Aakash Srivastava, Bihar | सिवान जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र के कन्हौली गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय हरियामा के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र साह पर एक छात्रा से छेड़खानी का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना तब सामने आई जब आरोपी शिक्षक अपने घर पर ट्यूशन पढ़ा रहे थे। मामले की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधानाध्यापक को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
घटना का पूरा विवरण
जानकारी के अनुसार यह घटना कुछ दिन पहले घटी थी, लेकिन पीड़ित परिवार ने हिम्मत जुटाकर इसकी शिकायत दर्ज कराई। छात्रा के परिजनों ने बताया कि वीरेंद्र साह नियमित रूप से अपने घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे। एक दिन जब छात्रा ट्यूशन पढ़ने गई तो आरोपी शिक्षक ने उसके साथ अभद्रता की और छेड़खानी का प्रयास किया। डरी हुई छात्रा ने यह बात अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
मामला सामने आते ही गांव में भारी हंगामा मच गया। ग्रामीणों ने विद्यालय और आरोपी शिक्षक के घर के बाहर जमा होकर नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और प्रशासन से तत्काल न्याय दिलाने की गुहार लगाई। कई अभिभावकों ने कहा कि जिस शिक्षक पर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी होती है, अगर वही इस तरह का कृत्य करे तो यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही बसंतपुर थाने की पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने आरोपी प्रधानाध्यापक वीरेंद्र साह को हिरासत में लेकर थाने में पूछताछ शुरू कर दी। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित परिवार और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो आरोपी शिक्षक के खिलाफ कठोर धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। पुलिस ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का आक्रोश
इस घटना के बाद पूरे इलाके में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल और ट्यूशन वह जगह होती है जहां बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं और उनके माता-पिता भी निश्चिंत रहते हैं। लेकिन जब शिक्षक ही इस तरह की हरकत करने लगें तो अभिभावक अपने बच्चों को कहां भेजें, यह सवाल सबके मन में उठ रहा है।
कई ग्रामीणों ने मांग की है कि इस तरह के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और आरोपी को जल्द से जल्द सजा मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के खिलाफ ऐसे आरोपों की जांच सख्ती से होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई और ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।
शिक्षा विभाग की भूमिका
इस मामले में शिक्षा विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है। आरोपी शिक्षक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात थे, ऐसे में विभाग को भी इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो विभाग को आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी करनी होगी और उसे तत्काल निलंबित करना होगा।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए और उन पर अमल सुनिश्चित करे। हर विद्यालय में कैमरे लगाए जाएं और शिक्षकों की नियुक्ति से पहले उनकी पूरी पृष्ठभूमि की जांच की जाए।
समाज में बढ़ती चिंता
यह घटना सिर्फ सिवान की नहीं बल्कि पूरे देश की समस्या को दर्शाती है। पिछले कुछ सालों में स्कूलों और ट्यूशन सेंटरों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे अभिभावकों में गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में शिक्षा देनी चाहिए। उन्हें यह समझाना चाहिए कि अगर कोई भी व्यक्ति उनके साथ गलत व्यवहार करे तो वे तुरंत अपने माता-पिता या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं। साथ ही स्कूलों में काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि बच्चे खुलकर अपनी समस्याएं बता सकें।
कानूनी प्रावधान और सजा
भारतीय कानून में बच्चों के साथ छेड़खानी और यौन उत्पीड़न के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है। पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग के साथ किसी भी तरह का यौन दुर्व्यवहार गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें कम से कम सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। अगर यह मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होता है तो आरोपी शिक्षक को कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत भी महिला या बच्ची से छेड़खानी करना गंभीर अपराध है। पुलिस ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा और आरोपी को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी।
आगे की राह
Siwan Breaking: यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा समाज और सरकार दोनों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। शिक्षण संस्थानों में सख्त नियम लागू होने चाहिए और उनका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। शिक्षकों की नियुक्ति के समय उनकी मानसिक और नैतिक पृष्ठभूमि की जांच जरूरी है।
साथ ही समाज को भी जागरूक होना होगा और बच्चों को सुरक्षित माहौल देना होगा। अभिभावकों को अपने बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें इतना भरोसा देना चाहिए कि वे किसी भी परेशानी में अपने माता-पिता को सबकुछ बता सकें।
सिवान की यह घटना पूरे प्रदेश और देश के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। जरूरत इस बात की है कि सरकार, प्रशासन, शिक्षा विभाग और समाज सभी मिलकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें।