Operation Tiger 3.0: ‘ऑपरेशन टाइगर 3.0’ के दावों से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई

Operation Tiger 3.0 : महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर 3.0’ को लेकर सियासी माहौल गर्म है। शिंदे गुट और शिवसेना (यूबीटी) के बीच विधायकों के संभावित दलबदल के दावे और खंडन जारी हैं। विपक्षी खेमे की बैठक में कम उपस्थिति और नेताओं के बयानों ने राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ा दी है।
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शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट आमने-सामने
Operation Tiger 3.0: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट और विधायकों के पाला बदलने की अटकलों के बीच “ऑपरेशन टाइगर 3.0” को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। एक ओर जहां शिंदे गुट के नेता दावा कर रहे हैं कि यूबीटी के कई विधायक जल्द ही उनके साथ शामिल हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर शिवसेना (शिंदे गुट) के ही कुछ नेताओं ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
एमवीए बैठक में कम उपस्थिति से शुरू हुई चर्चा
हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की एक बैठक को संबोधित किया गया था। इस बैठक में विपक्षी खेमे के 60 में से केवल 37 विधायक ही उपस्थित हुए। कम उपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं कि विपक्षी गठबंधन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कुछ विधायक संपर्क से बाहर हैं।
इसी बीच शुक्रवार को शिवसेना के मंत्री गुलाबराव पाटिल ने बयान देकर राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया। उन्होंने दावा किया कि “ऑपरेशन टाइगर 3.0” शुरू हो चुका है और शिवसेना (यूबीटी) के लगभग 14 विधायक जल्द ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। पाटिल के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी और संभावित दलबदल की अटकलों को हवा दे दी।
शिवसेना के भीतर ही विरोधाभासी बयान
हालांकि, इसी मुद्दे पर शिवसेना (शिंदे गुट) के ही मंत्री उदय सामंत ने पाटिल के दावों से दूरी बना ली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई “ऑपरेशन टाइगर” चल नहीं रहा है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि महाविकास अघाड़ी के कई विधायक अपनी इच्छा से शिवसेना में शामिल होने के इच्छुक हो सकते हैं। सामंत के इस बयान ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया, क्योंकि एक तरफ वे आधिकारिक तौर पर किसी ऑपरेशन से इनकार कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ संभावित राजनीतिक बदलाव की संभावना भी स्वीकार कर रहे थे।
लोकसभा सांसदों के बाद विधायकों पर नजर
कुछ समय पहले ही उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा था, जब उनके छह लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने उन लोकसभा क्षेत्रों का दौरा शुरू किया जहां से ये सांसद चुने गए थे। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार को नागपुर का दौरा किया। दिलचस्प बात यह रही कि उसी विमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे। राजनीतिक रूप से यह एक संयोग माना गया, लेकिन इसे लेकर चर्चाएं जरूर तेज हो गईं।
विदर्भ के विधायकों का रुख और रैली की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, यूबीटी गुट के विदर्भ क्षेत्र के सभी विधायकों ने पुष्टि की है कि वे आगामी शनिवार को यवतमाल और वाशिम में होने वाली रैलियों में मौजूद रहेंगे। इसे उद्धव ठाकरे के लिए एक राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि क्षेत्रीय स्तर पर फिलहाल विधायकों की एकजुटता बरकरार दिख रही है।
शिवसेना (यूबीटी) के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, किसी भी पार्टी में दो-तिहाई बहुमत (कम से कम 14 विधायक) टूटने पर दलबदल को वैध माना जा सकता है। इसी कारण 14 विधायकों की संभावित संख्या को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज है। इन 20 विधायकों में से 10 मुंबई और शहरी क्षेत्रों से आते हैं, जिनमें आदित्य ठाकरे और वरुण सरदेसाई जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं।
शिंदे गुट का पलटवार
शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने उद्धव ठाकरे के हालिया दौरों को देर से उठाया गया कदम बताया है। उनका आरोप है कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान ठाकरे ने इन क्षेत्रों की अनदेखी की, जिससे कार्यकर्ता असंतुष्ट हुए। इसी के आधार पर वे यह दावा कर रहे हैं कि कई विधायक अब नए राजनीतिक विकल्पों की ओर देख रहे हैं।
गुलाबराव पाटिल ने कहा कि “थोड़ा इंतजार कीजिए, 14 से ज्यादा विधायक हमारे साथ आ सकते हैं।” उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि एकनाथ शिंदे अपनी शैली में शांत रहते हैं और उनकी रणनीति ही सफलता दिलाती है। हालांकि, उनके इस बयान को विपक्ष ने राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
विजय वडेट्टीवार को लेकर अटकलें
Operation Tiger 3.0: इस बीच कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार को लेकर भी अटकलें सामने आईं कि वे शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उदय सामंत ने कहा कि यदि कोई बड़ा नेता शिंदे गुट के साथ आता है तो यह सकारात्मक होगा। लेकिन वडेट्टीवार ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई और इन्हें बदनाम करने की राजनीति बताया।
उदय सामंत ने इस मुद्दे पर यह भी कहा कि राजनीतिक दल बदलना संविधान के तहत एक अधिकार है। उन्होंने 2022 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कई नेताओं ने शिंदे गुट को स्वीकार किया था और उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक या नेता अपनी इच्छा से नई पार्टी या नेतृत्व को स्वीकार करता है, तो इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों खेमों के बीच बयानबाज़ी तेज है। एक ओर दलबदल के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर इनसे इनकार भी किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और अधिक अनिश्चित बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वास्तव में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होता है या यह सिर्फ रणनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित रहता है।

