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टाकी पौरसभा में तृणमूल पार्षद पर पूर्व BSF की पत्नी से छेड़छाड़ का आरोप, थाने में शिकायत दर्ज

टाकी पौरसभा में तृणमूल पार्षद पर पूर्व BSF की पत्नी से छेड़छाड़ का आरोप, थाने में शिकायत दर्ज
Taki Municipality Councillors: टाकी में तृणमूल पार्षद पर पूर्व BSF की पत्नी से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप (File Photo)

Taki Municipality Councillors: पश्चिम बंगाल के टाकी पौरसभा में तृणमूल कांग्रेस के वार्ड नंबर 12 के पार्षद मनोरंजन पात्र पर पूर्व बीएसएफ जवान दीपक दास की पत्नी से रात के समय सुनसान सड़क पर छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगा है। महिला ने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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टाकी में पूर्व BSF जवान की पत्नी के साथ हुई शर्मनाक घटना

Taki Municipality Councillors: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के टाकी पौरसभा में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। वार्ड नंबर 10 की रहने वाली एक महिला ने तृणमूल कांग्रेस के वार्ड नंबर 12 के पार्षद मनोरंजन पात्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार, शाम के समय जब वह घर से बाहर निकलकर सड़क से जा रही थी, तब एक सुनसान जगह पर पार्षद मनोरंजन पात्र और उनके कई साथियों ने मोटरबाइक पर आकर उन्हें घेर लिया। महिला का आरोप है कि पार्षद ने बाइक से उतरकर उनके साथ छेड़छाड़ की और चादर से मुंह ढककर उन्हें डराने की कोशिश की।

यह घटना टाकी पौरसभा क्षेत्र में राजनीतिक दबदबे और महिला सुरक्षा के सवालों को एक बार फिर सामने लेकर आई है। पीड़ित महिला के पति दीपक कुमार दास एक पूर्व बीएसएफ जवान हैं, जो अपनी सेवा के बाद अब साधारण नागरिक के रूप में जीवन जी रहे हैं।

पूर्व में हुई मारपीट की घटना से जुड़ा है मामला

इस पूरे प्रकरण की जड़ें साल 2024 में हुई एक घटना से जुड़ी हैं। महिला और उनके पति दीपक दास के अनुसार, 2024 में पार्षद मनोरंजन पात्र और उनके लोगों ने दीपक दास के साथ मारपीट की थी। इस घटना के बाद दीपक दास हसनाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराने गए थे, लेकिन पार्षद के प्रभाव के कारण पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। जब थाने से कोई मदद नहीं मिली, तो दीपक दास ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

पार्षद मनोरंजन पात्र ने दीपक दास को कई बार चेतावनी दी थी कि वह अदालती मामले को वापस ले लें, लेकिन दीपक दास ने हार नहीं मानी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इसी बात का बदला लेने के लिए पार्षद ने उनकी पत्नी के साथ यह शर्मनाक हरकत की है। यह घटना महिला सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक ताकत के दुरुपयोग का एक स्पष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

पीड़ित परिवार की मांग और आरोप

पीड़ित महिला और उनके पति दीपक दास ने पार्षद मनोरंजन पात्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और न्याय की गुहार लगाई है। दीपक दास का कहना है कि उन्होंने देश की सेवा की है और अब वे एक आम नागरिक के रूप में सम्मान के साथ जीना चाहते हैं, लेकिन स्थानीय राजनेता उन्हें और उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं।

महिला ने अपने बयान में कहा है कि वह शाम को घर से निकली थी और अचानक एक सुनसान जगह पर पार्षद और उनके साथियों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने बताया कि पार्षद मनोरंजन पात्र ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया और धमकी भरे लहजे में बात की। इस घटना से महिला और उनके परिवार में भय का माहौल है।

पार्षद ने किया आरोपों का खंडन

वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के पार्षद मनोरंजन पात्र ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्षद ने फोन पर बातचीत में कहा कि यह सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश है जो उनकी छवि खराब करने के लिए रची गई है। मनोरंजन पात्र ने दावा किया कि वह उस समय घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे और यह पूरा मामला उनके खिलाफ एक षड्यंत्र है।

हालांकि पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके पास सबूत हैं और वे पूरी तरह से सच्चाई के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी भी हाल में हार नहीं मानेंगे और न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रखेंगे।

थाने में शिकायत दर्ज, जांच की मांग

पीड़ित महिला और उनके पति ने हसनाबाद थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस से गहन जांच और पार्षद के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस 2024 में हुई मारपीट की घटना के समय सही तरीके से कार्रवाई करती, तो शायद यह घटना नहीं होती।

इस मामले में अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है। स्थानीय समाज में इस घटना को लेकर काफी रोष है और लोग महिला सुरक्षा के सवाल पर चिंतित हैं।

राजनीतिक प्रभाव और महिला सुरक्षा का सवाल

यह घटना एक बार फिर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग और महिला सुरक्षा के गंभीर मुद्दों को सामने लाती है। स्थानीय नेताओं के प्रभाव के कारण आम नागरिकों को न्याय नहीं मिल पाता है। पूर्व बीएसएफ जवान जैसे व्यक्ति भी अपने परिवार की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं, यह बेहद चिंताजनक है।

समाज के विभिन्न वर्गों से इस घटना की निंदा की जा रही है। महिला संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि चाहे कोई भी हो, कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए और किसी को भी राजनीतिक शक्ति का दुरुपयोग करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।

स्थानीय प्रतिक्रियाएं और सामाजिक माहौल

टाकी पौरसभा क्षेत्र में इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कुछ लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े हैं, जबकि कुछ डर के कारण खुलकर बोलने से बच रहे हैं। पूर्व बीएसएफ जवान दीपक दास के परिवार के साथ हुई इस घटना ने क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर एक पूर्व सुरक्षाकर्मी का परिवार सुरक्षित नहीं है, तो आम लोगों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

Taki Municipality Councillors: पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद कानूनी सलाहकारों से भी संपर्क किया है। वे इस मामले को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं और हर मंच पर लड़ने के लिए तैयार हैं। दीपक दास ने कहा है कि वे पहले भी अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं और अब भी वे कानूनी रास्ते से ही न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

इस मामले में अब पुलिस की भूमिका अहम होगी। अगर पुलिस निष्पक्ष जांच करती है और सबूतों के आधार पर कार्रवाई करती है, तो न्याय की उम्मीद बनी रहेगी। लेकिन अगर फिर से राजनीतिक दबाव के आगे पुलिस झुक गई, तो यह पूरे व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा।

यह घटना एक छोटे से स्थानीय विवाद से कहीं बड़ी है। यह राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग, महिला सुरक्षा, पुलिस की भूमिका और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता जैसे कई गंभीर मुद्दों को छूती है। पीड़ित परिवार को न्याय मिले, यह सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।