बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर अपने विचारों से समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बांदा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू समाज को जो संदेश दिया है, वह आज के समय में बेहद जरूरी और प्रासंगिक है। शास्त्री जी ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ मुसलमानों को गाली देने या किसी दूसरे समुदाय को कोसने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। उनका मानना है कि पहले हिंदुओं को अपनी कुरीतियों और आंतरिक खामियों को दूर करना होगा, तभी समाज में असली बदलाव आ सकता है।
बांदा में आयोजित कार्यक्रम में क्या कहा
धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को बांदा में खुरहंड स्टेशन पर सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर आयोजित सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए। यह दिव्य हनुमंत कथा के दस दिन बाद उनका दूसरा बांदा दौरा था। इस मौके पर उन्होंने भक्तों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं जो समाज के लिए आईने का काम करती हैं।
शास्त्री जी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि सिर्फ दूसरों को गाली देने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर सच में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है तो पहले हिंदुओं को अपनी कमियों पर ध्यान देना होगा। अपने सनातन धर्म में जो कुरीतियां हैं, उन्हें दूर करना होगा।
जात-पात की विदाई जरूरी
धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज के सामने सबसे बड़ी समस्या जात-पात को बताया। उन्होंने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का एक ही उपाय है और वह है जात-पात को खत्म करना। उन्होंने नारा भी दिया – जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई। यह संदेश आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण है जब हिंदू समाज आज भी जाति के आधार पर बंटा हुआ है।
शास्त्री जी का मानना है कि जब तक हिंदू समाज में जाति की दीवारें खड़ी रहेंगी, तब तक सच्ची एकता नहीं आ सकती। उन्होंने साफ कहा कि अगर हम सब एक नहीं हुए तो कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। यह उनका बेहद साहसिक और सकारात्मक बयान था जो हिंदू समाज को एकजुट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तलाक पर दिया उदाहरण
धीरेंद्र शास्त्री ने तलाक के मुद्दे पर भी दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में तीन बार तलाक बोलने से तलाक हो जाता है जबकि हिंदू समाज में 20 से 25 बार कोर्ट में पेशी होने के बाद भी तलाक नहीं होता। उन्होंने कहा कि उनमें कोई बुराई नहीं है, बल्कि अच्छी बात है कि कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे। इस बयान से शास्त्री जी ने यह संदेश दिया कि हर समाज में अच्छाइयां और बुराइयां दोनों होती हैं और हमें एक-दूसरे की अच्छाइयों को सीखना चाहिए।
भगवान पर पूरा भरोसा रखने का संदेश
धार्मिक नेता ने भक्तों को भगवान पर पूरा भरोसा रखने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारा काम है भगवान के दर पर जाना, उनका काम है बिगड़ी को बनाना और परमात्मा का काम है सब कुछ संभालना। शास्त्री जी ने कहा कि अगर आप भगवान पर भरोसा रखोगे तो वह आपका भरोसा कभी टूटने नहीं देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप बीच में कभी मजार पर चादर चढ़ाने चले जाओ, कभी चर्च में कैंडिल जलाने लगो और फिर कहो कि हनुमान जी कृपा नहीं कर रहे तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि या तो पूरी तरह भगवान पर छोड़ दो या फिर सच में भगवान पर ही छोड़ दो। यह बयान धार्मिक आस्था की शुद्धता के बारे में था।
सामाजिक सुधार की जरूरत
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान सिर्फ एक धार्मिक नेता का बयान नहीं है बल्कि यह समाज सुधारक की आवाज है। उन्होंने हिंदू समाज की वास्तविक समस्याओं की ओर इशारा किया है। आज भी हिंदू समाज में जात-पात, ऊंच-नीच, छुआछूत जैसी कुरीतियां मौजूद हैं जो समाज को कमजोर बनाती हैं।
शास्त्री जी ने यह साफ कर दिया कि अगर सच में हिंदू राष्ट्र की बात करनी है तो पहले अपने घर को साफ करना होगा। सिर्फ नारे लगाने से या दूसरों को दोष देने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने समाज को आत्ममंथन करने का संदेश दिया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
धीरेंद्र शास्त्री खासकर युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनके विचार सीधे और साफ होते हैं। वह किसी भी मुद्दे पर बिना डरे अपनी बात रखते हैं। इस बार भी उन्होंने जो बातें कहीं वह युवाओं को सोचने पर मजबूर करती हैं। उन्होंने नफरत की जगह प्यार और एकता का संदेश दिया है।
आज के समय में जब समाज में नफरत और विभाजन की राजनीति चल रही है, ऐसे में शास्त्री जी का यह संदेश बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि असली ताकत एकता में है, नफरत में नहीं। अगर हम सब मिलकर अपनी कमियों को दूर करें तो समाज बेहतर बन सकता है।
सामाजिक सद्भाव का संदेश
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत की बात नहीं की। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि गाली देने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और शांति का संदेश दिया है। यह बयान यह बताता है कि धर्म का असली मतलब प्यार और भाईचारा है, नफरत नहीं।
उन्होंने हिंदू समाज को यह याद दिलाया कि सनातन धर्म में सबको साथ लेकर चलने की परंपरा रही है। वसुधैव कुटुम्बकम की भावना हमारी संस्कृति की पहचान है। इसलिए किसी को गाली देना या नीचा दिखाना हमारी संस्कृति नहीं है।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने साफ कर दिया कि सिर्फ बातें करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाना होगा। जात-पात खत्म करनी होगी, कुरीतियों को दूर करना होगा और समाज में एकता लानी होगी। तभी असली बदलाव आएगा। शास्त्री जी का यह संदेश हर हिंदू को सुनना और समझना चाहिए।