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बड़ा खुलासा: शरद पवार बोले-12 फरवरी को होना था पार्टी विलय, अजित पवार चाहते थे एकजुट NCP

बड़ा खुलासा: शरद पवार बोले-12 फरवरी को होना था पार्टी विलय, अजित पवार चाहते थे एकजुट NCP
शरद पवार बोले-12 फरवरी को होना था पार्टी विलय, अजित पवार चाहते थे एकजुट NCP (File Photo)

अजित पवार से जुड़े घटनाक्रम के बाद एनसीपी के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। शरद पवार ने खुलासा किया कि दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, लेकिन अब अनिश्चितता बढ़ गई है। पार्टी में नेतृत्व और दिशा को लेकर मंथन जारी है।

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Ajit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन से जुड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर और बाहर हलचल तेज हो गई है। खासकर एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर जो चर्चाएं लंबे समय से चल रही थीं, उन पर अब अचानक विराम लगने के संकेत मिल रहे हैं। इसी बीच पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने बारामती में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी।

चार महीने से चल रही थी विलय की बातचीत

शरद पवार ने स्वीकार किया कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच पिछले चार महीनों से लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने साफ कहा कि यह पहल अजित पवार की ओर से आई थी और उनकी इच्छा थी कि पार्टी एक बार फिर एकजुट हो। शरद पवार के अनुसार, इस बातचीत में केवल औपचारिकता नहीं बल्कि संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और भविष्य की रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हो चुकी थी।

12 फरवरी 2026 की तारीख लगभग तय थी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि विलय के लिए 12 फरवरी 2026 की तारीख लगभग तय मानी जा रही थी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए शरद पवार गुट की ओर से जयंत पाटिल और अजित पवार खुद सीधे तौर पर संवाद कर रहे थे। यह संकेत देता है कि विलय केवल कयास नहीं था, बल्कि गंभीर स्तर पर तैयारी चल रही थी।

निधन के बाद बदली राजनीतिक तस्वीर

शरद पवार ने दुख जताते हुए कहा कि अजित पवार से जुड़ी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरी प्रक्रिया को रोक दिया है। उनके शब्दों में, अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि जिस विलय की तैयारी हो रही थी, उस पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर जो संतुलन बन रहा था, वह अचानक डगमगा गया है।

सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण से बनाई दूरी

आज शाम 5 बजे होने वाले सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी शरद पवार का रुख चर्चा में रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। शरद पवार ने कहा कि यह फैसला अजित पवार गुट के आंतरिक नेतृत्व का है और संभव है कि इसमें महायुति सरकार की जल्दबाजी भी एक कारण रही हो।

परिवार साथ, राजनीति अलग

जब शरद पवार से परिवार के भीतर मतभेदों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में परिवार एकजुट है, लेकिन राजनीतिक फैसले संगठन और मुंबई के राजनीतिक केंद्रों में लिए जा रहे हैं। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पारिवारिक रिश्तों और राजनीतिक रणनीति को अलग-अलग रखा जा रहा है।

अजित पवार गुट में बदला माहौल

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अजित पवार गुट के नेताओं में अब पहले जैसा आत्मविश्वास और उत्साह नजर नहीं आ रहा। विलय को लेकर जो सकारात्मक माहौल बन रहा था, वह अचानक ठंडा पड़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व के अभाव में विधायकों और पदाधिकारियों का झुकाव फिर से शरद पवार की ओर हो सकता है।

जल्दबाजी में फैसला या मजबूरी?

सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा को कई राजनीतिक जानकार एक रणनीतिक कदम के तौर पर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी को बिखरने से बचाने और एक स्पष्ट पावर सेंटर बनाए रखने के लिए यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया। अंदरखाने यह डर भी बताया जा रहा है कि यदि संगठन कमजोर पड़ा, तो पार्टी का आधार खिसक सकता है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।