India LNG Tanker Disha: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भारत को बड़ी ऊर्जा राहत, गुजरात पहुंचा एलएनजी टैंकर ‘दिशा’

India Energy Security : अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से दहेज बंदरगाह पहुंच गया। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
विषयसूची
62,370 मीट्रिक टन एलएनजी है
India LNG Tanker Disha: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। कतर से 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) लेकर चला भारतीय टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंच गया है। यह जहाज पिछले साढ़े तीन महीनों से क्षेत्रीय संघर्ष और समुद्री मार्गों पर लगे प्रतिबंधों के कारण प्रभावित था।
हालांकि सोशल मीडिया और कुछ संदेशों में इसे “भारत के ऊर्जा संकट का अंत” या “हजारों जहाजों के फंसे होने” जैसी अतिरंजित भाषा में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि ‘दिशा’ का सुरक्षित पहुंचना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक घटना है, मगर इससे पूरे ऊर्जा संकट के तत्काल समाप्त होने का दावा करना सही नहीं होगा।
लंबे समय तक प्रभावित क्षेत्र में ही रुका रहा
रिपोर्टों के अनुसार, ‘दिशा’ भारत की पेट्रोनेट एलएनजी के लिए चार्टर किया गया जहाज है, जिसने 1-2 मार्च को कतर के रास लाफान बंदरगाह से एलएनजी कार्गो उठाया था। इसके बाद अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न सुरक्षा संकट के कारण जहाज लंबे समय तक प्रभावित क्षेत्र में ही रुका रहा। 15 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने वाला पहला भारत-गामी एलएनजी पोत बना।
समुद्री मामलों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ‘दिशा’ का सफल ट्रांजिट केवल एक जहाज की यात्रा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियां बहाल हो रही हैं। इस मार्ग से सामान्य परिस्थितियों में विश्व के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। पिछले तीन महीनों में इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता देखी गई थी।
भारत सबसे बड़े एलएनजी आयातकों में शामिल
भारत दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी आयातकों में शामिल है और उसकी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा कतर सहित खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में ‘दिशा’ का दहेज पहुंचना देश की गैस आपूर्ति श्रृंखला के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। दहेज टर्मिनल भारत के प्रमुख एलएनजी आयात केंद्रों में से एक है, जहां आयातित गैस को पुनः गैसीय रूप में परिवर्तित कर विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने जहाज भेजने को लेकर सतर्क हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों जहाज अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं और बीमा लागत, सुरक्षा जोखिम तथा समुद्री मार्गों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने में समय लग सकता है। इसलिए केवल एक जहाज के पहुंचने से पूरे क्षेत्र में समुद्री यातायात सामान्य हो गया है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
तेल और गैस बाजारों में भी राहत
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के तहत युद्धविराम, समुद्री मार्गों को खोलने और आगे की वार्ताओं के लिए रूपरेखा तय की गई है। इस समझौते के बाद तेल और गैस बाजारों में भी राहत देखने को मिली है तथा कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौता स्थायी रूप से लागू रहता है और होर्मुज में यातायात सामान्य होता है, तो भारत सहित एशियाई देशों को ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों के मोर्चे पर लाभ मिल सकता है। फिलहाल इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण राहत और सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि संकट के पूर्ण अंत के रूप में।

