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महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव की मतगणना शुरू, अजित पवार की मौत के बाद टले थे चुनाव

Zilla Parishad Elections Vote Counting: जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव नतीजे, मतगणना जारी
Zilla Parishad Elections Vote Counting: जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव नतीजे, मतगणना जारी (File Photo)

Zilla Parishad Elections Vote Counting: महाराष्ट्र में 12 जिला परिषद और 125 पंचायत समिति चुनाव की मतगणना सोमवार से शुरू हुई। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की हवाई दुर्घटना में मौत के बाद तीन दिन के राजकीय शोक की वजह से चुनाव 5 फरवरी से टलकर 7 फरवरी को हुए। एनसीपी और एनसीपी शरद पवार गुट ने घड़ी चिन्ह पर साथ चुनाव लड़ा।

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Zilla Parishad Elections Vote Counting: महाराष्ट्र में सोमवार की सुबह से 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव के लिए मतगणना का काम शुरू हो गया है। ये चुनाव पहले 5 फरवरी को होने थे लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार की हवाई दुर्घटना में मौत और उसके बाद तीन दिन के राजकीय शोक की वजह से इन्हें 7 फरवरी को कराया गया। इन चुनावों के नतीजे महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों का महत्व

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव हमेशा से ही राज्य की राजनीति में खास जगह रखते हैं। जिला परिषद और पंचायत समितियां ग्रामीण इलाकों के विकास में मुख्य भूमिका निभाती हैं। इन संस्थाओं के जरिए ही गांवों और कस्बों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचता है। इस बार के चुनाव में 12 जिला परिषदों में कुल 731 सदस्यों का चुनाव होना है। वहीं 125 पंचायत समितियों में 1462 सदस्यों के लिए मतदान हुआ है।

किन जिलों में हुए हैं चुनाव

इस बार जिन 12 जिला परिषदों के लिए चुनाव हुए हैं उनमें पश्चिमी महाराष्ट्र के पुणे, सतारा, सांगली, सोलापुर और कोल्हापुर शामिल हैं। कोंकण क्षेत्र से रायगड, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिले हैं। मराठवाड़ा इलाके से छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर जिलों में मतदान हुआ है। ये सभी जिले 50 फीसदी आरक्षण की सीमा के दायरे में आते हैं।

अजित पवार की मौत का असर

उपमुख्यमंत्री अजित पवार की हवाई दुर्घटना में अचानक मौत से पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। वे राज्य के दिग्गज नेताओं में से एक थे और एनसीपी के सबसे बड़े चेहरे माने जाते थे। उनकी मौत के बाद राज्य सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया था। इसी वजह से 5 फरवरी को होने वाले चुनावों को टालकर 7 फरवरी को करना पड़ा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजित पवार की मौत का असर इन चुनावों के नतीजों पर भी दिख सकता है।

एनसीपी गुटों का एकसाथ चुनाव लड़ना

इन चुनावों में एक खास बात यह रही कि एनसीपी और एनसीपी शरद पवार गुट ने मिलकर घड़ी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा है। पार्टी में बंटवारे के बाद यह पहली बार हुआ है जब दोनों गुटों ने एकसाथ चुनाव लड़ने का फैसला किया। अजित पवार की मौत के बाद पार्टी को एक करने की कोशिशें तेज हो गई थीं। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि दोनों गुट पूरी तरह एक होंगे या नहीं, लेकिन इन स्थानीय चुनावों में साथ आना एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मतगणना की प्रक्रिया

राज्य चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं। हर जिले में मतगणना केंद्र बनाए गए हैं जहां सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। मतगणना की प्रक्रिया सुबह से शुरू हो गई है और शाम तक ज्यादातर सीटों के नतीजे आने की उम्मीद है। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद हैं।

राजनीतिक दलों की तैयारी

सभी बड़े राजनीतिक दल इन चुनावों के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवारों के जीतने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। स्थानीय नेता लगातार मतगणना केंद्रों पर मौजूद हैं और नतीजों पर नजर रख रहे हैं। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले की कसौटी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

पश्चिमी महाराष्ट्र का महत्व

पश्चिमी महाराष्ट्र के पांच जिलों में हुए चुनाव खास तौर पर अहम माने जा रहे हैं। यह इलाका गन्ना किसानों का गढ़ है और यहां की राजनीति पर सहकारी संस्थाओं का गहरा असर रहता है। अजित पवार का इस इलाके में मजबूत आधार था और उनकी मौत के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि एनसीपी को कितनी सफलता मिलती है।

कोंकण क्षेत्र की खास स्थिति

कोंकण के तीन जिलों रायगड, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। यह इलाका परंपरागत रूप से शिवसेना का गढ़ रहा है लेकिन पार्टी में बंटवारे के बाद यहां की राजनीति में बदलाव आया है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना दोनों ही इस इलाके में अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

मराठवाड़ा में चुनावी समीकरण

Zilla Parishad Elections Vote Counting: मराठवाड़ा के चार जिलों में भी दिलचस्प चुनावी समीकरण बने हैं। यह इलाका विकास के मामले में पिछड़ा माना जाता है और यहां के लोगों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है। चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों ने यहां विकास के बड़े-बड़े वादे किए थे। अब देखना यह है कि मतदाताओं ने किसे अपना समर्थन दिया है।

नतीजों का असर

इन स्थानीय चुनावों के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समय की दिशा तय करेंगे। जो भी दल या गठबंधन जीतता है उसका मनोबल बढ़ेगा और आगामी चुनावों में उसे फायदा मिलेगा। खासकर अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी की स्थिति क्या रहती है यह देखना बेहद अहम होगा। अगर दोनों गुट मिलकर अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो पार्टी के एक होने की संभावना मजबूत हो सकती है।

स्थानीय निकाय चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद होते हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से ही आम लोगों तक विकास की योजनाएं पहुंचती हैं। महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए ये चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे उनके रोजमर्रा के जीवन पर सीधा असर पड़ता है। मतगणना पूरी होने के बाद साफ हो जाएगा कि किस दल या गठबंधन को जनता का समर्थन मिला है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।