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दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड मिलने पर चीन में मची खलबली, कहा धर्म की आड़ में करते हैं राजनीति

दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड मिलने पर चीन में मची खलबली, कहा धर्म की आड़ में करते हैं राजनीति
Dalai Lama Grammy Award: चीन ने जताई नाराजगी, बोला धर्म की आड़ में हो रही राजनीति (Image Source: FB/@DalaiLama)

Dalai Lama Grammy Award: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को 90 वर्ष की उम्र में ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनकी ऑडियो बुक के लिए मिला जिसमें शांति और करुणा का संदेश है। लेकिन चीन ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दलाई लामा धर्म की आड़ में चीन विरोधी गतिविधियां करते हैं।

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Asfi Shadab
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दुनिया भर में शांति और करुणा के प्रतीक माने जाने वाले तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को हाल ही में अमेरिका में आयोजित 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में सम्मानित किया गया। 90 वर्षीय दलाई लामा को यह पुरस्कार उनकी ऑडियो बुक के लिए दिया गया है जिसमें वे शांति, ध्यान और मानवीय मूल्यों पर अपने विचार साझा करते हैं। लेकिन इस खुशी की खबर पर चीन की प्रतिक्रिया बेहद तीखी रही है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस पुरस्कार की कड़ी निंदा करते हुए दलाई लामा पर आरोप लगाया कि वे धर्म की आड़ में चीन विरोधी राजनीति करते हैं।

दलाई लामा को मिला ग्रैमी सम्मान

अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में हुए भव्य ग्रैमी अवॉर्ड्स समारोह में दलाई लामा को बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग की श्रेणी में पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान उनकी ऑडियो बुक “मेडिटेशंस: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा” के लिए मिला है। इस ऑडियो बुक में दलाई लामा शांति, करुणा, ध्यान और इंसानी मूल्यों के बारे में अपने अनुभव और विचार बताते हैं। इसमें खूबसूरत संगीत और कई कलाकारों की प्रस्तुतियां भी शामिल हैं। इस श्रेणी में दलाई लामा के साथ मशहूर कॉमेडियन ट्रेवर नोआ और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जज केतनजी ब्राउन जैक्सन जैसी जानी मानी हस्तियां भी नामांकित थीं लेकिन जीत दलाई लामा की हुई।

चीन की तीखी प्रतिक्रिया क्यों

दलाई लामा को यह पुरस्कार मिलने की खबर के बाद चीन में हड़कंप मच गया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने इस पुरस्कार पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दलाई लामा कोई सामान्य धार्मिक नेता नहीं हैं। उनका कहना है कि दलाई लामा एक राजनीतिक निर्वासित व्यक्ति हैं जो धर्म के नाम पर चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियां चलाते हैं। चीन ने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी तरह के पुरस्कार का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए किए जाने का कड़ा विरोध करता है। चीनी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि बीजिंग इस बात से बेहद नाराज है कि इस पुरस्कार को चीन के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

दलाई लामा का भारत से जुड़ाव

दलाई लामा 1959 में तिब्बत में हुए विद्रोह के बाद से भारत में रह रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर धर्मशाला में स्थित उनका निवास स्थान आज दुनिया भर के श्रद्धालुओं और शांति प्रेमियों के लिए एक तीर्थ स्थल बन गया है। पिछले 65 वर्षों से भारत में रहते हुए उन्होंने तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए अहिंसक संघर्ष जारी रखा है। उनके इन्हीं प्रयासों के लिए उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। दलाई लामा भारतीय संस्कृति और परंपराओं का गहरा सम्मान करते हैं और अक्सर कहते हैं कि वे भारत के बेटे हैं।

पुरस्कार पर दलाई लामा की प्रतिक्रिया

ग्रैमी अवॉर्ड मिलने पर दलाई लामा ने बेहद विनम्रता से अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वे इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं। दलाई लामा ने स्पष्ट किया कि वे इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते बल्कि इसे पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता की समझ दुनिया के सभी आठ अरब लोगों के कल्याण के लिए बेहद जरूरी है। दलाई लामा ने आशा जताई कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को दुनिया के कोने कोने तक पहुंचाने में मदद करेगा।

