: प्रभावित परिवार को तत्काल मुआवजा दिया जाना चाहिए। एचआईवी का इलाज जीवनभर चलता है और इसमें काफी खर्च आता है। सरकार को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि परिवार को मुफ्त इलाज और दवाएं मिलें। साथ ही परिवार के छोटे बच्चे की जांच जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए ताकि अगर जरूरत हो तो समय पर इलाज शुरू किया जा सके।

जनता का भरोसा बहाल करना जरूरी

सरकारी अस्पतालों पर गरीब और मध्यम वर्ग की जनता का भरोसा होता है। ऐसे मामले उस भरोसे को तोड़ते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में पारदर्शी तरीके से जांच करे और दोषियों को सजा दे। साथ ही भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए ठोस कदम उठाए। ब्लड बैंक की व्यवस्था सुधारना, जांच प्रक्रिया को सख्त बनाना और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।

यह मामला सिर्फ झारखंड का नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।