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शिक्षकों का बड़ा ऐलान! मांगें पूरी नहीं हुईं तो 9 जुलाई को पूरे महाराष्ट्र में ‘स्कूल बंद’

शिक्षकों का बड़ा ऐलान! मांगें पूरी नहीं हुईं तो 9 जुलाई को पूरे महाराष्ट्र में ‘स्कूल बंद’
शिक्षकों का बड़ा ऐलान! मांगें पूरी नहीं हुईं तो 9 जुलाई को पूरे महाराष्ट्र में 'स्कूल बंद'

महाराष्ट्र में प्राथमिक शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार को जल्द फैसला लेने की चेतावनी दी है। मांगें पूरी नहीं होने पर 9 जुलाई को राज्यभर में 'स्कूल बंद' आंदोलन और मुंबई में बड़े धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।

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Dipali Kumari
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Teachers Protest Maharashtra: महाराष्ट्र के कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों की वर्षों से लंबित और ज्वलंत समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक मध्यवर्ती संघटना, शिक्षक समन्वय समिति, महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति, महाराष्ट्र TET/CTET उत्तीर्ण वरिष्ठ शिक्षक कृती समिति, निजी विद्यालय शिक्षक संघ तथा अन्य समान विचारधारा वाले संगठनों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 9 जुलाई को पूरे महाराष्ट्र में राज्यव्यापी ‘स्कूल बंद’ आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही मुंबई में विशाल धरना-प्रदर्शन भी आयोजित किया जाएगा।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

शिक्षक संगठनों ने ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। इनमें कार्यरत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता में शिथिलता, वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल पूरा करना, शिक्षकों के हितों के विरुद्ध जारी शासन निर्णयों को वापस लेना, संवर्ग समायोजन नीति को रद्द करना तथा प्राथमिक शिक्षकों को BLO सहित सभी गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त करना प्रमुख मांगें शामिल हैं।

पढ़ाई पर पड़ रहा असर

संगठनों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षकों पर लगातार प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इससे वे विद्यार्थियों के शिक्षण कार्य पर पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जिसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इसके अलावा TET संबंधी नियमों के कारण हजारों शिक्षकों को पदोन्नति और सेवा संबंधी मामलों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

संवर्ग समायोजन पर आपत्ति

शिक्षक नेताओं ने संवर्ग समायोजन नीति पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस नीति से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की जिला परिषद स्कूलों के अस्तित्व पर असर पड़ सकता है और कई स्थानों पर शिक्षकों की कमी पैदा होने की आशंका है। वहीं BLO और अन्य सरकारी कार्यों का बढ़ता बोझ शिक्षकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

सरकार को अंतिम चेतावनी

शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि उनकी सभी न्यायसंगत मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए। अन्यथा 9 जुलाई को प्रस्तावित राज्यव्यापी स्कूल बंद आंदोलन और मुंबई में होने वाले धरना-प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। यह जानकारी प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्य प्रचार प्रमुख राजेश सावरकर ने दी।

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