Silver Price Today: चांदी को अक्सर सोने की छोटी बहन कहा जाता है, लेकिन निवेश के मामले में इसकी चाल कई बार सोने से कहीं ज्यादा तेज और चौंकाने वाली होती है। बीते कुछ हफ्तों में चांदी ने जो ऊंचाई देखी थी, उसने निवेशकों को बड़े मुनाफे के सपने दिखाए थे। लेकिन 6 फरवरी की सुबह जैसे ही बाजार खुला, तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आई। चांदी की कीमत गिरकर 2,99,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जबकि 30 जनवरी को यही भाव 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर था।
यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अस्थिरता का संकेत है, जो पिछले कुछ समय से चांदी के बाजार में बनी हुई थी। जो लोग इसे सुरक्षित निवेश मानकर इसमें उतरे थे, उनके लिए यह झटका थोड़ा बड़ा जरूर है।
कुछ दिनों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों
अगर पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों को देखें, तो चांदी की कीमतों में अचानक और तेज गिरावट ने सभी को चौंका दिया है। 30 जनवरी को जहां चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार थी, वहीं अब यह करीब 1 लाख रुपये तक फिसल चुकी है। इतनी कम अवधि में इतना बड़ा बदलाव सामान्य नहीं माना जाता। यह साफ इशारा करता है कि बाजार में सट्टा गतिविधियां और अंतरराष्ट्रीय दबाव दोनों ही सक्रिय रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी है चाल
चांदी का भारतीय बाजार काफी हद तक वैश्विक संकेतों पर निर्भर करता है। विदेशी बाजारों में चांदी का हाजिर भाव 76.26 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता ने चांदी पर दबाव बनाया है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो चांदी जैसी धातुओं में उतार-चढ़ाव और तेज हो जाता है।
विशेषज्ञ की राय ने बढ़ाई सतर्कता
निर्मल बंग सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और कमोडिटीज रिसर्च हेड कुणाल शाह का मानना है कि चांदी में तेजी का दौर फिलहाल खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, अब अगर कीमतों में कोई उछाल आता भी है, तो उसे खरीदारी के बजाय बेचने के मौके के तौर पर देखना चाहिए। उनका यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कुछ समय में चांदी में बहुत ज्यादा और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
क्या चांदी अब जोखिम भरा निवेश बन गई है
चांदी हमेशा से सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर मानी जाती रही है। लेकिन मौजूदा हालात में यह अस्थिरता और बढ़ गई है। तेजी और गिरावट इतनी तेज है कि आम निवेशक के लिए सही समय पर फैसला लेना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उतार-चढ़ाव के कारण चांदी फिलहाल ट्रेडिंग के लिहाज से भी जोखिम भरी बन गई है।
छोटे निवेशकों के लिए क्या है सीख
जो लोग छोटी बचत से चांदी में निवेश करते हैं, उनके लिए यह समय सावधानी का है। भावनाओं में बहकर या पिछली तेजी को देखकर निवेश करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। बेहतर होगा कि निवेश से पहले बाजार की दिशा, अंतरराष्ट्रीय संकेत और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का सही आकलन किया जाए।
उद्योग और गहनों की मांग पर असर
चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि उद्योगों और गहनों में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है। कीमतों में गिरावट से ज्वेलरी सेक्टर को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन अगर अस्थिरता बनी रहती है, तो कारोबारी भी बड़े ऑर्डर देने से हिचकिचाएंगे। उद्योगों के लिए भी कीमतों का स्थिर रहना ज्यादा जरूरी होता है, ताकि लागत का सही अनुमान लगाया जा सके।
आगे की राह क्या कहती है
आने वाले दिनों में चांदी की कीमतें वैश्विक आर्थिक हालात, डॉलर की चाल और निवेशकों की धारणा पर निर्भर रहेंगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता लौटती है, तो चांदी को भी सहारा मिल सकता है। लेकिन अगर उतार-चढ़ाव इसी तरह बना रहा, तो निवेशकों को और सतर्क रहने की जरूरत होगी।
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