असम की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गोलाघाट में दिए अपने ताजा बयान से राज्य की राजनीतिक बिसात पर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में मतदाताओं की पहचान की बेहद व्यापक जांच होगी। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी कांग्रेस पार्टी पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं जिन्होंने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
एसआईआर की प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद असम में एसआईआर यानी मतदाता सूची का व्यापक सुधार कार्यक्रम चलाया जाएगा। फिलहाल राज्य में एसआर यानी विशेष पुनरीक्षण का काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में जो एसआईआर होगा वह बेहद सही और पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने निर्वाचन आयोग से पहले भी एसआईआर कराने का अनुरोध किया था लेकिन राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी का काम पूरा नहीं होने की वजह से आयोग ने एसआर की प्रक्रिया शुरू करवाई थी।
कांग्रेस को दी खुली चुनौती
गोलाघाट में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें साफ करना चाहिए कि वे असमिया समाज के साथ खड़े हैं या फिर मियां समुदाय के साथ। हिमंत सरमा ने कहा कि पहले यह समुदाय सिर्फ धुबरी इलाके तक सीमित था लेकिन अब वे धुबुलियाजान तक फैल गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में असमिया लोगों का रहना कैसे संभव हो पाएगा। यह बयान राज्य में पहचान की राजनीति और जनसांख्यिकी बदलाव के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा करता है।
जमीन पर कब्जे का गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि मियां समुदाय ने राज्य में करीब दस लाख एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। यह आरोप राज्य में भूमि अधिकार और अवैध कब्जे की लंबे समय से चली आ रही समस्या की ओर इशारा करता है। हिमंत सरमा का यह बयान सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए कई अभियान चलाए गए हैं।
गौरव गोगोई के सलाहकारों पर निशाना
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके दो प्रमुख सलाहकार हर्ष मंदर और अमानुद्दीन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सलाहकारों ने एक किताब प्रकाशित की है जिसमें यह दावा किया गया है कि मियां समुदाय असम में सबसे पहले आया था। यह बयान असम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विवाद को और गहरा करता है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस तरह के दावे असमिया समाज की पहचान पर सीधा हमला हैं।
पाकिस्तान कनेक्शन की जांच का दावा
हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को एक और गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि गौरव गोगोई के पाकिस्तान से कथित संबंधों की जांच में एक बड़ी वैश्विक साजिश का खुलासा हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक जो सामने आया है वह पूरी सच्चाई का सिर्फ एक प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम पुलिस इस मामले में किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि एक पूरे तंत्र के खिलाफ जांच कर रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी के पाकिस्तान से सीधे संबंध हैं।
वैश्विक साजिश का दावा
हिमंत सरमा ने कहा कि यह केवल असम की राजनीति का मामला नहीं है बल्कि भारत को कमजोर करने की एक बड़ी वैश्विक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि यह एक बेहद संवेदनशील जांच है और इसे सिर्फ राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में अभी तक इलेक्ट्रॉनिक सबूत, केंद्र सरकार से जुड़ा डेटा और इंटरपोल का सहयोग नहीं मिल पाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इन सभी चीजों को जुटाकर पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी।
मेघालय खदान हादसे पर प्रतिक्रिया
मेघालय में हुए खदान हादसे पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य सचिव मेघालय सरकार के साथ लगातार संपर्क में है। हालांकि उन्होंने इस मामले पर विस्तार से कुछ नहीं कहा लेकिन यह स्पष्ट किया कि असम सरकार पड़ोसी राज्य के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषण और असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री के ये बयान विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं। असम में पहचान की राजनीति हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रही है। एसआईआर और एनआरसी जैसे मुद्दे असमिया मतदाताओं के बीच बेहद अहम माने जाते हैं। कांग्रेस पर लगाए गए आरोप भी सीधे तौर पर विपक्ष को घेरने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इन आरोपों का क्या जवाब देती है और असम की राजनीति किस दिशा में मुड़ती है।