तिब्बत और चीन का पुराना विवाद

तिब्बत को लेकर चीन और निर्वासित तिब्बती सरकार के बीच विवाद कोई नया नहीं है। चीन का दावा है कि तिब्बत उसका अभिन्न अंग है जबकि दलाई लामा और उनके समर्थक तिब्बत की स्वायत्तता की मांग करते हैं। 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था और 1959 में हुए विद्रोह के बाद दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से दलाई लामा ने दुनिया भर में तिब्बत के मुद्दे को उठाया है लेकिन हमेशा अहिंसक तरीके से। चीन लगातार उन पर आरोप लगाता रहा है कि वे अलगाववादी गतिविधियां चलाते हैं।

ग्रैमी जीतने वालों में दलाई लामा

बेस्ट ऑडियो बुक श्रेणी में दलाई लामा की प्रतिस्पर्धा कुछ जाने माने नामों से थी। इनमें कैथी गार्वर जो “एल्विस रॉकी एंड मी: द कैरल कॉनर्स स्टोरी” के लिए नामांकित थीं, मशहूर कॉमेडियन ट्रेवर नोआ जिन्हें “इंटू द अनकट ग्रास” के लिए नामांकन मिला था, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की पहली अश्वेत महिला जज केतनजी ब्राउन जैक्सन जो “लवली वन: ए मेमॉयर” के लिए नामांकित थीं, और फैब मोरवन जो “यू नो इट्स ट्रू: द रियल स्टोरी ऑफ मिली वैनिली” के लिए प्रतिस्पर्धा में थे। इन सभी को पीछे छोड़ते हुए 90 वर्षीय दलाई लामा ने यह पुरस्कार जीता।

दुनिया में शांति का प्रतीक

दलाई लामा को दुनिया भर में शांति, अहिंसा और करुणा का जीता जागता प्रतीक माना जाता है। वे जहां भी जाते हैं लाखों लोग उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं। उनकी सादगी, मुस्कुराहट और सकारात्मक सोच लोगों को प्रेरित करती है। वे विभिन्न धर्मों के बीच सद्भाव और आपसी समझ की बात करते हैं। उनकी शिक्षाएं केवल बौद्ध धर्म तक सीमित नहीं हैं बल्कि सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं। यही कारण है कि उनके अनुयायी दुनिया के हर कोने में हैं।

राजनीतिक तनाव बरकरार

दलाई लामा का ग्रैमी जीतना एक तरफ जहां उनकी शिक्षाओं और संदेशों को मिली वैश्विक मान्यता को दर्शाता है वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ करता है कि तिब्बत को लेकर चीन और दलाई लामा के बीच का विवाद आज भी उतना ही जीवंत है। चीन की तीखी प्रतिक्रिया यह बताती है कि वह दलाई लामा को लेकर कितना संवेदनशील है। चीन नहीं चाहता कि दलाई लामा को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिले क्योंकि इससे तिब्बत का मुद्दा फिर से चर्चा में आ जाता है।

संगीत जगत में अनोखा सम्मान

ग्रैमी अवॉर्ड्स को संगीत जगत का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। एक धार्मिक और आध्यात्मिक नेता का इस मंच पर सम्मानित होना अपने आप में एक अनोखी बात है। यह दिखाता है कि संगीत और आध्यात्मिकता के बीच गहरा रिश्ता है। दलाई लामा की ऑडियो बुक में शामिल ध्यान और चिंतन की बातें आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को शांति और सुकून देती हैं। शायद यही कारण है कि ग्रैमी जूरी ने इसे सम्मानित करने का फैसला किया।

संदेश फैलाने का माध्यम

दलाई लामा ने खुद कहा है कि वे इस पुरस्कार को अपने संदेशों को व्यापक रूप से फैलाने के एक माध्यम के रूप में देखते हैं। आज की दुनिया में जब हर तरफ हिंसा, नफरत और विभाजन की खबरें आती हैं तब शांति और करुणा का संदेश और भी जरूरी हो जाता है। दलाई लामा की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो बेहतर और शांतिपूर्ण दुनिया बनाने में विश्वास रखते हैं। उनकी ऑडियो बुक अब और भी ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी और उनके विचारों से लाखों लोग प्रभावित होंगे।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।