अमेरिका की AI कंपनी के नए टूल से वैश्विक बाजारों में हलचल
Anthropic’s New AI Tool’s Impact on Indian Stock Market Case Study: पिछले हफ्ते अमेरिका की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने कॉर्पोरेट कानूनी टीमों के लिए नए AI टूल्स की घोषणा की। इस घोषणा के बाद यूरोप की कानूनी सॉफ्टवेयर कंपनियों, अमेरिका की टेक्नोलॉजी फर्मों और भारत की IT कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। निवेशकों को डर है कि ऐसे टूल्स की वजह से पारंपरिक कानूनी सेवाओं और सॉफ्टवेयर की जरूरत कम हो सकती है।
बुधवार की सुबह जब भारतीय शेयर बाजार खुला, तो Infosys, Tata Consultancy Services, HCLTech, Tech Mahindra और Wipro के शेयरों में करीब 6 फीसदी तक की गिरावट आ गई। यह बिकवाली विदेशी निवेशकों की तरफ से आई, क्योंकि अमेरिकी बाजारों में रातोंरात नकारात्मक माहौल बन गया था।
Anthropic का नया AI टूल क्या है
Anthropic ने बताया कि यह टूल रोजमर्रा के कानूनी कामों को संभालने के लिए बनाया गया है। इसमें अनुबंध की जांच, गोपनीयता समझौतों की समीक्षा, कानूनी सारांश तैयार करना और मानक ड्राफ्टिंग जैसे काम शामिल हैं। यह टूल कंपनी के AI असिस्टेंट Claude का हिस्सा है और इसे इन-हाउस कानूनी टीमों के लिए प्लगइन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह टूल कानूनी सलाह नहीं देता और AI द्वारा तैयार किए गए किसी भी कंटेंट को इस्तेमाल करने से पहले वकीलों को उसकी समीक्षा करनी होगी। फिर भी निवेशक चिंतित हैं कि ऐसे टूल्स पारंपरिक कानूनी रिसर्च सॉफ्टवेयर और सेवाओं की मांग घटा सकते हैं।
यूरोपीय कानूनी सॉफ्टवेयर कंपनियों को झटका
Anthropic ने अपना नया कानूनी ऑटोमेशन टूल GitHub पर जारी किया। इसके बाद यूरोप की बड़ी कानूनी और प्रकाशन कंपनियों RELX Plc और Wolters Kluwer NV के शेयरों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। Pearson Plc के शेयर भी ट्रेडिंग में फिसल गए।
ये कंपनियां कानूनी डेटाबेस, रिसर्च टूल्स और प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर बनाती हैं। AI टूल्स के आने से इनके बिजनेस मॉडल पर असर पड़ने की आशंका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI तेजी से विकसित होता रहा, तो इन कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी।
भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में गिरावट
बुधवार सुबह 9:30 बजे तक भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। Infosys, TCS, HCLTech, Tech Mahindra और Wipro के शेयर 6 फीसदी तक गिरे। यह बिकवाली विदेशों से आई।
अमेरिकी बाजारों में रातोंरात नकारात्मक प्रतिक्रिया हुई और जब दलाल स्ट्रीट पर कारोबार शुरू हुआ, तब तक भावना पहले ही कमजोर हो चुकी थी। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय IT शेयरों में बड़े खिलाड़ी हैं, इसलिए उनकी बिकवाली का सीधा असर पड़ता है।
अमेरिका में शेयरों में भारी गिरावट
कानूनी रिसर्च और सॉफ्टवेयर सेवाओं से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। Thomson Reuters, LegalZoom और London Stock Exchange Group के शेयरों में 12 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।
इसके बाद नुकसान पूरे सॉफ्टवेयर सेक्टर में फैल गया। PayPal, Expedia Group, EPAM Systems, Equifax और Intuit के शेयर 10 फीसदी से ज्यादा गिर गए। सॉफ्टवेयर, फाइनेंशियल डेटा और एक्सचेंज से जुड़े दो S&P इंडेक्स की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 300 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
बाजार विशेषज्ञों की राय
B Riley Wealth Management के बाजार विशेषज्ञ Art Hogan ने The Wall Street Journal को बताया कि निवेशक उन सभी कंपनियों को लेकर सतर्क हो रहे हैं जो तेजी से विकसित हो रहे AI से प्रभावित हो सकती हैं।
Hogan ने कहा, “अगर चीजें उतनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं जितना हम OpenAI और Anthropic से सुनते हैं, तो यह समस्या होगी। निवेशक उन सभी कंपनियों के पीछे जाना शुरू कर रहे हैं जो बाधित हो सकती हैं, जिसमें हर तरह के सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन नाम शामिल हैं।”
भारतीय IT उद्योग के लिए इसका क्या मतलब है
इस बिकवाली का मतलब यह नहीं है कि भारतीय IT उद्योग असफल हो रहा है। लेकिन यह दिखाता है कि निवेशक स्पष्ट सबूत चाहते हैं कि कंपनियां AI युग के हिसाब से तेजी से खुद को बदल सकती हैं।
ज्यादातर बड़ी भारतीय IT कंपनियां पहले से ही क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑटोमेशन और AI आधारित सेवाओं में निवेश कर रही हैं। TCS, Infosys और Wipro ने AI टूल्स और सॉल्यूशंस विकसित करने के लिए अलग टीमें बनाई हैं।
भारतीय IT की मजबूती
Anthropic’s New AI Tool’s Impact on Indian Stock Market Case Study: भारतीय IT उद्योग देश के सबसे प्रतिस्पर्धी वैश्विक उद्योगों में से एक है। इसके पास मजबूत प्रतिभा, बड़े पैमाने पर संचालन और दुनिया भर में ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं।
हालांकि AI के आने से कुछ पारंपरिक सेवाओं की मांग कम हो सकती है, लेकिन नई तकनीकों को अपनाने और AI समाधान बनाने में भी बड़ा मौका है। कंपनियां जो तेजी से बदलाव करेंगी, वे इस बदलाव से फायदा उठा सकेंगी।
आगे की राह
AI की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। हर हफ्ते नए टूल्स और मॉडल आ रहे हैं जो पुराने तरीकों को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय IT कंपनियों को इस बदलाव को अवसर के रूप में देखना होगा।
निवेशकों की चिंता स्वाभाविक है, लेकिन लंबे समय में वे कंपनियां सफल होंगी जो नई तकनीक को अपनाएंगी और अपने ग्राहकों को बेहतर समाधान देंगी। भारतीय IT उद्योग के पास वह क्षमता है जो इस चुनौती को पार कर सके।