नागपुर शहर की जागृति कॉलोनी में दोपहर के समय एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। करीब 3 बजे अचानक 5 से 6 सांप अलग-अलग दिशाओं में जाते हुए दिखाई दिए। इस घटना से कॉलोनी के लोग घबरा गए और डर का माहौल बन गया। लेकिन समय रहते नागपुर के जाने-माने वाइल्डलाइफ रेस्क्यूअर शुभम जी.आर ने अपनी बहादुरी और अनुभव से 3 सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जंगली जीवों को बचाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की कितनी जरूरत होती है। शुभम जी.आर ने न सिर्फ सांपों की जान बचाई बल्कि कॉलोनी के लोगों को भी राहत दी।
कैसे हुई यह घटना
जागृति कॉलोनी एक शांत और रिहायशी इलाका है। दोपहर का समय था जब कुछ लोगों ने अपने घरों के आसपास सांपों को देखा। शुरुआत में लोगों ने सोचा कि यह एक या दो सांप होंगे, लेकिन जल्द ही पता चला कि 5 से 6 सांप अलग-अलग जगहों पर दिख रहे हैं। यह देखकर कॉलोनी में अफरातफरी का माहौल बन गया।
बच्चों को घरों के अंदर बुलाया गया और लोग सतर्क हो गए। कुछ ही देर में कॉलोनी के बाहर भीड़ जमा हो गई। लोग डर और घबराहट में एक-दूसरे से बात कर रहे थे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इतने सांप अचानक कहां से आ गए।
शुभम जी.आर को मिली जानकारी
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही थी, तब किसी ने नागपुर के मशहूर वाइल्डलाइफ रेस्क्यूअर शुभम जी.आर को फोन किया। शुभम जी.आर को सांपों के रेस्क्यू में काफी अनुभव है और नागपुर में उनकी पहचान एक साहसी और जिम्मेदार रेस्क्यूअर के रूप में है।
फोन मिलते ही शुभम जी.आर तुरंत अपने उपकरणों के साथ घटनास्थल की ओर निकल पड़े। उन्होंने अपनी टीम को भी सूचना दी और जल्द से जल्द जागृति कॉलोनी पहुंचने की तैयारी की।
मौके पर पहुंचकर किया गया रेस्क्यू
शुभम जी.आर जब घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां काफी भीड़ जमा थी। लोग डरे हुए थे और सांपों से दूरी बना रहे थे। शुभम जी.आर ने सबसे पहले लोगों को शांत किया और उन्हें समझाया कि घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने अपने उपकरणों की मदद से सबसे पहले एक सांप को पकड़ा। यह काम बेहद सावधानी से करना पड़ा क्योंकि सांप घबराए हुए थे। शुभम जी.आर ने अपनी कुशलता और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे तीन सांपों को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया।
बाकी के सांप इस दौरान भाग गए। शुभम जी.आर ने बताया कि सांप डर जाते हैं और जल्दी ही छिपने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कॉलोनी के लोगों से कहा कि अगर बाकी सांप फिर दिखें तो वे तुरंत उन्हें सूचना दें।
सांपों को मिला नया जीवनदान
रेस्क्यू के बाद शुभम जी.आर ने तीनों सांपों को एक सुरक्षित बॉक्स में रखा। उन्होंने सांपों की जांच की और सुनिश्चित किया कि वे स्वस्थ हैं। इसके बाद उन्होंने सांपों को जंगल में छोड़ने की तैयारी की।
शाम तक शुभम जी.आर ने सांपों को नागपुर के बाहर एक सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया। यह जगह सांपों के रहने के लिए उपयुक्त थी और यहां उन्हें फिर से अपना जीवन शुरू करने का मौका मिला।
शुभम जी.आर ने कहा कि हर जीव को जीने का अधिकार है। सांप भी पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें मारने की बजाय बचाना चाहिए।
लोगों ने की तारीफ
जागृति कॉलोनी के लोगों ने शुभम जी.आर की बहुत तारीफ की। उन्होंने कहा कि अगर शुभम जी.आर समय पर नहीं पहुंचते तो स्थिति और खराब हो सकती थी। कुछ लोगों ने तो डर के मारे सांपों को मारने की बात भी की थी, लेकिन शुभम जी.आर ने उन्हें समझाया कि यह सही तरीका नहीं है।
कॉलोनी के एक निवासी ने कहा कि शुभम जी.आर ने न सिर्फ सांपों को बचाया बल्कि हमें भी यह सिखाया कि जंगली जानवरों से कैसे निपटना चाहिए। उनकी बहादुरी और समझदारी की सभी ने सराहना की।

सांप रेस्क्यू क्यों जरूरी है
शुभम जी.आर ने बताया कि नागपुर जैसे शहरों में अक्सर सांपों का दिखना आम बात है। शहर के विकास के कारण जंगलों की जगह कम हो रही है और सांप अपना प्राकृतिक घर खो रहे हैं। इसलिए वे कभी-कभी रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं।
ऐसे समय में प्रशिक्षित रेस्क्यूअर की जरूरत होती है जो सांपों को बिना नुकसान पहुंचाए उन्हें सुरक्षित जगह पर छोड़ सके। सांप मारने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है क्योंकि सांप चूहों और अन्य कीड़ों को खाते हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
शुभम जी.आर का संदेश
रेस्क्यू के बाद शुभम जी.आर ने लोगों से अपील की कि अगर उन्हें कभी सांप दिखे तो घबराएं नहीं। उन्हें तुरंत किसी प्रशिक्षित रेस्क्यूअर को बुलाना चाहिए। सांप को खुद पकड़ने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि हर जीव की अपनी अहमियत है और हमें उनका सम्मान करना चाहिए। जंगली जानवरों को नुकसान पहुंचाने की बजाय उन्हें बचाना हमारा कर्तव्य है।
शुभम जी.आर ने यह भी कहा कि वे हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। अगर किसी को सांप या किसी अन्य जंगली जानवर से जुड़ी कोई समस्या हो तो वे उन्हें संपर्क कर सकते हैं।
एक प्रेरणादायक कहानी
शुभम जी.आर की यह बहादुरी सिर्फ नागपुर के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने दिखाया कि सही प्रशिक्षण और साहस से किसी भी मुश्किल स्थिति को संभाला जा सकता है।
यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि जंगली जीवों के प्रति हमारा रवैया कैसा होना चाहिए। वे हमारे दुश्मन नहीं बल्कि प्रकृति का हिस्सा हैं। हमें उनके साथ सह-अस्तित्व में रहना सीखना होगा।
शुभम जी.आर जैसे लोगों की वजह से ही आज कई जंगली जीवों को नया जीवन मिल पा रहा है। उनका यह काम न सिर्फ सराहनीय है बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी है।
जागृति कॉलोनी की यह घटना एक याद दिलाती है कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए और मुश्किल समय में धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। शुभम जी.आर ने अपने काम से यह साबित कर दिया है कि असली बहादुरी जीवों को बचाने में है, न कि उन्हें नुकसान पहुंचाने में।