सेवानिवृत्त सैनिक की समाज सेवा की अनूठी मिसाल
Major Hemant Jakate Donation: नागपुर शहर से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देने वाले मेजर हेमंत जकाते ने अपनी पेंशन से बचाए गए साढ़े सात लाख रुपये स्वर्गीय भानुताई गडकरी ग्रामीण विकास संस्था को दान में दिए हैं। यह राशि केवल एक आर्थिक योगदान नहीं है, बल्कि एक सैनिक के जीवनभर समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक है। मेजर जकाते ने साबित किया है कि देश की सेवा केवल वर्दी पहनकर ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर की जा सकती है।
तीन युद्धों के साक्षी रहे मेजर जकाते
मेजर हेमंत जकाते का सैन्य जीवन अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में देश के लिए लड़ाई लड़ी। तीन ऐतिहासिक युद्धों में भाग लेना किसी भी सैनिक के लिए गर्व की बात होती है। इन युद्धों में उन्होंने जो अनुभव हासिल किए, वह उनके जीवन की अमूल्य संपत्ति बन गए। सेना में रहते हुए उन्होंने न केवल देश की सीमाओं की रक्षा की, बल्कि अनुशासन, समर्पण और त्याग के मूल्यों को भी आत्मसात किया।
सेवानिवृत्ति के बाद भी मेजर जकाते ने इन मूल्यों को अपने जीवन में बनाए रखा। उनका मानना है कि सैनिक होने का मतलब केवल युद्ध के मैदान में लड़ना नहीं है, बल्कि समाज के उत्थान के लिए भी काम करना है। उनकी यह सोच उनके इस दान में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
पारिवारिक संबंधों का निर्वाह
मेजर हेमंत जकाते और उनकी दिवंगत पत्नी सुलभा जकाते के केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की स्वर्गीय माता भानुताई गडकरी के साथ गहरे पारिवारिक संबंध थे। यह रिश्ता केवल औपचारिकता का नहीं, बल्कि सच्ची आत्मीयता और विश्वास पर आधारित था। इसी रिश्ते को निभाते हुए मेजर जकाते दंपति ने स्व. भानुताई गडकरी के नाम पर चलने वाली ग्रामीण विकास संस्था को यह योगदान देने का फैसला किया।
यह संस्था नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम कर रही है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए यह संस्था निरंतर प्रयासरत है। मेजर जकाते का यह दान संस्था के कार्यों को और मजबूती प्रदान करेगा।
नितिन गडकरी की भावपूर्ण प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मेजर जकाते के इस दान की सराहना करते हुए कहा कि यह एक असाधारण योगदान है। उन्होंने कहा कि सेना में सेवा के दौरान मेजर जकाते ने देश की रक्षा की और सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज की सेवा करने का संकल्प बनाए रखा। यह उनके चरित्र की महानता को दर्शाता है।
गडकरी ने कहा कि मेजर जकाते ने अपनी पेंशन से बचाई गई राशि को समाज के कल्याण के लिए दान किया, यह आज के समय में एक दुर्लभ उदाहरण है। जब अधिकांश लोग अपनी बचत को केवल अपने परिवार के लिए सुरक्षित रखते हैं, तब मेजर जकाते ने समाज को प्राथमिकता दी। यह त्याग और समर्पण की सच्ची भावना है।
पंचवटी वृद्धाश्रम में जीवन
वर्तमान में मेजर हेमंत जकाते नागपुर के उमरेड मार्ग पर स्थित पंचवटी वृद्धाश्रम में निवास कर रहे हैं। वृद्धाश्रम में रहते हुए भी उनका जीवन सादगी और संतोष से भरा है। उनका कहना है कि उन्हें जो संस्कार मिले हैं, उनमें समाज से लेने से अधिक समाज को देने की भावना है। यही भावना उनके जीवन का मूल मंत्र रही है।
मेजर जकाते का मानना है कि सच्ची खुशी और संतोष धन इकट्ठा करने में नहीं, बल्कि उसे जरूरतमंदों के लिए खर्च करने में है। उनके लिए यह दान केवल एक आर्थिक लेन-देन नहीं है, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों और मूल्यों को समाज के साथ साझा करने का माध्यम है।
समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत
मेजर हेमंत जकाते की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा है। आज के समय में जब लोग अपने स्वार्थ में डूबे रहते हैं, तब मेजर जकाते जैसे लोग समाज को दिशा दिखाते हैं। उनका यह कदम युवा पीढ़ी के लिए भी संदेश है कि देश और समाज की सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य होना चाहिए।
सेवानिवृत्त सैनिकों के योगदान को अक्सर भुला दिया जाता है, लेकिन मेजर जकाते ने साबित किया है कि सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। उनकी यह पहल अन्य सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
संस्था के विकास कार्यों में मदद
Major Hemant Jakate Donation: स्व. भानुताई गडकरी ग्रामीण विकास संस्था विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, शिक्षा का प्रसार और ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना इस संस्था के मुख्य उद्देश्य हैं। मेजर जकाते की दी गई राशि से संस्था अपने कार्यों को और व्यापक बना सकेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या है। यह संस्था इन क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाकर और दवाइयां उपलब्ध कराकर लोगों की मदद करती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्था गरीब बच्चों को किताबें और अन्य सामग्री उपलब्ध कराती है। मेजर जकाते का यह दान इन सभी कार्यों को गति देगा।
त्याग और समर्पण का संदेश
मेजर हेमंत जकाते की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक संदेश है। उन्होंने अपने जीवन से यह सिखाया है कि सच्ची संपत्ति वह नहीं जो हम अपने लिए जमा करते हैं, बल्कि वह है जो हम दूसरों के लिए खर्च करते हैं।
उनका यह कदम दिखाता है कि उम्र केवल एक संख्या है और समाज सेवा की कोई उम्र नहीं होती। वृद्धावस्था में भी मेजर जकाते ने अपने समर्पण को बनाए रखा और समाज के लिए योगदान दिया। यह उनके उच्च चरित्र और मजबूत इरादों का प्रमाण है।
मेजर हेमंत जकाते का यह दान नागपुर और पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उनकी यह पहल न केवल ग्रामीण विकास में मदद करेगी, बल्कि समाज में त्याग और समर्पण की भावना को भी मजबूत करेगी।