सोना और चांदी की कीमतों में लगातार दो दिन की तेजी के बाद गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती की वजह से कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर मार्च डिलीवरी के लिए चांदी की कीमत 26,850 रुपये यानी 10 फीसदी की गिरावट के साथ 2,42,000 रुपये प्रति किलो पर आ गई। पिछले सत्र में यह 2,68,850 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। वहीं अप्रैल अनुबंध के लिए सोने की कीमत में 2,310 रुपये यानी 1.51 फीसदी की कमी आई और यह 1,50,736 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया जबकि बुधवार को यह 1,53,046 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में सोना और चांदी में जो तेज उछाल आया था उसके बाद मुनाफावसूली शुरू हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं की मांग को प्रभावित किया है क्योंकि डॉलर में मजबूती आने से दूसरी मुद्राओं में सोना महंगा हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर मार्च डिलीवरी के लिए चांदी 8.85 डॉलर यानी 10.48 फीसदी गिरकर 75.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। दिन के कारोबार में चांदी में 13 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई और यह 73.38 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर को छू गई। इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने बताया कि चांदी में 14 फीसदी तक की गिरावट आई जो लगातार दो दिन की वापसी के बाद आई है। कीमती धातुओं पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव बना हुआ है और बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है।
सोने की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीचे की ओर बढ़ीं। कॉमेक्स पर अप्रैल डिलीवरी के लिए सोना 80 डॉलर यानी 1.61 फीसदी गिरकर 4,870.9 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। पिछले सत्र में पीली धातु ने एक बार फिर 5,000 डॉलर का स्तर पार किया था और लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर 5,113.9 डॉलर प्रति औंस को छू लिया था। त्रिवेदी के अनुसार यह बिकवाली मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से आई है जिसे फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और ब्याज दरों में कटौती की धीमी गति की उम्मीदों से समर्थन मिल रहा है।
डॉलर की मजबूती का असर
अमेरिकी डॉलर गुरुवार को लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया जिससे डॉलर में कारोबार होने वाला सोना दूसरी मुद्राओं के धारकों के लिए महंगा हो गया। इससे कीमती धातुओं में गति धीमी पड़ गई। केसीएम के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वाटरर ने कहा कि वार्श के नामांकन के साथ डॉलर को नई जान मिली है और मुद्रा आगे बढ़ने में सफल रही है। हाल की अत्यधिक अस्थिरता को देखते हुए व्यापारी अब सोने पर अधिक सतर्क हैं।
डॉलर में मजबूती का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगी हो जाती है। जब डॉलर मजबूत होता है तो उभरते बाजारों से मांग कम हो जाती है क्योंकि उन्हें अधिक स्थानीय मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। यह कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव डालता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
बाजार में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों को दो भागों में बांट दिया है। कुछ विश्लेषक इसे खरीदारी का मौका मान रहे हैं जबकि दूसरे निकट भविष्य में अस्थिरता को लेकर सतर्क हैं। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि हालिया बिकवाली के बावजूद सोने और चांदी में आई गिरावट को समेकन का चरण माना जाना चाहिए न कि रुझान में संरचनात्मक बदलाव।
उन्होंने बताया कि कॉमेक्स गोल्ड 4,850 से 5,000 डॉलर के क्षेत्र के पास कारोबार कर रहा है जो 5,500 से 5,600 डॉलर के हालिया उच्च स्तर से तेज गिरावट के बाद है। व्यापक तेजी का रुझान बरकरार है और यह गिरावट मुनाफावसूली और स्वस्थ मूल्य समायोजन को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि 4,700 से 4,800 डॉलर के समर्थन क्षेत्र में मजबूत खरीदारी दिख रही है और इस सीमा से ऊपर स्थिर बने रहने से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
घरेलू बाजार का हाल
