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Cyber fraud unfreeze scam: फर्जी कोर्ट आदेश और पुलिस के नाम पर साइबर ठगी

Cyber fraud unfreeze scam: फर्जी कोर्ट आदेश और पुलिस के नाम पर साइबर ठगी
Cyber fraud unfreeze scam: फर्जी कोर्ट आदेश और पुलिस के नाम पर साइबर ठगी ( Image - AI )

Cyber Crime : साइबर ठगों ने फर्जी कोर्ट आदेश और पुलिस के नाम से ईमेल भेजकर बैंक से छह फ्रीज खाते खुलवाए और ₹66,452 दूसरे खाते में ट्रांसफर करा दिए। मामले का खुलासा होने पर साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में जांच शुरू कर दी।

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Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
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बैंक से खुलवाए 6 फ्रीज खाते, रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर

Cyber fraud unfreeze scam: साइबर अपराधियों ने इस बार ठगी का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठगों ने पुलिस और अदालत के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक निजी बैंक को धोखा दिया और पहले से फ्रीज किए गए छह बैंक खातों को दोबारा चालू (अनफ्रीज) करा लिया। खाते सक्रिय होते ही उनमें मौजूद राशि दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। मामले का खुलासा होने के बाद तिरुवनंतपुरम शहर की साइबर पुलिस ने बीएनएस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ईमेल पते से संदेश प्राप्त हुआ

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वझुथाकाउड स्थित एक निजी बैंक के शाखा प्रबंधक ने 25 जून को इस संबंध में साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि बैंक को अप्रैल महीने में एक ऐसे ईमेल पते से संदेश प्राप्त हुआ था, जो देखने में तिरुवनंतपुरम शहर साइबर पुलिस की आधिकारिक ईमेल आईडी से काफी मिलता-जुलता था। पहली नजर में यह ईमेल पूरी तरह सरकारी प्रतीत हो रहा था, जिसके कारण बैंक अधिकारियों को उस पर संदेह नहीं हुआ।

लेटरहेड पर तैयार किया गया जाली पत्र

जांच में सामने आया कि ईमेल के साथ साइबर पुलिस के लेटरहेड पर तैयार किया गया एक जाली पत्र, फर्जी कानूनी नोटिस और तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के कथित हस्ताक्षर एवं मुहर वाला फर्जी न्यायालय आदेश भी संलग्न था। इन दस्तावेजों में बैंक को निर्देश दिया गया था कि साइबर पुलिस द्वारा पहले फ्रीज किए गए छह बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से अनफ्रीज किया जाए। इतना ही नहीं, आदेश में यह भी लिखा गया था कि इन खातों में उपलब्ध 66,452 रुपये की राशि मध्य प्रदेश स्थित एक अन्य बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाए।

बैंक पर दबाव बनाने फॉलो-अप ईमेल भी भेजे

पुलिस के अनुसार, ठगों ने केवल एक ईमेल भेजकर ही मामला नहीं छोड़ा। बैंक पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने उसी फर्जी ईमेल आईडी से कई फॉलो-अप ईमेल भी भेजे। इन संदेशों में कथित अदालत के आदेश का तत्काल पालन करने का आग्रह किया गया और देरी न करने की चेतावनी जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया। लगातार आधिकारिक शैली में भेजे गए इन ईमेलों और संलग्न दस्तावेजों के कारण बैंक अधिकारियों को लगा कि यह वास्तव में साइबर पुलिस और अदालत की ओर से जारी निर्देश हैं। इसी विश्वास में बैंक ने छह फ्रीज खातों को सक्रिय कर दिया और संबंधित राशि बताए गए खाते में स्थानांतरित कर दी।

दस्तावेजों और ईमेल की प्रामाणिकता पर संदेह

कुछ समय बाद बैंक अधिकारियों को दस्तावेजों और ईमेल की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। जब उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सत्यापन किया तो पता चला कि न तो ऐसा कोई न्यायालय आदेश जारी किया गया था और न ही साइबर पुलिस ने बैंक को इस प्रकार का कोई ईमेल भेजा था। इसके बाद बैंक ने तुरंत साइबर पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक से उन सभी दस्तावेजों, ईमेल रिकॉर्ड और आंतरिक प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटा रही है, जिनके आधार पर खातों को अनफ्रीज किया गया था। साथ ही जिस बैंक खाते में राशि भेजी गई, उसकी पहचान करने और उस खाते के वास्तविक संचालकों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे षड्यंत्र में कितने लोग शामिल थे और क्या यह किसी बड़े साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा है।

सुनियोजित तरीके से निशाना बना रहे हैं साइबर अपराधी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब केवल आम लोगों को ही नहीं, बल्कि संस्थानों और बैंकों को भी बेहद सुनियोजित तरीके से निशाना बना रहे हैं। सरकारी विभागों की ईमेल आईडी से मिलते-जुलते डोमेन बनाकर फर्जी संदेश भेजना, नकली लेटरहेड तैयार करना, अदालत के आदेशों की हूबहू नकल करना और सरकारी अधिकारियों के हस्ताक्षर एवं मुहर की जालसाजी करना साइबर अपराधियों के नए तौर-तरीकों में शामिल हो गया है। ऐसे मामलों में यदि दस्तावेजों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं किया जाए तो बड़े वित्तीय नुकसान की आशंका बनी रहती है।
पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी, प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने, न्यायालयी अभिलेखों की जालसाजी तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित बैंक खाते की लेन-देन की जानकारी, खाताधारकों का विवरण और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। ईमेल भेजने वाले सर्वर, आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी जानकारियों की भी जांच की जा रही है ताकि आरोपियों तक जल्द पहुंचा जा सके।

पुलिस ने दी अलर्ट रहने की सलाह

Cyber fraud unfreeze scam: साइबर पुलिस ने इस घटना के बाद बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी भी सरकारी विभाग, पुलिस या अदालत के नाम से कोई निर्देश ईमेल के माध्यम से प्राप्त होता है, तो उस पर कार्रवाई करने से पहले उसकी आधिकारिक माध्यम से पुष्टि अवश्य की जानी चाहिए। केवल ईमेल, लेटरहेड या दस्तावेज देखकर किसी आदेश को वास्तविक मान लेना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।


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प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।