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राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर लगाया अमेरिकी व्यापार समझौते में भारत बेचने का आरोप

राहुल गांधी के बयान पर बवाल, भाजपा सांसद ने दिया लोकसभा से निलंबित करने का नोटिस
राहुल गांधी के बयान पर बवाल, भाजपा सांसद ने दिया लोकसभा से निलंबित करने का नोटिस (File Photo)

Rahul Gandhi accuses Modi over US trade deal: लोकसभा में बजट बहस के दौरान राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने डेटा संप्रभुता, स्थानीयकरण नियमों में बदलाव और व्यक्तिगत दबाव के आरोप लगाए। सरकार ने इन्हें बेबुनियाद बताते हुए कहा कि समझौता राष्ट्रहित में है और खेती जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र सुरक्षित हैं।

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संसद में गूंजे तीखे आरोप और जवाबी हमले

Rahul Gandhi accuses Modi over US trade deal: लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए सरकार ने देश के हितों को दांव पर लगा दिया है। राहुल गांधी के इन आरोपों ने सदन में हंगामे की स्थिति पैदा कर दी और सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसे बेबुनियाद राजनीति करार दिया।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि यह व्यापार समझौता केवल कागजों पर दिखने वाला फायदा है, जबकि असलियत में यह भारत की संप्रभुता और आर्थिक स्वतंत्रता को कमजोर करता है। उनके मुताबिक, इस डील में जो शर्तें रखी गई हैं, वे भारत के लिए लंबे समय में नुकसानदायक साबित होंगी।

व्यापार समझौते की मुख्य बातें

भारत और अमेरिका के बीच हुए इस व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इस समझौते के तहत दवाओं और विमान के पुर्जों पर लगने वाले सीमा शुल्क में कटौती की गई है। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में आसानी से प्रवेश मिलेगा और निर्यात बढ़ेगा।

हालांकि, राहुल गांधी ने इस समझौते की कुछ शर्तों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डेटा को स्वतंत्र रूप से बहने देने की शर्त भारत की डेटा सुरक्षा के लिए खतरा है। इसके अलावा, स्थानीयकरण नियमों को हटाने से भारतीय छोटे उद्योगों को नुकसान होगा।

डेटा संप्रभुता पर उठे सवाल

राहुल गांधी ने अपने भाषण में सबसे ज्यादा जोर डेटा संप्रभुता के मुद्दे पर दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते में मुक्त डेटा प्रवाह की शर्त को स्वीकार करके सरकार ने भारतीय नागरिकों के निजी डेटा को खतरे में डाल दिया है। उनका कहना है कि यह डेटा अमेरिकी कंपनियों के हाथ में चला जाएगा और भारत का इस पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा।

विपक्ष के कई सांसदों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि डेटा आज के समय में सबसे कीमती संपत्ति है और इसे विदेशी कंपनियों के हाथों में देना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।

स्थानीयकरण नियमों में बदलाव का असर

व्यापार समझौते के तहत भारत ने कुछ स्थानीयकरण नियमों को हटाने पर सहमति जताई है। राहुल गांधी ने इसे भारतीय उद्योग के लिए बड़ा झटका बताया। उनका कहना है कि ये नियम छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इन्हें हटाने से विदेशी कंपनियों को फायदा होगा और भारतीय कंपनियां पिछड़ जाएंगी।

उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं का मकसद ही था कि उत्पादन भारत में हो, लेकिन अब इन नियमों को हटाकर सरकार अपनी ही नीतियों के खिलाफ जा रही है।

व्यक्तिगत आरोप और संसद में हंगामा

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कुछ ऐसे आरोप भी लगाए जिन्हें सरकारी पक्ष ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री पर कुछ व्यक्तिगत मामलों में दबाव है, जिनका जिक्र करते हुए उन्होंने एपस्टीन फाइलों और अडानी मामले का नाम लिया। इन आरोपों के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसे बिना सबूत का आरोप बताते हुए विरोध किया।

सरकारी बेंचों से कई मंत्रियों ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक नाटक है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है इसलिए वे बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।

सरकार का पक्ष और सफाई

सरकार की तरफ से जवाब देते हुए मंत्रियों ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के हित में है। उन्होंने बताया कि इस डील में खेती जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है। किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

सरकार का कहना है कि इस समझौते से भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे रोजगार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। दवा उद्योग और विमानन क्षेत्र को इससे खासा फायदा होगा।

विपक्ष की चिंताएं और जनता की राय

विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि व्यापार समझौते की सभी शर्तों को सार्वजनिक किया जाए ताकि देश की जनता को पता चल सके कि उनके हितों के साथ कोई समझौता तो नहीं किया गया है। कई अर्थशास्त्रियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है और कहा है कि डेटा सुरक्षा और स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा जरूरी है।

जनता का एक वर्ग मानता है कि व्यापार बढ़ाना जरूरी है लेकिन देश की संप्रभुता से समझौता नहीं होना चाहिए। वहीं कुछ लोग इसे सिर्फ राजनीतिक बहस मानते हैं और कहते हैं कि असली असर तो समय के साथ ही पता चलेगा।

आगे क्या होगा

Rahul Gandhi accuses Modi over US trade deal: अभी यह बहस जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को यूं ही नहीं छोड़ेंगे और संसद के आगामी सत्रों में भी इसे उठाएंगे। सरकार को अब जनता को विश्वास दिलाना होगा कि यह समझौता सचमुच देश के हित में है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह व्यापार समझौता भारत के लिए फायदेमंद है या फिर इसमें कुछ ऐसी शर्तें हैं जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती हैं। समय ही बताएगा कि इस बहस का असली नतीजा क्या होता है।

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Asfi Shadab

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