घरेलू बाजार की बात करें तो एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स वर्तमान में हाल के शिखर से तेज गिरावट के बाद निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। पोनमुडी ने कहा कि एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1,49,000 से 1,55,000 रुपये के क्षेत्र के पास कारोबार कर रहे हैं जो 1,80,000 से 1,81,000 रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर से तेज गिरावट के बाद है। हालांकि पहले की तेजी ने अत्यधिक गति और मुनाफावसूली का कारण बनाया लेकिन व्यापक तेजी की संरचना बरकरार है।
औगमॉन्ट में हेड रिसर्च रेनिशा चैनानी ने कहा कि सोना और चांदी ने हाल के लाभ को मिटा दिया और दो दिन की वापसी को तोड़ते हुए कीमती धातु बाजारों में नए सिरे से बिकवाली का दबाव और बढ़ी हुई अस्थिरता वापस आ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में अस्थिरता जारी रह सकती है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
वैश्विक कारक और भविष्य की संभावनाएं
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहने वाली हैं और ऐसे समय में सोना और चांदी सुरक्षित आश्रय संपत्ति के रूप में काम करना जारी रखेंगे। हाल ही में हुए रॉयटर्स सर्वेक्षण में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करने वाले वर्ष 2025 के बाद 2026 में भी सोने के अच्छा प्रदर्शन करने की भविष्यवाणी की गई है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की कीमतों में वृद्धि में योगदान देती रहने की उम्मीद है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति भी कीमती धातुओं के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। ब्याज दरों में कटौती की गति धीमी होने की उम्मीद से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-उपज देने वाली संपत्तियों को कम आकर्षक बनाती हैं क्योंकि निवेशकों को रखने की अवसर लागत अधिक होती है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी गिरावट
दिलचस्प बात यह है कि कीमती धातुओं के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी गिरावट देखी गई। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन गुरुवार को नवंबर 2024 में डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति चुनाव जीत के बाद पहली बार 70,000 डॉलर से नीचे आ गई। डिजिटल मुद्रा 69,821.18 डॉलर के निचले स्तर तक गिर गई इससे पहले कि वह वापस 70,000 डॉलर से ऊपर चढ़ी।
बिटकॉइन हाल के हफ्तों में तेजी से गिरा है क्योंकि निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पीछे हट रहे हैं। यह अक्टूबर में 126,000 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। यह दर्शाता है कि न केवल कीमती धातुओं बल्कि अन्य वैकल्पिक निवेश विकल्पों में भी दबाव बना हुआ है।
विभिन्न शहरों में सोने की कीमतें
भारत के विभिन्न शहरों में सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है जो स्थानीय करों और परिवहन लागत पर निर्भर करता है। गुरुवार को आई गिरावट का असर सभी शहरों में देखा गया। महानगरों में सोने की कीमतें आमतौर पर छोटे शहरों की तुलना में थोड़ी अलग होती हैं। स्थानीय ज्वैलर्स भी अपने मार्जिन के आधार पर कीमतें तय करते हैं।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सोना खरीदने से पहले विभिन्न स्रोतों से कीमतों की जांच करें और प्रमाणित विक्रेताओं से ही खरीदारी करें। हॉलमार्क युक्त सोना खरीदना हमेशा बेहतर होता है जो शुद्धता की गारंटी देता है।
आगे क्या उम्मीद करें
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में कीमती धातुओं में अस्थिरता जारी रह सकती है। अमेरिकी डॉलर की चाल, फेडरल रिजर्व की नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम प्रमुख कारक रहेंगे जो कीमतों की दिशा तय करेंगे। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका हो सकती है खासकर उन निवेशकों के लिए जो लंबी अवधि में निवेश करना चाहते हैं।
हालांकि अल्पकालिक व्यापारियों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार अगर सोना प्रमुख समर्थन स्तरों से ऊपर बना रहता है तो आगे तेजी की संभावना बनी रहेगी।
मध्यम अवधि में वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी एक सकारात्मक कारक बनी रहेगी। कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं जो कीमतों को समर्थन प्रदान करता है। इसके अलावा उभरते बाजारों में सोने की मांग भी मजबूत बनी हुई है।
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