बजट 2026 पर संसद में पक्ष और विपक्ष के बीच बड़ी बहस
भारत की संसद के दोनों सदनों में केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को यह बजट पेश किया था, जिसके बाद अब देश के भविष्य और विकास के रोडमैप पर नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। जहाँ सत्ता पक्ष इस बजट को 2047 तक विकसित भारत बनाने की नींव बता रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि इसमें आम जनता और रोजगार के लिए कुछ खास नहीं है।
अरुण भारती ने बिहार के विकास और विजन को सराहा
चर्चा में भाग लेते हुए एलजेपी (आर) के नेता अरुण भारती ने केंद्रीय बजट की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह बजट देश के विकास के लिए एक बड़ा विजन लेकर आया है। उनके अनुसार, यह समावेशी है और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलता है। भारती ने विशेष रूप से एमएसएमई (MSME) सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग को मिलने वाले बढ़ावा का जिक्र किया।
बिहार का पक्ष रखते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बिहार को प्राथमिकता दी है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच राज्य को मिलने वाली मदद लगभग तीन लाख करोड़ रुपये थी, जो 2014 से 2024 के बीच बढ़कर नौ लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह तीन गुना वृद्धि राज्य की प्रगति में सहायक होगी।
विपक्षी दलों ने बजट की कमियों पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के डॉ. राज कुमार चब्बेवाल ने बजट पर नाराजगी जताते हुए इसे निराशाजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल हेल्थ मिशन के लिए बजट में कमी की गई है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के इंद्र हंग सुब्बा ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें रिसर्च और इंडस्ट्री पर ध्यान दिया गया है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा।
सुधीर गुप्ता ने बजट के बढ़ते आकार पर दी जानकारी
भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने बजट की चर्चा में शामिल होकर 2047 के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि यूपीए सरकार के समय 2013-14 में बजट का आकार 16 लाख करोड़ रुपये था, जो अब एनडीए सरकार के शासन में 2026-27 तक बढ़कर 53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र और बुनियादी ढांचे (Capital Expenditure) पर खर्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जिससे देश की सुरक्षा और रफ़्तार दोनों बढ़ेगी।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला और डेटा का मुद्दा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस बजट में कुछ भी ठोस नहीं है। राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि एआई के कारण इंजीनियरिंग और आईटी क्षेत्र में नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुनिया में ऊर्जा और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन बजट में इन चुनौतियों से निपटने का कोई रास्ता नहीं दिखाया गया है।
राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर डिजिटल व्यापार नियमों पर नियंत्रण खोने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डेटा आज के समय की सबसे बड़ी शक्ति है और सरकार इसे सुरक्षित रखने में विफल रही है।
अनुराग ठाकुर और अशोक चव्हाण ने बताया कल्याणकारी बजट
भाजपा के वरिष्ठ नेता अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि यह बजट गरीबों के कल्याण, महिलाओं की शक्ति, किसानों की प्रगति और युवाओं के अवसरों को समर्पित है। राज्यसभा में भी ऐसी ही चर्चा देखने को मिली। अशोक चव्हाण ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उद्यमियों और समाज के वंचित वर्गों को मजबूत करने वाला है।
पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के सुझाव
पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एच डी देवेगौड़ा ने कहा कि भारत के पास दुनिया का नेतृत्व करने की प्रतिभा और महत्वाकांक्षा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बजट को केवल नंबरों के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने की समझदारी के लिए याद किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि केवल विकास दर (Growth) काफी नहीं है, बल्कि नीतियों के केंद्र में रोजगार का होना बहुत जरूरी है।
केरल और मछुआरों के मुद्दे पर चर्चा
राज्यसभा में आईयूएमएल के हारिस बीरन ने आरोप लगाया कि बजट में केरल की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों और मछुआरों के लिए इसमें कुछ भी खास नहीं है। उन्होंने केरल में दुर्लभ खनिज परियोजना (Rare Earth Project) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। सदन में चर्चा अभी भी जारी है और दोनों तरफ से दावों और प्रतिदावों का दौर चल रहा है।