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राम मंदिर चढ़ावा मामला: 8 आरोपियों के घर में पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी, करीब 80 लाख नगद बरामद

राम मंदिर चढ़ावा मामला: 8 आरोपियों के घर में पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी, करीब 80 लाख नगद बरामद
राम मंदिर चढ़ावा मामला: 8 आरोपियों के घर में पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी, करीब 80 लाख नगद बरामद (Pic Credit- X @ag_Journalist)

राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। मामले की जांच लगातार जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हुई है।

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Dipali Kumari
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Ram Mandir Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस ने आज रविवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने 79 लाख 85 हजार रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद की है। इसके अलावा कई जरूरी दस्तावेज और अन्य सामान भी जब्त किया गया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि बरामद पैसे का इस्तेमाल कहां किया जाना था और इसका पूरा हिसाब-किताब क्या है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

ट्रस्ट के महासचिव ने दिया इस्तीफा

इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने शनिवार को जानकारी दी कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस्तीफे की वजह के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

क्या है पूरा मामला ?

मालूम हो यह मामला 7 जून को चर्चा में आया था, जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडेय ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की 5 से 7.5 करोड़ रुपये की राशि में गड़बड़ी हुई है। इसके बाद मामला तेजी से बढ़ा और मंदिर ट्रस्ट ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने 15 से 20 जून के बीच अयोध्या में जांच की। शुरुआती जांच में चढ़ावे की नकदी और कीमती सामान के रखरखाव और रिकॉर्ड में कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद आठ नामजद आरोपियों और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

गिरफ्तार आरोपियों में इनका नाम शामिल

पुलिस ने इस मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रामाशंकर मिश्रा, मनीष यादव और करुणेश पांडेय को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा आपस में रिश्तेदार हैं।

फिलहाल एसआईटी और पुलिस पूरे मामले की हर कड़ी की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।