Pre-PhD course at RTM Nagpur University: नागपुर के राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में शोध के क्षेत्र में एक नई पहल शुरू हुई है। व्यवसाय प्रबंधन विभाग द्वारा अंतःविषय प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया है, जो शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा। यह पाठ्यक्रम सोमवार, 9 फरवरी 2026 को कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के हाथों शुरू हुआ। यह आयोजन विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन विभाग और श्री निकेतन कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के साथ मिलकर किया गया है।
कुलगुरु ने किया उद्घाटन और दिया मार्गदर्शन
उद्घाटन समारोह में कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम का आयोजन शोधार्थियों के लिए बेहद जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को शोध की सही दिशा मिलेगी और वे अपने अनुसंधान को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकेंगे। डॉ. क्षीरसागर ने व्यवसाय प्रबंधन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं और शोधार्थियों को नए अवसर देते हैं।
कुलगुरु ने यह भी बताया कि आज के समय में शोध का महत्व बहुत बढ़ गया है। उद्योग और शिक्षा के बीच की दूरी को कम करने के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं। उन्होंने शोधार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इस पाठ्यक्रम का पूरा लाभ उठाएं और अपने शोध कार्य को मजबूती दें।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे कई वरिष्ठ शिक्षाविद
उद्घाटन समारोह में वाणिज्य एवं प्रबंधन विद्याशाखा की अधिष्ठाता डॉ. मेधा कानेटकर, विभाग प्रमुख डॉ. राहुल खराबे और डॉ. निखिल अटाले प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। डॉ. मेधा कानेटकर ने प्रस्तावना में कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला आठ दिनों तक चलेगी, जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ शोधार्थियों को मार्गदर्शन देंगे। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को अनुसंधान की बारीकियों से परिचित कराना और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान देना है।
डॉ. कानेटकर ने कहा कि अंतःविषय शोध आज की जरूरत है। इससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय बनता है और नए विचारों को बढ़ावा मिलता है। इस पाठ्यक्रम में व्यवसाय प्रबंधन के साथ-साथ अन्य विषयों के छात्र भी हिस्सा ले सकते हैं, जो इसे और भी खास बनाता है।
आठ दिनों तक चलेगी यह विशेष कार्यशाला
विभाग प्रमुख डॉ. राहुल खराबे ने स्वागत भाषण में बताया कि यह कार्यशाला 9 फरवरी से 16 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम अंतःविषय शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें शोध पद्धति, डेटा विश्लेषण, शोध लेखन और प्रकाशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
डॉ. खराबे ने यह भी जानकारी दी कि इस पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को चार क्रेडिट प्राप्त होंगे। यह क्रेडिट उनके पीएचडी पाठ्यक्रम में जोड़े जाएंगे, जो उनकी शैक्षणिक प्रगति में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम शोधार्थियों को अधिक योग्य और कुशल बनाते हैं।
शोधार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक ज्ञान
इस कार्यशाला में शोधार्थियों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विशेषज्ञों द्वारा वास्तविक केस स्टडी और उदाहरणों के माध्यम से शोध की प्रक्रिया को समझाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को अपने शोध कार्य में आने वाली समस्याओं का समाधान खोजने में मदद मिलेगी।
कार्यशाला में शामिल होने वाले शोधार्थियों को शोध प्रस्ताव तैयार करने, साहित्य समीक्षा करने और डेटा संग्रहण की तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसके अलावा, शोध में नैतिकता और मौलिकता के महत्व पर भी जोर दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय की शोध को बढ़ावा देने की पहल
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने हमेशा से शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम का आयोजन भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विश्वविद्यालय का मानना है कि उच्च शिक्षा में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं।
विश्वविद्यालय के प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि शोधार्थियों को सभी आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध हो। इसके लिए अनुभवी शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है, जो अपने ज्ञान और अनुभव से विद्यार्थियों को लाभान्वित करेंगे।
व्यवसाय प्रबंधन में शोध का बढ़ता महत्व
आज के बदलते कारोबारी माहौल में व्यवसाय प्रबंधन के क्षेत्र में शोध का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नई तकनीकें, बाजार में बदलाव और उपभोक्ता व्यवहार को समझने के लिए शोध आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम में शोधार्थियों को इन सभी पहलुओं पर ध्यान देने की सलाह दी जाएगी।
व्यवसाय प्रबंधन में शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह कार्यशाला एक सुनहरा अवसर है। वे यहां से नए विचार, नई पद्धतियां और नए दृष्टिकोण सीख सकते हैं, जो उनके शोध कार्य को अधिक प्रभावशाली बनाएंगे।
कार्यक्रम का संचालन और आभार
Pre-PhD course at RTM Nagpur University: कार्यक्रम का संचालन प्रा. भारती गोस्वामी ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यक्रम को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. राहुल खराबे ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर का विशेष धन्यवाद दिया, जिनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से यह कार्यक्रम संभव हो सका।
डॉ. खराबे ने विश्वविद्यालय के सभी विभागों और सहयोगी संस्थानों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, जो शोधार्थियों के विकास में सहायक होंगे।
इस प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम से न केवल नागपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, बल्कि अन्य संस्थानों के शोधार्थी भी लाभान्वित होंगे। यह कार्यक्रम शोध की संस्कृति को मजबूत करने और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। आने वाले दिनों में इस तरह की और भी पहल की उम्मीद की जा रही है, जो शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेंगी।