Punjab Drug Smuggling: सिरप माफिया का नया ठिकाना बना पंजाब? एक साल में जब्त हुईं करीब 9 लाख कोडीन कफ सिरप की बोतलें

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हेरोइन तस्करी और ड्रोन नेटवर्क में भी पंजाब सबसे आगे
Punjab Drug Smuggling: पंजाब में नशे की समस्या अब केवल पारंपरिक मादक पदार्थों तक सीमित नहीं रह गई है। अब दवाओं के गलत इस्तेमाल और तकनीक के जरिए होने वाली तस्करी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में कोडीन आधारित कफ सिरप के दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़े हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में पंजाब से 8,95,508 बोतल कोडीन आधारित कफ सिरप जब्त की गईं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल कई जगह नशे के लिए किया जाता है। यही वजह है कि इसकी अवैध बिक्री और तस्करी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। पंजाब से इतनी बड़ी मात्रा में सिरप बरामद होना इस बात का संकेत है कि नशे के कारोबार में अब दवाओं का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है।

अकेले पंजाब से 2,085.55 किलोग्राम हेरोइन बरामद
एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में देशभर में कुल 3,567 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई। इसमें से अकेले पंजाब से 2,085.55 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई, जो कुल जब्ती का करीब 58 प्रतिशत है। यह आंकड़े पंजाब की भौगोलिक स्थिति को भी दिखाते हैं। राज्य पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब है और इसी वजह से अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान के रास्ते आने वाले मादक पदार्थों की तस्करी के लिए यह क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है। इस रास्ते को अक्सर गोल्डन क्रिसेंट ड्रग रूट के नाम से जाना जाता है।
ड्रोन के जरिए बढ़ रही नशे की तस्करी
रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता सीमा पार से ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर जताई गई है। तस्कर अब पारंपरिक तरीकों की जगह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एनसीबी के आंकड़ों के अनुसार:
– 2021 में ड्रोन से मादक पदार्थ तस्करी के 3 मामले सामने आए
– 2022 में 35 मामले दर्ज हुए
– 2023 में 28 मामले सामने आए
– 2024 में यह संख्या बढ़कर 179 हो गई
– 2025 में 305 मामले दर्ज किए गए
– इन 305 मामलों में से 289 मामले पंजाब से जुड़े थे। इससे साफ है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ भेजना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
विदेशी नागरिक भी ड्रग नेटवर्क में शामिल
एनसीबी की रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025 में देशभर में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में 747 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां:
– नेपाल के नागरिक – 203
– नाइजीरिया के नागरिक – 146
– म्यांमार के नागरिक – 97
बांग्लादेश के नागरिक – 17
– केन्या के नागरिक – 10
– घाना के नागरिक – 9
– एजेंसी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं और अब अलग-अलग देशों के लोगों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है।
सिर्फ पंजाब नहीं, समुद्री रास्तों पर भी बढ़ी चुनौती
एनसीबी ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से जुड़े क्षेत्रों को लेकर भी सतर्कता बढ़ाने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट के अनुसार, तस्कर सुनसान द्वीपों और समुद्री इलाकों में छिपकर काम करने वाले ‘डार्क वेसल्स’ यानी ऐसे जहाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी गतिविधियां आसानी से पकड़ में नहीं आतीं। इस तरह की तस्करी को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि समुद्री रास्ते बहुत बड़े क्षेत्र में फैले होते हैं और तस्कर लगातार नए तरीके अपनाते रहते हैं।
दवाओं के गलत इस्तेमाल पर बढ़ी चिंता
एनसीबी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि मादक पदार्थों के अलावा अब कुछ दवाओं का गलत इस्तेमाल भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। कोडीन आधारित कफ सिरप इसका प्रमुख उदाहरण है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी दवाएं जिनका इस्तेमाल इलाज के लिए किया जाता है, अगर गलत तरीके से ली जाएं तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती हैं। इसलिए इनके अवैध वितरण और बिक्री पर नियंत्रण जरूरी है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती
Punjab Drug Smuggling: पंजाब में नशे का नेटवर्क अब कई स्तरों पर काम कर रहा है। एक तरफ सीमा पार से हेरोइन जैसी ड्रग्स की तस्करी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ दवाओं के जरिए नशे का कारोबार फैल रहा है। ऊपर से ड्रोन जैसी तकनीक ने तस्करों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। एनसीबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब तकनीक आधारित निगरानी, सीमा सुरक्षा और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए इस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए तस्करी के नए तरीकों को समझना, युवाओं में जागरूकता बढ़ाना और दवाओं के दुरुपयोग को रोकना भी उतना ही जरूरी है।

