युवारंग महोत्सव का शुभारंभ
Yuva Rang Youth Festival Nagpur University: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में युवाओं के लिए एक खास मंच तैयार किया गया है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी विकास विभाग द्वारा आयोजित युवा महोत्सव ‘युवारंग’ में छात्र-छात्राओं को अपनी कला और प्रतिभा दिखाने का सुनहरा मौका मिल रहा है। यह महोत्सव सोमवार, 9 फरवरी 2026 को अंबाझरी मार्ग पर स्थित गुरु नानक भवन में शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में युवाओं ने अपनी विभिन्न कलाओं का भव्य प्रदर्शन किया और सभी का मन मोह लिया।
यह महोत्सव केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक मजबूत माध्यम है। मानव विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. शामराव कोरेटी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि ‘युवारंग’ युवाओं के सपनों को पूरा करने का एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना विकसित करने में मदद करता है।

28 साल का गौरवशाली सफर
युवारंग महोत्सव कोई नया आयोजन नहीं है। यह पिछले 28 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है और हर साल हजारों विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देता आया है। विद्यार्थी विकास विभाग के संचालक डॉ. विजय खंडाल ने बताया कि इस साल भी कुल 22 विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रतियोगिताओं में संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, चित्रकला, वाद-विवाद और कई अन्य कलाएं शामिल हैं।
इतने लंबे समय से चल रहे इस महोत्सव ने अनगिनत प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया है। कई पूर्व विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं और वे अपनी सफलता का श्रेय युवारंग जैसे मंचों को देते हैं। यह महोत्सव केवल प्रतियोगिता का नहीं, बल्कि सीखने और बढ़ने का भी अवसर है।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्व उपस्थित थे। माननीय कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रमुख अतिथि के रूप में प्रबंधन परिषद के सदस्य डॉ. अजय चव्हाण और डॉ. योगेश भुते मौजूद थे। इसके अलावा अधिसभा सदस्य एडवोकेट मनमोहन वाजपेयी, श्री राहुल हनवते और कई अन्य गणमान्य लोग भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच युवाओं के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि व्यावहारिक कौशल और कला में भी विद्यार्थियों को निपुण होना चाहिए।
बौद्धिक विकास और सामूहिक भावना
डॉ. शामराव कोरेटी ने अपने भाषण में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि युवारंग महोत्सव छात्रों में बौद्धिक विकास और सामूहिक भावना को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी किसी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, तो वे न केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता को निखारते हैं, बल्कि टीम के साथ मिलकर काम करना भी सीखते हैं।
यह महोत्सव विद्यार्थियों को यह सिखाता है कि सफलता के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास ही नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास भी जरूरी है। जब छात्र एक साथ मिलकर किसी नाटक, नृत्य या संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं, तो उन्हें समन्वय, धैर्य और एक-दूसरे का सम्मान करना सिखता है। ये गुण उनके भविष्य में बेहद उपयोगी साबित होते हैं।
विद्यार्थियों को मिलता है आत्मविश्वास
युवारंग जैसे महोत्सव विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाने का काम करते हैं। कई बार विद्यार्थियों में प्रतिभा तो होती है, लेकिन उसे प्रदर्शित करने का मंच नहीं मिल पाता। ऐसे में युवारंग उन्हें वह मंच प्रदान करता है जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी कला दिखा सकते हैं।
डॉ. विजय खंडाल ने बताया कि इस महोत्सव में हर प्रकार के विद्यार्थी को अवसर मिलता है। चाहे कोई संगीत में रुचि रखता हो, नृत्य में, नाटक में, चित्रकला में या वाद-विवाद में, हर किसी के लिए कुछ न कुछ है। यह समावेशिता इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता है।
22 प्रतियोगिताओं का आयोजन
इस साल युवारंग में कुल 22 विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, पाश्चात्य संगीत, शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, एकल नाटक, सामूहिक नाटक, कविता पाठ, कहानी लेखन, निबंध लेखन, चित्रकला, रंगोली, फोटोग्राफी, वाद-विवाद और कई अन्य विधाएं शामिल हैं।
हर प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों से छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों की संख्या हजारों में है और हर कोई अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन कर रहा है। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे, लेकिन असली पुरस्कार तो वह अनुभव है जो उन्हें इस महोत्सव में भाग लेने से मिलता है।
कला और शिक्षा का संगम
युवारंग महोत्सव यह साबित करता है कि शिक्षा और कला दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। कई बार यह समझा जाता है कि पढ़ाई और कला दो अलग-अलग चीजें हैं, लेकिन वास्तव में दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जब विद्यार्थी कला में भाग लेते हैं, तो उनकी रचनात्मकता बढ़ती है, जो उनकी पढ़ाई में भी मदद करती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ कला और खेल में भी समान अवसर मिलें। युवारंग इसी दिशा में एक सराहनीय कदम है। यह महोत्सव न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा को उजागर करता है, बल्कि उन्हें समग्र विकास की ओर भी ले जाता है।
माननीय कुलगुरु का मार्गदर्शन
माननीय कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के मार्गदर्शन में यह महोत्सव सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने की जगह नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करने का स्थान है। युवारंग जैसे कार्यक्रम इसी उद्देश्य को पूरा करते हैं।
डॉ. क्षीरसागर ने कहा है कि विश्वविद्यालय हमेशा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी रहेगा। वे चाहती हैं कि हर विद्यार्थी अपनी छिपी हुई प्रतिभा को खोजे और उसे निखारे। युवारंग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यार्थियों का उत्साह
Yuva Rang Youth Festival Nagpur University: युवारंग में भाग लेने वाले विद्यार्थी बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यह महोत्सव उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। कई विद्यार्थियों ने महीनों तक अभ्यास किया है और अब वे अपनी मेहनत का फल देखने के लिए उत्सुक हैं।
एक प्रतिभागी ने कहा कि उसे नृत्य का बहुत शौक है, लेकिन कभी मंच नहीं मिला। युवारंग ने उसे वह अवसर दिया है जिसका वह सपना देखती थी। एक अन्य विद्यार्थी ने कहा कि वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने से उसका आत्मविश्वास बहुत बढ़ा है और अब वह किसी भी मंच पर बोलने से नहीं डरता।
सामाजिक और सांस्कृतिक एकता
युवारंग महोत्सव केवल प्रतिभा प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा देता है। विभिन्न पृष्ठभूमि, धर्म, जाति और क्षेत्र से आए विद्यार्थी यहां एक मंच पर आते हैं और मिलजुलकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
यह महोत्सव सिखाता है कि कला की कोई भाषा नहीं होती, कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता। कला सबको जोड़ती है और एकता का संदेश देती है। युवारंग में यही संदेश साफ तौर पर देखा जा सकता है।
युवारंग महोत्सव नागपुर विश्वविद्यालय की एक शानदार पहल है जो विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा दिखाने का मंच देती है। यह न केवल उनके कौशल को निखारता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व को भी संवारता है। ऐसे आयोजनों की जरूरत हर शिक्षण संस्थान में है ताकि युवा पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।